ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली में रेहड़ी-पटरी लगाकर रोजी-रोटी कमाने वाले लाखों लोगों को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने बीजेपी सरकार और दिल्ली नगर निगम पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सफाई और अतिक्रमण हटाने के नाम पर गरीब रेहड़ी-पटरी वालों को उजाड़ने की तैयारी की जा रही है। देवेंद्र यादव का कहना है कि कांग्रेस सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों को कानूनी अधिकार देने के लिए स्ट्रीट वेंडर्स एक्ट लागू किया था, लेकिन पिछले कई वर्षों में उन्हें स्थायी लाइसेंस तक नहीं मिल सके।
कांग्रेस ने याद दिलाया 2014 का कानून
देवेंद्र यादव ने कहा कि कांग्रेस की केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 में “स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका संरक्षण एवं स्ट्रीट वेंडिंग विनियमन) अधिनियम” लागू किया था। इस कानून का उद्देश्य रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लोगों को कानूनी सुरक्षा देना और उनकी आजीविका को सुरक्षित करना था। उन्होंने कहा कि कानून के तहत राज्यों और नगर निकायों को स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए थे, लेकिन दिल्ली में आज तक लाखों स्ट्रीट वेंडर्स को नियमित लाइसेंस नहीं दिया गया।
अवैध वसूली के लगाए आरोप
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि दिल्ली नगर निगम, पुलिस और अन्य एजेंसियां लंबे समय से रेहड़ी लगाने वालों से अवैध वसूली करती रही हैं। अब सफाई अभियान और जुर्माने के जरिए इन गरीब लोगों की रोजी-रोटी छीनने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि छोटे दुकानदार और रेहड़ी-पटरी वाले पहले से महंगाई और आर्थिक दबाव से जूझ रहे हैं। ऐसे में कार्रवाई के नाम पर उन्हें और परेशान किया जा रहा है।
हाई कोर्ट के आदेश का हवाला
देवेंद्र यादव ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि जिन रेहड़ी-पटरी वालों का सर्वे हो चुका है और जिनके पास प्रोविजनल सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग है, उन्हें वैध विक्रेता माना जाएगा। उन्होंने बताया कि टाउन वेंडिंग कमेटी का चुनाव 30 जून 2026 को होना है और 21 जुलाई 2026 को कमेटी के गठन की प्रक्रिया पूरी होगी। इसके बाद ही अंतिम लाइसेंस जारी किए जाएंगे और वेंडिंग जोन तय होंगे। इसके बावजूद नगर निगम की कार्रवाई जारी है, जिस पर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
गरीबों पर दबाव बढ़ाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि बीजेपी सरकार लगातार गरीब, पिछड़े और मध्यम वर्ग के लोगों पर दबाव बना रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले परिवार, यमुना किनारे बसे लोग और जेजे क्लस्टर के निवासी पहले ही असुरक्षा के माहौल में जी रहे हैं। अब रेहड़ी-पटरी वालों पर कार्रवाई कर उनकी आजीविका पर भी संकट खड़ा किया जा रहा है।
“वेंडिंग जोन तय हुए बिना कार्रवाई गलत”
देवेंद्र यादव ने कहा कि अदालत ने साफ कहा है कि जब तक टाउन वेंडिंग कमेटी अंतिम फैसला नहीं लेती, तब तक किसी भी स्ट्रीट वेंडर को हटाया नहीं जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि जब अभी अंतिम लाइसेंस जारी नहीं हुए और वेंडिंग जोन भी तय नहीं किए गए, तो फिर रेहड़ी-पटरी वालों के खिलाफ कार्रवाई क्यों की जा रही है।
आम लोगों पर भी पड़ सकता है असर
उन्होंने कहा कि यही छोटे विक्रेता लोगों को घरों के पास सस्ती दरों पर फल, सब्जियां और जरूरी सामान उपलब्ध कराते हैं। अगर इन्हें हटाया गया तो आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। महंगे पेट्रोल, डीजल और सीएनजी के दौर में बाजार तक पहुंचना पहले ही महंगा हो चुका है। ऐसे में रेहड़ी-पटरी वालों का हटना आम जनता पर भी असर डाल सकता है।
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