ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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माघ मेले के दौरान विवादों में रहे स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। इस बार उन पर सेवा में लगे बच्चों के साथ कथित यौन शोषण के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के सामने आने के बाद मामला अदालत तक पहुंच गया है और इसकी जांच भी शुरू हो चुकी है। वहीं स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे साजिश बताया है।
शिकायत के बाद अदालत में दर्ज हुई अर्जी
यह शिकायत आशुतोष ब्रह्मचारी ने की है, जो श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट के अध्यक्ष भी बताए जाते हैं। उन्होंने 28 जनवरी को प्रयागराज की अदालत में अर्जी दाखिल कर आरोपों की जांच और मुकदमा दर्ज करने की मांग की थी।
इस अर्जी पर अदालत में सुनवाई भी हो चुकी है और शिकायतकर्ता के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अदालत के आदेश के बाद पुलिस भी मामले की जांच कर रही है। कोर्ट ने पुलिस से रिपोर्ट मांगी थी, लेकिन रिपोर्ट से संतुष्ट न होने के कारण अगली सुनवाई की तारीख तय की गई है।
नाबालिग बच्चों से जुड़े गंभीर आरोप
शिकायतकर्ता का आरोप है कि माघ मेले के दौरान एक नाबालिग और एक बालिग युवक उनके पास पहुंचे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके साथ कथित तौर पर यौन शोषण किया गया था। बताया गया कि बालिग युवक के साथ घटना तब हुई थी जब वह नाबालिग था।
आरोप यह भी लगाए गए हैं कि आश्रम से जुड़े कुछ लोगों द्वारा बच्चों पर गुरु सेवा के नाम पर दबाव बनाया जाता था। बच्चों को यह विश्वास दिलाया जाता था कि ऐसा करने से उन्हें आशीर्वाद मिलेगा।
कई बच्चों के शोषण का दावा
आशुतोष ब्रह्मचारी का दावा है कि उनके संपर्क में करीब 20 ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने इसी तरह के आरोप लगाए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास कुछ ऐसे सबूत हैं जिन्हें उन्होंने अदालत को सौंप दिया है। शिकायतकर्ता का कहना है कि उन्होंने पहले पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की थी, लेकिन मुकदमा दर्ज नहीं होने पर उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
पुलिस जांच और अदालत की निगरानी
मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने पुलिस को जांच के निर्देश दिए हैं। पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है। अदालत में इस मामले की सुनवाई जारी है और आने वाली तारीखों में आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोपों को बताया झूठा
दूसरी तरफ स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने मीडिया के सामने अपना पक्ष रखते हुए सभी आरोपों को गलत और दुर्भावनापूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि गाय को राष्ट्रमाता घोषित करने और गौ हत्या रोकने के उनके अभियान की वजह से उन्हें निशाना बनाया जा रहा है।
स्वामी का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सभ्य समाज में कल्पना से परे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने अपने पक्ष में सभी प्रमाण अदालत में पेश कर दिए हैं और उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है।
पुराने विवादों का भी किया जिक्र
स्वामी ने यह भी कहा कि इससे पहले भी उनके खिलाफ आरोप लगाए जा चुके हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वामी रामभद्राचार्य से जुड़े कुछ लोगों ने उनके खिलाफ पहले भी केस दर्ज कराया था, लेकिन उसमें कुछ साबित नहीं हुआ था। स्वामी ने इसे एक सोची-समझी साजिश बताया है।
स्वामी की ओर से भी की गई शिकायत
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया कि उन्होंने भी इस मामले को लेकर अदालत में शिकायत दर्ज कराई है। इस मामले में आगे की सुनवाई 20 फरवरी को होनी है। उनका कहना है कि जांच पूरी होने के बाद सच्चाई सामने आ जाएगी।
मामला क्यों बन रहा है बड़ा विवाद?
यह मामला धार्मिक और सामाजिक दोनों दृष्टि से संवेदनशील माना जा रहा है। एक तरफ गंभीर आरोप लगाए गए हैं तो दूसरी तरफ आरोपी पक्ष इन आरोपों को साजिश बता रहा है। ऐसे मामलों में जांच और अदालत की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच पूरी होने का इंतजार करना जरूरी होता है। इससे सच्चाई सामने आने में मदद मिलती है और न्याय की प्रक्रिया मजबूत होती है।
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