ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली में ऑनलाइन पेमेंट का चलन तेजी से बढ़ा है। लोग छोटी से छोटी खरीदारी से लेकर बड़े लेन-देन तक UPI का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन इसी के साथ UPI फ्रॉड के मामले भी बढ़ते जा रहे हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और संबंधित संस्थाओं से जवाब मांगा है।
चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऑनलाइन ठगी के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी चिंता का विषय है। कोर्ट ने वित्त मंत्रालय, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है। साथ ही, UPI फ्रॉड रोकने और पीड़ितों को तुरंत राहत देने के लिए ठोस गाइडलाइंस बनाने की जरूरत पर जोर दिया है।
एक पीड़ित की याचिका से उठा मामला
यह मामला याचिकाकर्ता पंकज निगम की याचिका के जरिए सामने आया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि फरवरी 2024 में ऑनलाइन किराए का फ्लैट खोजते समय उनके साथ 1.24 लाख रुपये की ठगी हो गई। पैसे ट्रांसफर करने के बाद उन्हें पता चला कि वे धोखाधड़ी का शिकार हो गए हैं।
उन्होंने शिकायत भी दर्ज कराई, लेकिन न तो उनका पैसा वापस मिला और न ही आरोपियों की कोई ठोस जानकारी दी गई। याचिकाकर्ता ने कहा कि ऐसे मामलों में आम लोग खुद को पूरी तरह असहाय महसूस करते हैं और सिस्टम से उन्हें तुरंत राहत नहीं मिलती।
फुल KYC अकाउंट की मांग
याचिका में मांग की गई है कि फर्जी अकाउंट के जरिए होने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए सिर्फ फुल KYC (Know Your Customer) वाले बैंक अकाउंट को ही UPI से जोड़ने की अनुमति दी जाए। कई मामलों में देखा गया है कि अधूरी या फर्जी जानकारी के आधार पर बनाए गए अकाउंट से ठगी की जाती है।
अगर केवल पूरी तरह सत्यापित अकाउंट ही UPI से जुड़ेंगे, तो धोखाधड़ी की घटनाओं में कमी आ सकती है।
यूनिफाइड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म की जरूरत
याचिका में एक और महत्वपूर्ण मांग की गई है। इसमें कहा गया है कि एक यूनिफाइड रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म बनाया जाए, जो साइबर क्राइम हेल्पलाइन को UPI ऐप, बैंक, पेमेंट कंपनियों और टेलीकॉम कंपनियों से जोड़े। इससे पीड़ित तुरंत शिकायत दर्ज कर सकेंगे और समय रहते ट्रांजैक्शन को रोका जा सकेगा।
अक्सर देखा जाता है कि शिकायत दर्ज करने में देरी होने से पैसा कई अकाउंट्स में ट्रांसफर हो जाता है और उसे वापस पाना मुश्किल हो जाता है।
ई-जीरो FIR और समान SOP की मांग
याचिका में यह भी मांग की गई है कि 10 लाख रुपये तक के UPI फ्रॉड मामलों को ई-जीरो FIR सिस्टम में शामिल किया जाए। गंभीर मामलों में अपने-आप FIR दर्ज होनी चाहिए, ताकि जांच तुरंत शुरू हो सके।
इसके अलावा, राज्यों के अलग-अलग नियमों के कारण जांच में देरी होती है। इसलिए पूरे देश में एक समान स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) लागू करने की मांग की गई है।
कोर्ट की सख्ती से मिल सकती है राहत
दिल्ली हाई कोर्ट की सख्ती से उम्मीद की जा रही है कि इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाए जाएंगे। अगर सरकार और संबंधित संस्थाएं स्पष्ट गाइडलाइंस और मजबूत सिस्टम लागू करती हैं, तो लाखों डिजिटल यूजर्स को सुरक्षा मिल सकती है।
डिजिटल इंडिया के दौर में सुरक्षित ऑनलाइन लेन-देन बेहद जरूरी है। ऐसे में कोर्ट की पहल आम लोगों के लिए राहत की उम्मीद बनकर सामने आई है।
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