ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश विधानसभा में गुरुवार को सपा विधायक रागिनी सोनकर और योगी सरकार में औद्योगिक मंत्री नंद गोपाल नंदी के बीच सदन में जोरदार गहमागहमी देखने को मिली। यह बहस औद्योगिक निवेश, रोजगार और सरकार की उपलब्धियों को लेकर थी।
औद्योगिक निवेश पर उठाए सवाल
सपा विधायक रागिनी सोनकर ने मंत्री से सवाल किया कि सरकार 45 लाख करोड़ के एमओयू साइन करने और ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की बात करती है, लेकिन बीते नौ सालों में केवल नौ प्रतिशत ही काम हुआ। उन्होंने पूछा कि ऐसा क्यों है और जनता के लिए वास्तविक परिणाम कब दिखाई देंगे।
रागिनी ने विशेष रूप से डिफेंस कॉरिडोर का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि चित्रकूट, झांसी, अलीगढ़ और आगरा में यह परियोजना बिल्कुल शून्य है, कानपुर में केवल एक और लखनऊ में दो कॉरिडोर हैं। इसके अलावा एक्सप्रेस वे के आसपास उद्योग बढ़ाने का दावा भी पूरा नहीं हुआ।
औद्योगिक विकास और रोजगार पर चिंता
सपा विधायक ने जोर देकर कहा कि औद्योगिक विकास से युवाओं की आशाएं जुड़ी हैं। उन्होंने पूछा कि औद्योगिक विभाग ने कितनी नौकरियां दी हैं और उनमें से कितनों की सैलरी एक लाख रुपये से ऊपर है। उनका तर्क था कि सिर्फ आंकड़े या बड़े दावे करने से काम नहीं चलेगा, असली सवाल यह है कि आम जनता और युवा वर्ग को लाभ कब मिलेगा।
मंत्री नंदी का जवाब और हंगामा
रागिनी के सवालों का जवाब देने के लिए जब नंद गोपाल नंदी खड़े हुए, तो वे सवालों को ही पढ़ने लगे। इसके बाद रागिनी ने उन्हें टोका और पूछा कि आप सवाल क्यों पढ़ रहे हैं। मंत्री ने जवाब देने की बजाय सपा की पिछली सरकारों की आलोचना करने लगे। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार में प्रदेश उल्टा और बीमारू था, लेकिन उनकी सरकार ने निवेश का माहौल बनाया है।
इस दौरान सदन में हंगामा बढ़ गया। नंदी ने रागिनी पर तंज करते हुए कहा कि उनकी राजनीति इंस्टाग्राम से शुरू होकर फेसबुक पर ही दम तोड़ देती है। सदन के स्पीकर सतीश महाना ने मंत्री को टोका और फिर वित्त मंत्री सुरेश खन्ना से जवाब देने को कहा।
सियासी संदेश और निष्कर्ष
इस बहस में स्पष्ट हुआ कि औद्योगिक निवेश और रोजगार को लेकर जनता में सवाल बढ़ रहे हैं। रागिनी सोनकर ने मेहनती और स्पष्ट सवाल पूछकर सरकार की जवाबदेही सामने रखी। जबकि मंत्री नंदी ने आंकड़ों की बजाय सियासी जवाब देने की कोशिश की।
सदन में हुई यह बहस दर्शाती है कि उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास, निवेश और रोजगार को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। साथ ही यह भी दिखाता है कि विपक्ष की सक्रिय भूमिका जनता की चिंताओं को विधानसभा में सामने लाने में महत्वपूर्ण है।
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