ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली में साफ और बेहतर सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सरकार इलेक्ट्रिक बसों की संख्या लगातार बढ़ा रही है। इसी सिलसिले में मंगलवार को दिल्ली के परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने परिवहन विभाग और Delhi Transport Corporation (DTC) के कामकाज की समीक्षा बैठक की। इस बैठक में इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और नए बस टर्मिनल जैसे कई अहम प्रोजेक्ट्स पर विस्तार से चर्चा की गई।
दिल्ली में 4000 से ज्यादा इलेक्ट्रिक बसें
अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि फिलहाल दिल्ली की सड़कों पर 4000 से अधिक इलेक्ट्रिक बसें चल रही हैं। इसी महीने 200 नई इलेक्ट्रिक बसें और शुरू की जाएंगी। सरकार का लक्ष्य है कि साल 2026 के अंत तक दिल्ली में करीब 7500 इलेक्ट्रिक बसें संचालित हो जाएं। इससे राजधानी में प्रदूषण कम करने और लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा देने में मदद मिलेगी।
कम प्रदूषण और आरामदायक यात्रा
परिवहन मंत्री पंकज कुमार सिंह ने कहा कि रेखा गुप्ता के नेतृत्व में सरकार पर्यावरण के अनुकूल परिवहन को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक बसों के इस्तेमाल से शहर में प्रदूषण कम होगा और यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा। ई-बसें पारंपरिक डीजल बसों की तुलना में ज्यादा शांत, सुरक्षित और पर्यावरण के लिए बेहतर मानी जाती हैं।
चार्जिंग नेटवर्क का तेजी से विस्तार
बैठक में बताया गया कि दिल्ली के 44 बस डिपो में पहले से ही इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग की सुविधा तैयार की जा चुकी है। इसके अलावा केंद्र सरकार की PM e-Drive Scheme के फेज-1 और फेज-2 के तहत 36 और डिपो में चार्जिंग नेटवर्क विकसित किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों को आसानी से संचालित किया जा सकेगा।
भलस्वा में बनेगा नया ISBT
सरकार राजधानी के उत्तरी हिस्से में यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए भलस्वा इलाके में नया इंटरस्टेट बस टर्मिनल (ISBT) बनाने की योजना पर भी काम कर रही है। यह टर्मिनल करीब 20 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा। खास बात यह है कि यह जमीन भलस्वा लैंडफिल से रिक्लेम की जा रही है। इस परियोजना से न सिर्फ यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी बल्कि आसपास के इलाकों का विकास भी होगा।
नए बस डिपो और अपग्रेडेशन की योजना
इसके अलावा Urban Extension Road-II के पास नया डीटीसी बस डिपो बनाने की संभावना भी देखी जा रही है। तेजी से बढ़ती आबादी और नए विकसित हो रहे इलाकों में बस सेवा मजबूत करने के लिए यह कदम जरूरी माना जा रहा है। वहीं बुराड़ी बस डिपो को भी अपग्रेड करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि बढ़ती इलेक्ट्रिक बसों को बेहतर तरीके से संचालित किया जा सके।
वाहनों की फिटनेस जांच होगी आधुनिक
बैठक में यह भी बताया गया कि नंद नगरी और तिहखंड में बने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन (ATS) अप्रैल से आम लोगों के लिए शुरू हो सकते हैं। इन केंद्रों पर वाहनों की फिटनेस जांच आधुनिक मशीनों से की जाएगी, जिससे सड़क सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों का पालन बेहतर तरीके से सुनिश्चित किया जा सकेगा।
प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम
पिछले कुछ वर्षों में दिल्ली में प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर खास जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से डीजल बसों पर निर्भरता कम होगी और राजधानी की हवा को साफ बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही यात्रियों को भी ज्यादा बसें, बेहतर कनेक्टिविटी और आरामदायक सफर का अनुभव मिलेगा।
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