ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर कस्टम विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 5 करोड़ रुपये कीमत की हाइड्रोपोनिक गांजा (Hydroponic Cannabis) की खेप बरामद की है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि तस्करों ने इस नशीले पदार्थ को गीजर के अंदर बेहद शातिर तरीके से छिपाकर भारत लाने की कोशिश की थी। कस्टम अधिकारियों ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है और आगे की जांच जारी है। यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्कर नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, सतर्क जांच और आधुनिक स्कैनिंग तकनीक की मदद से उनकी यह कोशिश नाकाम हो गई।
कैसे हुआ पूरे मामले का खुलासा?
कस्टम विभाग को कुछ संदिग्ध सामान की जानकारी मिली थी। इसके बाद अधिकारियों ने एयरपोर्ट पर पहुंचे एक कंसाइनमेंट की गहन जांच शुरू की। जांच के दौरान कुछ गीजर संदिग्ध पाए गए। जब अधिकारियों ने गीजरों को खोलकर देखा तो उनके अंदर बड़ी मात्रा में हाइड्रोपोनिक गांजा छिपाया गया था। बरामद किए गए नशीले पदार्थ की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लगभग 5 करोड़ रुपये आंकी गई है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि तस्करों ने ड्रग्स को इस तरह पैक किया था कि सामान्य जांच में उसकी पहचान करना मुश्किल हो जाए।
क्या होता है हाइड्रोपोनिक गांजा?
हाइड्रोपोनिक गांजा एक विशेष तकनीक से उगाया जाने वाला कैनाबिस होता है। इसमें पौधों को मिट्टी के बजाय पोषक तत्वों से भरपूर पानी में उगाया जाता है।विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह उगाए गए गांजे में नशीले तत्वों की मात्रा सामान्य गांजे की तुलना में अधिक हो सकती है। इसी कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी कीमत भी काफी ज्यादा होती है। हाल के वर्षों में कई देशों में इस प्रकार के नशीले पदार्थों की तस्करी के मामले बढ़े हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता भी बढ़ी है।
दो आरोपी गिरफ्तार
कस्टम विभाग ने इस मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों का मानना है कि यह मामला किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय ड्रग नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ की जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रग्स की यह खेप कहां से आई थी और इसे भारत में किसे पहुंचाया जाना था। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
ड्रग तस्करी के नए तरीके बने चुनौती
पिछले कुछ वर्षों में ड्रग तस्कर इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, मशीनों, घरेलू सामान और अन्य वस्तुओं के अंदर नशीले पदार्थ छिपाकर तस्करी करने की कोशिश कर रहे हैं। एयरपोर्ट और बंदरगाहों पर तैनात सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। हालांकि, एक्स-रे स्कैनर, इंटेलिजेंस इनपुट और विशेष जांच तकनीकों की मदद से कई मामलों का खुलासा किया जा रहा है।
युवाओं के लिए बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि नशीले पदार्थों की तस्करी केवल कानून व्यवस्था का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह समाज और खासकर युवाओं के लिए गंभीर खतरा है।ड्रग्स की लत से युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है और इसके सामाजिक व आर्थिक दुष्परिणाम भी सामने आते हैं। इसलिए ऐसी तस्करी पर रोक लगाने के लिए सुरक्षा एजेंसियां लगातार अभियान चला रही हैं।
जांच जारी
फिलहाल कस्टम विभाग और अन्य जांच एजेंसियां पूरे मामले की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि ड्रग्स की इस खेप के पीछे मौजूद पूरे नेटवर्क का पता लगाने की कोशिश की जा रही है। दिल्ली एयरपोर्ट पर हुई यह कार्रवाई देश में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रहे अभियान की एक बड़ी सफलता मानी जा रही है
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