ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दिल्ली के जनकपुरी स्थित एक निजी स्कूल में तीन वर्षीय बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने 57 वर्षीय आरोपी केयरटेकर की जमानत रद्द करते हुए उसे 1 जुलाई दोपहर 2 बजे तक संबंधित POCSO कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट का यह फैसला दिल्ली पुलिस और पीड़िता की मां द्वारा ट्रायल कोर्ट के जमानत आदेश को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर आया है।
हाईकोर्ट ने क्यों रद्द की जमानत?
जस्टिस विनोद कुमार की अवकाशकालीन पीठ ने कहा कि वह दिल्ली पुलिस और शिकायतकर्ता की दलीलों से सहमत है। अदालत ने दोनों याचिकाएं स्वीकार करते हुए आरोपी को निर्धारित समय पर सरेंडर करने का आदेश दिया। इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने 7 मई को आरोपी को जमानत दे दी थी, जिसके खिलाफ दिल्ली पुलिस और पीड़ित पक्ष ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
पुलिस ने क्या दलील दी?
सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को बताया कि यह मामला POCSO Act की धारा 6 के तहत गंभीर यौन उत्पीड़न का है, जिसमें दोष सिद्ध होने पर कम से कम 20 वर्ष की सजा का प्रावधान है। उन्होंने यह भी कहा कि बच्ची ने आरोपी की पहचान की है और उसके खिलाफ स्पष्ट आरोप लगाए हैं। इसलिए ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत दिया जाना उचित नहीं था। वहीं, आरोपी के वकील ने सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मामले के मूल तथ्यों की अभी न्यायिक जांच होना बाकी है।
आम आदमी पार्टी ने फैसले का किया स्वागत
दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने इसका स्वागत किया। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले को दबाने की कोशिश की गई थी, लेकिन पीड़ित बच्ची की मां के संघर्ष और कानूनी लड़ाई के कारण न्याय मिला। उन्होंने यह भी दावा किया कि आरोपी को गिरफ्तारी के कुछ ही दिनों बाद जमानत मिलना कई सवाल खड़े करता है। सौरभ भारद्वाज ने यह भी कहा कि मामले की शुरुआती जांच के दौरान पुलिस अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे और बाद में संबंधित SHO तथा DCP का तबादला कर दिया गया था।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला 1 मई को सामने आया, जब बच्ची की मां ने जनकपुरी थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के अनुसार, बच्ची स्कूल में दाखिले के दूसरे दिन घर लौटी तो उसने दर्द की शिकायत की। पूछने पर उसने कथित तौर पर बताया कि स्कूल परिसर में एक सुनसान स्थान पर उसके साथ यौन उत्पीड़न किया गया।शिकायत के आधार पर दिल्ली पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(1) और POCSO Act की धारा 6 के तहत मामला दर्ज किया।
पहले भी गिरफ्तार हो चुका था आरोपी
पुलिस ने बताया कि बच्ची द्वारा पहचान किए जाने के बाद आरोपी केयरटेकर को 1 मई को गिरफ्तार किया गया था। बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। हालांकि, 7 मई को ट्रायल कोर्ट ने आरोपी को जमानत दे दी थी। अब दिल्ली हाईकोर्ट ने उस आदेश को रद्द करते हुए आरोपी को दोबारा सरेंडर करने का निर्देश दिया है। मामले की जांच अभी जारी है। इसके अलावा, स्कूल की एक शिक्षिका को भी घटना की जानकारी छिपाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मामले में अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!