ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
भारतीय संगीत की दुनिया के लिए यह बेहद भावुक दिन है, क्योंकि दिग्गज गायिका आशा भोसले अब हमारे बीच नहीं रहीं।
92 साल की उम्र में उनका मुंबई में निधन हुआ और उनके
जाने से संगीत जगत में गहरा सन्नाटा छा गया।
रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने 12 अप्रैल को ब्रीच कैंडी अस्पताल में अंतिम सांस ली।
बताया गया कि वह चेस्ट इंफेक्शन और
बहुत ज्यादा कमजोरी से जूझ रही थीं, और डॉक्टरों ने मौत की वजह कई अंगों के फेल होने को बताया।
उनके निधन की खबर आते ही देशभर में शोक की लहर दौड़ गई और फिल्म व
संगीत जगत की कई बड़ी हस्तियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
सोशल मीडिया से लेकर घर-घर तक, लोगों ने उन्हें सिर्फ एक सिंगर नहीं, बल्कि अपनी यादों की आवाज के रूप में याद किया।
घर पर अंतिम दर्शन की व्यवस्था
परिवार की ओर से साझा की गई जानकारी
के मुताबिक, उनके
पार्थिव शरीर को लोअर परेल स्थित उनके आवास कासा ग्रांडे में अंतिम दर्शन के लिए
रखा गया।
यह व्यवस्था सुबह लगभग 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक रखी गई ताकि फैंस, शुभचिंतक और संगीत जगत के लोग उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि दे सकें।
यह सिर्फ एक औपचारिक व्यवस्था नहीं थी, बल्कि उस कलाकार को आखिरी सलाम था जिसकी आवाज कई पीढ़ियों के साथ चली।
जब कोई ऐसा चेहरा जाता है जिसकी आवाज
घरों, रेडियो, फिल्मों और यादों में बसी हो, तो अंतिम दर्शन का पल भी आम नहीं
रहता।
ऐसे मौकों पर लोग सिर्फ शोक मनाने नहीं आते, वे अपनी जिंदगी के कई पुराने पलों को फिर से जीते हैं।
आशा भोसले के साथ भी कुछ ऐसा ही भावनात्मक रिश्ता लोगों का हमेशा रहा
है।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार
रिपोर्ट के मुताबिक, उनका अंतिम संस्कार 13 अप्रैल को शाम 4 बजे मुंबई के शिवाजी पार्क श्मशान घाट
में तय किया गया।
उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जानी थी, जो उनके योगदान की सार्वजनिक स्वीकृति
भी मानी जा रही है।
कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
जानकारी में यह भी कहा गया कि अंतिम
यात्रा और अंतिम संस्कार में राजनीतिक नेताओं से लेकर फिल्म जगत की बड़ी हस्तियों
के शामिल होने की उम्मीद थी।
यह अपने आप में बताता है कि उनका असर सिर्फ संगीत तक सीमित नहीं था, बल्कि संस्कृति और सार्वजनिक जीवन पर
भी गहरा था।
बहुत कम कलाकार ऐसे होते हैं जिन्हें आम श्रोता, कलाकार, नेता और परिवार जैसा प्यार एक साथ मिलता है।
लोगों के दिलों में क्यों थीं इतनी खास
आशा भोसले का नाम आते ही लोगों के
सामने सिर्फ एक गायिका की छवि नहीं आती, बल्कि कई रंगों वाली एक पूरी आवाज सामने आती है।
उनकी गायकी में शरारत भी थी, दर्द भी था, रोमांस भी था और जीवन का उत्साह भी।
यही वजह है कि उन्हें सुनने वाले लोग अलग-अलग दौर के होने के बावजूद
उनसे जुड़ाव महसूस करते रहे।
उनके जाने के बाद जो शोक देशभर में
दिखा, वह
इसी गहरे रिश्ते का संकेत है।
फैंस और सेलेब्स ने सोशल मीडिया पर भावभीनी श्रद्धांजलि देकर उन्हें
याद किया।
यह श्रद्धांजलि सिर्फ एक मशहूर नाम के लिए नहीं थी, बल्कि उस आवाज के लिए थी जो कई लोगों
की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी थी।
अंतिम विदाई से आगे की याद
किसी कलाकार का शरीर एक दिन विदा हो
जाता है, लेकिन
उसकी आवाज अक्सर लोगों के भीतर बहुत लंबे समय तक जिंदा रहती है।
आशा भोसले के मामले में यह बात और भी गहराई से सच लगती है, क्योंकि उनका काम कई पीढ़ियों के बीच
फैला हुआ है।
उनकी अंतिम विदाई का यह दिन इसलिए दुख भरा जरूर है, लेकिन यह उनके असाधारण सफर को याद
करने का दिन भी है।
आज मुंबई में होने वाला उनका अंतिम
संस्कार सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि भारतीय संगीत को झुककर किया गया प्रणाम है।
उनके जाने से एक खालीपन जरूर बना है, लेकिन उनकी आवाज आने वाले लंबे समय तक उस खालीपन को भरती रहेगी।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!