ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
उत्तर प्रदेश के रामपुर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने न सिर्फ स्थानीय लोगों को बल्कि पूरे देश को चौंका दिया है। एक महिला ने अपनी पाकिस्तानी नागरिकता को सालों तक छिपाए रखा और सरकारी स्कूल में शिक्षिका की नौकरी कर ली। वो भी लगभग 30 साल तक। बच्चे जो रोज स्कूल जाते थे, उनकी टीचर निकली पाकिस्तानी नागरिक! ये सुनकर किसी का भी दिमाग घूम जाए। अब पुलिस ने उसके खिलाफ फर्जी कागजात बनाने और धोखाधड़ी का केस दर्ज कर लिया है।
सोचिए, हमारे सरकारी दफ्तरों में नौकरियां बांटने का सिस्टम कितना ढीला रहा होगा कि कोई अपनी पूरी पहचान बदलकर अंदर घुस जाए। ये सिर्फ एक महिला की कहानी नहीं, पूरे सिस्टम पर सवाल उठाती है।
महिला की पूरी कहानी: शादी से लेकर नौकरी तक
मामला माहिरा अख्तर नाम की एक महिला का है। रामपुर के मोहल्ला आतिशबाज गली में अख्तर अली की बेटी थी वो। 17 जून 1979 को उसकी शादी पाकिस्तान के सिबगत अली से हुई। शादी के बाद वो पाकिस्तान चली गई और वहां की नागरिकता ले ली। दो बेटियां भी पैदा हुईं। लेकिन तीन साल बाद पति से तलाक हो गया। तलाक के बाद वो अपनी दोनों बेटियों को लेकर पाकिस्तानी पासपोर्ट पर वीजा लेकर रामपुर वापस आ गई।
वीजा खत्म होने के बाद भी वो भारत में ही रुक गई। 1983 में उसके खिलाफ विदेशी कानून के तहत केस भी दर्ज हुआ और कोर्ट ने सजा भी दी। लेकिन इसके बावजूद उसने हार नहीं मानी। अपनी पुरानी भारतीय पहचान और फर्जी निवास प्रमाण पत्र बनाकर 22 जनवरी 1992 को बेसिक शिक्षा विभाग में सहायक अध्यापिका की नौकरी हासिल कर ली। तैनाती हुई सैदनगर ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कुम्हरिया कला में। स्कूल में सब उसे 'फरजाना मैडम' कहते थे।
30 साल तक सरकारी वेतन मिलता रहा। बच्चे पढ़ते रहे, सैलरी आती रही। लेकिन सच छिपा रहा।
कैसे पकड़ी गई? LIU की जांच ने खोला राज
स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) की जांच के दौरान ये राज खुला। LIU को शक हुआ तो उन्होंने नोटिस जारी किया। वीजा बढ़वाने को कहा। तब पता चला कि ये महिला सरकारी नौकरी में है। LIU ने बेसिक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर से रिकॉर्ड चेक किए। सामने आया कि 1992 में नौकरी मिली थी। पाकिस्तानी नागरिकता छिपाकर।
इसके बाद शासन स्तर पर हंगामा मच गया। 2022 में उसे नौकरी से निकाल दिया गया। लेकिन अब हाल ही में शासन के सख्त आदेश पर अजीमनगर थाने में FIR दर्ज हुई। धोखाधड़ी और फर्जी कागजात बनाने के आरोप लगे। पुलिस अधीक्षक रामपुर ने कहा कि जांच पूरी तन्मयता से चल रही है।
बेटी भी फंसी उसी जाल में
सबसे चौंकाने वाली बात ये कि माहिरा की एक बेटी ने भी वही रास्ता अपनाया। उसने फर्जी कागजात से बरेली में सरकारी शिक्षिका की नौकरी पा ली। माधोपुर के प्राथमिक स्कूल में तैनात थी। ये फैमिली पैटर्न बन गया था—पहचान छिपाओ, नौकरी लो। लेकिन अब दोनों पर कार्रवाई हो रही है।
जिला मजिस्ट्रेट अजय कुमार द्विवेदी ने बताया कि महिला का जन्म भारत में ही हुआ था। यहीं पढ़ाई की। शादी पाकिस्तान में हुई, तलाक के बाद लौटी। लेकिन नागरिकता का केस फंस गया। फिर भी फर्जीवाड़ा किया।
पुलिस की तलाश: महिला गायब, चुनौती बढ़ी
अभी तक महिला गायब है। पुलिस घर तलाश रही है, लेकिन सुराग कम हैं। उप निरीक्षक रजनीश कुमार जांच कर रहे हैं। शिक्षा विभाग से दस्तावेज मंगाए गए हैं। अरेस्ट वारंट जारी हो सकता है। ASP अनुराग सिंह ने कहा कि सबूत जुटाए जा रहे हैं। कोई अरेस्ट नहीं हुआ अभी।
ऐसे मामलों में फरार होना आम है। लेकिन पुलिस पीछे नहीं हटेगी।
सिस्टम में सेंध: सरकारी नौकरी पर कैसे सवाल?
ये केस कई सवाल खड़े करता है। भर्ती प्रक्रिया में वेरिफिकेशन कितना सख्त है? फर्जी प्रमाण पत्र कैसे पास हो गए? LIU को इतने साल बाद कैसे पता चला? हजारों टीचर नौकरी के लिए भटकते हैं, मेहनत करते हैं। लेकिन ऊपर से सेटिंग हो तो उनका क्या?
उत्तर प्रदेश में पहले भी ऐसे केस आए। बरेली में शुला खान नाम की पाकिस्तानी महिला टीचर पकड़ी गई थी। लेकिन रामपुर वाला 30 साल का रिकॉर्ड सबसे लंबा है। सरकार को अब सारे रिकॉर्ड चेक करने पड़ेंगे।
स्थानीय लोगों का गुस्सा: स्कूल में पाकिस्तानी?
रामपुर के लोग गुस्से में हैं।
कुम्हरिया कला स्कूल के आसपास वाले कहते हैं—हमारे बच्चों को पढ़ा रही थी
पाकिस्तानी? क्या पता और कितने ऐसे मामले हों।
अभिभावक डरे हुए हैं। लेकिन जिम्मेदार कहते हैं—अब सिस्टम टाइट होगा।
आगे क्या होगा? कानूनी कार्रवाई और सबक
अभी FIR बनी है। भारतीय न्याय संहिता की धाराएं 318(4), 336, 338, 340 लगी हैं। कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होगी। सजा हो सकती है। संपत्ति जब्त हो सकती है। बेटी का केस भी चलेगा।
ये मामला पूरे UP
के शिक्षा विभाग के लिए है। वेरिफिकेशन स्ट्रिक्ट होना चाहिए। आधार,
पैन, नागरिकता प्रमाण—सब चेक। फर्जीवाड़ा करने
वालों को सख्त सजा। तभी भरोसा बनेगा।
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