दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: अफसरों का पेट्रोल-डीजल कोटा घटा, हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम
दिल्ली सरकार ने पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अधिकारियों का फ्यूल कोटा घटाया गया है और बुधवार-शनिवार को वर्क फ्रॉम होम लागू किया गया है।
दिल्ली सरकार का बड़ा फैसला: अफसरों का पेट्रोल-डीजल कोटा घटा, हफ्ते में 2 दिन वर्क फ्रॉम होम
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देश की राजधानी दिल्ली में बढ़ते ईंधन खर्च और प्रदूषण को कम करने के लिए दिल्ली सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं। सरकार ने अपने अलग-अलग विभागों में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है, जिसका मुख्य उद्देश्य पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधनों की खपत को कम करना है।


अधिकारियों से मांगी गई ईंधन खपत की रिपोर्ट

दिल्ली सरकार ने सभी विभागों के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे पिछले चार महीनों के दौरान इस्तेमाल किए गए पेट्रोल और डीजल का पूरा रिकॉर्ड जमा करें। सरकार यह जानना चाहती है कि किस विभाग और किस अधिकारी द्वारा कितना ईंधन खर्च किया गया है, ताकि जरूरत के अनुसार नई व्यवस्था लागू की जा सके।


पेट्रोल-डीजल कोटे में 20% कटौती

सरकार ने अधिकारियों को मिलने वाले पेट्रोल और डीजल के मासिक कोटे में भी कटौती कर दी है। जिन अधिकारियों को पहले हर महीने 250 लीटर पेट्रोल या डीजल मिलता था, अब उन्हें केवल 200 लीटर ईंधन मिलेगा। इसी तरह जिन अधिकारियों को पहले 200 लीटर ईंधन मिलता था, उनका कोटा घटाकर 160 लीटर कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे फ्यूल की बर्बादी कम होगी और सरकारी खर्च में भी कमी आएगी।


ऑफिस के पास ही पार्क करनी होगी गाड़ियां

इसके साथ ही सरकार ने अधिकारियों को यह भी आदेश दिया है कि वे अपनी ऑफिशियल गाड़ियों को दफ्तर के आसपास ही पार्क करें। कई बार सरकारी गाड़ियों को मीटिंग पॉइंट या घर से ऑफिस तक लाने में अतिरिक्त पेट्रोल और डीजल खर्च होता है। नई व्यवस्था लागू होने से इस अतिरिक्त खपत को कम करने में मदद मिलेगी।


बुधवार और शनिवार को वर्क फ्रॉम होम

दिल्ली सरकार ने बुधवार और शनिवार को अधिकतर सरकारी दफ्तरों में वर्क फ्रॉम होम लागू करने का फैसला भी लिया है। इन दिनों अधिकारी और कर्मचारी केवल बहुत जरूरी होने पर ही दफ्तर आएंगे। हालांकि हेल्थ विभाग, बिजली विभाग, दिल्ली जल बोर्ड और एमसीडी जैसे जरूरी विभागों को इस नियम से बाहर रखा गया है, ताकि आवश्यक सेवाओं पर कोई असर न पड़े।


‘नो-व्हीकल डे’ की भी तैयारी

सरकार ने अधिकारियों को हफ्ते में एक दिन “नो-व्हीकल डे” मनाने की भी सलाह दी है। इसका मतलब है कि सप्ताह में एक दिन अधिकारी अपनी सरकारी गाड़ी का इस्तेमाल नहीं करेंगे। अधिकारियों को यह फैसला खुद करना होगा कि वे किस दिन ऑफिशियल वाहन का उपयोग नहीं करेंगे। सरकार का मानना है कि अगर सभी अधिकारी एक ही दिन इस पहल को अपनाते हैं, तो इसका असर और ज्यादा दिखाई देगा।


मंडे मेट्रो पहल को बढ़ावा

दिल्ली सरकार पहले ही “मंडे मेट्रो पहल” की शुरुआत कर चुकी है। इस पहल के तहत लोगों को निजी वाहनों की जगह मेट्रो का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। अब इसी तरह सरकारी अधिकारियों को भी सार्वजनिक परिवहन अपनाने और ईंधन बचाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।


नॉन-पीक ऑवर में यात्रा की सलाह

सरकार ने यह भी कहा है कि अगर अधिकारी सरकारी गाड़ी से ऑफिस आते हैं, तो उन्हें कोशिश करनी चाहिए कि वे नॉन-पीक ऑवर में यात्रा करें। ट्रैफिक जाम के दौरान वाहन ज्यादा ईंधन खर्च करते हैं, इसलिए कम ट्रैफिक वाले समय में यात्रा करने से फ्यूल की बचत हो सकती है।


प्रदूषण और खर्च कम करने की कोशिश

विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली सरकार की यह पहल केवल ईंधन बचाने तक सीमित नहीं है। इससे प्रदूषण कम करने, ट्रैफिक घटाने और सरकारी खर्च कम करने में भी मदद मिलेगी। आने वाले समय में अगर इस तरह की पहल बड़े स्तर पर लागू होती है, तो राजधानी में ईंधन की खपत और प्रदूषण दोनों को नियंत्रित किया जा सकता है।

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