ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली में नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई लगातार जारी है। सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट स्पेशल स्टाफ ने रोहिणी इलाके से 25 दिन के एक नवजात लड़के को सुरक्षित बरामद किया है। पुलिस ने इस मामले में बच्चे को खरीदने के आरोप में ससुर और बहू को गिरफ्तार किया है। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने नवजात को 8 लाख रुपये में खरीदा था। इस कार्रवाई के बाद अब तक इस गिरोह से छुड़ाए गए नवजात बच्चों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है। हालांकि, पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन बच्चों के असली माता-पिता की पहचान करना है।
ससुर और बहू गिरफ्तार
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की पहचान गरिमा जैन और सतीश जैन के रूप में की है। जांच में सामने आया है कि रोहिणी स्थित जैन परिवार की कोई संतान नहीं थी। करीब ढाई सप्ताह पहले उन्होंने गिरोह की एक महिला सदस्य के जरिए इस नवजात बच्चे को खरीदा था। बच्चे को सुरक्षित संरक्षण में लेने के बाद पुलिस ने उसे बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया, जहां उसके पुनर्वास और देखभाल की व्यवस्था की गई है।
राजस्थान से लाकर दिल्ली में बेचा गया बच्चा
प्रारंभिक जांच के अनुसार, इस नवजात बच्चे को राजस्थान के पाली जिले के किसी आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से कथित तौर पर डेढ़ से दो लाख रुपये में लिया गया था। इसके बाद उसे दिल्ली लाकर करीब 8 लाख रुपये में बेच दिया गया। फिलहाल पुलिस को बच्चे के असली माता-पिता के बारे में कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल सकी है।
अब तक 6 बच्चे बरामद, लेकिन पहचान नहीं
जांच अधिकारियों के मुताबिक, अब तक बरामद किए गए सभी छह नवजात बच्चों के असली माता-पिता की पहचान नहीं हो सकी है। पुलिस का कहना है कि गिरोह का मुख्य सरगना 'कालिया' और उसके साथी राजस्थान तथा गुजरात के दूर-दराज और आर्थिक रूप से कमजोर इलाकों से बच्चों को लाते थे। इन इलाकों में सही जानकारी और स्थानीय संपर्कों तक पहुंचना जांच एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कई राज्यों तक फैला था नेटवर्क
करीब एक सप्ताह पहले दिल्ली पुलिस ने एक बड़े ऑपरेशन के दौरान बेगमपुर स्थित हीराज मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल की संचालिका डॉक्टर विवेकी समेत गिरोह के 13 सदस्यों को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया कि इस गिरोह में दलाल, एजेंट और नवजात बच्चों की खरीद-फरोख्त करने वाले कई लोग शामिल थे। पुलिस के अनुसार, इस रैकेट का नेटवर्क दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात तक फैला हुआ है।
लड़कों की ज्यादा थी मांग
पूछताछ में यह भी सामने आया है कि गिरोह लड़कों की ज्यादा मांग होने के कारण अधिकतर नवजात लड़कों की तस्करी करता था। हालांकि, जरूरत पड़ने पर लड़कियों की भी अवैध खरीद-फरोख्त की जाती थी। इससे पहले बरामद किए गए पांच बच्चों में चार लड़के और एक लड़की शामिल थे। अब छठे बच्चे की बरामदगी के बाद पुलिस अन्य राज्यों में भी लगातार छापेमारी कर रही है।
जांच जारी, अन्य आरोपियों की तलाश
दिल्ली पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क के जरिए और कितने नवजात बच्चों की तस्करी की गई। पुलिस का उद्देश्य बच्चों को सुरक्षित बरामद कर उनके वास्तविक परिवारों तक पहुंचाना और पूरे रैकेट का पर्दाफाश करना है।
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