यूपी कांस्टेबल भर्ती 2026: अखिलेश यादव ने CM योगी से मांगी “उम्र में छूट”, बोले- देरी से युवा ओवरएज हो गए
यूपी पुलिस में 32,679 कांस्टेबल पदों की भर्ती को लेकर उम्र सीमा पर विवाद बढ़ा है। अखिलेश यादव ने CM योगी से पुरुष उम्मीदवारों की आयु सीमा बढ़ाने/छूट देने की मांग की और कहा कि भर्ती में देरी व खामियों से कई युवा ओवरएज हो गए हैं। सोशल मीडिया पर भी मांग तेज है।
यूपी कांस्टेबल भर्ती 2026: अखिलेश यादव ने CM योगी से मांगी “उम्र में छूट”, बोले- देरी से युवा ओवरएज हो गए
  • Category: उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश में पुलिस कांस्टेबल भर्ती को लेकर एक बार फिर बहस तेज हो गई है। इस बार मुद्दा भर्ती की संख्या या परीक्षा की तारीख नहीं, बल्कि उम्र सीमा है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मांग की है कि कांस्टेबल भर्ती में पुरुष उम्मीदवारों की आयु सीमा बढ़ाई जाए या फिर उन्हें उम्र में छूट दी जाए। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी और खामियों की वजह से कई युवा ओवरएज हो गए, इसलिए सरकार को नए साल पर “तोहफे” के रूप में राहत देनी चाहिए।

यह मुद्दा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए उम्र सीमा सबसे बड़ा “टर्निंग पॉइंट” होती है। कई उम्मीदवार सालों तक तैयारी करते हैं, लेकिन अगर भर्ती समय पर नहीं निकलती या बार-बार टलती है, तो वही उम्मीदवार उम्र की सीमा पार कर जाते हैं। यूपी में भी कुछ अभ्यर्थियों का यही कहना है कि देरी की मार उन पर पड़ रही है, इसलिए नियमों में राहत मिलनी चाहिए।

अखिलेश यादव ने क्या कहा?

अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार की खामियों के कारण पुलिस भर्ती अनियमित हुई और उसी वजह से अभ्यर्थी ओवरएज हो गए। उन्होंने मांग की कि ऐसे उम्मीदवारों को उम्र में छूट देकर सरकार नए साल का तोहफा दे।

उन्होंने यह भी कहा कि भर्ती प्रक्रिया अगर लचर और दोषपूर्ण रही है, तो उसका नुकसान बेरोज़गार युवा क्यों भुगतें। साथ ही उन्होंने यह लाइन भी कही कि “युवाओं का भविष्य ही देश का भविष्य है” और हर युवा को सम्मान के साथ जीने की शुभकामनाएं दीं। कुल मिलाकर उनका संदेश यह था कि सरकार को युवाओं के पक्ष में फैसला लेना चाहिए।

असल मामला क्या है? (भर्ती और उम्र सीमा)

मामले की जड़ यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड की नई विज्ञप्ति है। जानकारी के मुताबिक कांस्टेबल के 32,679 पदों पर भर्ती की विज्ञप्ति जारी की गई है। इसमें पुरुषों के लिए अधिकतम आयु 22 साल बताई गई है, जबकि महिला उम्मीदवारों की अधिकतम आयु 25 साल बताई गई है।

यहीं से नाराज़गी शुरू हुई। खासकर पुरुष वर्ग के कुछ उम्मीदवारों में इसे लेकर गुस्सा देखने को मिला और सोशल मीडिया पर आयु सीमा बढ़ाने की मांग तेज होने लगी। उम्मीदवारों का तर्क है कि भर्ती में देरी की वजह से कई लोग अब इस सीमा में नहीं आते, इसलिए वे आवेदन ही नहीं कर पा रहे।

“ओवरएज” का मुद्दा युवाओं के लिए क्यों बड़ा है?

सरकारी नौकरी की तैयारी में बहुत समय लगता है—कई बार 2 साल, 3 साल, या उससे भी ज्यादा। ऐसे में उम्र सीमा वही दीवार बन जाती है, जिसके बाद उम्मीदवार के लिए मौके खत्म हो जाते हैं। यही कारण है कि जब किसी भर्ती में उम्र सीमा “कम” लगती है या समय पर भर्ती नहीं निकलती, तो नाराज़गी बढ़ जाती है।

यूपी जैसे बड़े राज्य में पुलिस भर्ती हजारों युवाओं के लिए सबसे बड़ा अवसर माना जाता है। बहुत से लोग गांव-कस्बों से निकलकर इसी तैयारी के भरोसे बड़े शहरों में पढ़ाई/कोचिंग करते हैं। अगर उम्र सीमा की वजह से आवेदन ही रुक जाए, तो उनके लिए यह सिर्फ एक भर्ती नहीं, बल्कि पूरे करियर प्लान पर असर डाल देता है।

सोशल मीडिया पर क्यों उठ रही है मांग?

आज के समय में अभ्यर्थियों की बड़ी आवाज सोशल मीडिया बन गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पुरुष वर्ग में नाराज़गी के बाद ऑनलाइन उम्र सीमा बढ़ाने की मांग की जा रही है। उम्मीदवार अपनी बात यह कहकर रख रहे हैं कि भर्ती में बार-बार देरी हुई, इसलिए कई लोग उम्र सीमा से बाहर हो गए। इसी वजह से वे चाहते हैं कि सरकार एक बार “वन टाइम” छूट दे, ताकि नुकसान की भरपाई हो सके।

यह मांग केवल भावनात्मक नहीं है, बल्कि पिछले कुछ वर्षों के अनुभव से भी जुड़ी है—जहां कई भर्तियों में प्रक्रियाएं लंबी चलीं, पेपर/एग्जाम शेड्यूल बदले, या परिणाम में देरी हुई। ऐसे में अभ्यर्थियों को लगता है कि अगर सिस्टम की वजह से देरी हुई है, तो राहत भी सिस्टम को देनी चाहिए।

सरकार के सामने चुनौती क्या है?

सरकार के लिए यहां संतुलन बनाना आसान नहीं होता। एक तरफ युवाओं की मांग है कि उम्र सीमा बढ़े ताकि ज्यादा लोगों को मौका मिले। दूसरी तरफ भर्ती नियम, कैटेगरी, आरक्षण से जुड़े प्रावधान और पहले से तय नीति भी होती है। अगर उम्र सीमा बढ़ती है तो इसका असर आवेदन की संख्या, प्रतिस्पर्धा, और चयन प्रक्रिया पर भी पड़ता है।

लेकिन राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा संवेदनशील है, क्योंकि यूपी में सरकारी नौकरी और भर्ती का मुद्दा हमेशा बड़ा चुनावी और जन-भावना वाला विषय रहा है। इसलिए आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस मांग पर क्या रुख लेती है।

आगे क्या?

फिलहाल मुद्दा पूरी तरह “मांग बनाम नियम” की दिशा में है। अखिलेश यादव ने इसे नए साल के तोहफे की तरह पेश किया है और अभ्यर्थियों का एक वर्ग भी यही चाहता है कि सरकार तुरंत फैसला करे। अब सबकी नजर इस पर रहेगी कि क्या उम्र सीमा में बदलाव/छूट की कोई घोषणा होती है या भर्ती मौजूदा नियमों के हिसाब से आगे बढ़ती है।

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