ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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कुछ वेब सीरीज ऐसी होती हैं जिन्हें हम सिर्फ देखते नहीं, बल्कि जीते हैं। 'गुल्लक' उन्हीं में से एक है। पिछले चार सीजन में मिश्रा परिवार दर्शकों के घर का हिस्सा बन चुका है। यही वजह है कि अब इस सीरीज को लेकर सवाल यह नहीं होता कि यह अच्छी है या बुरी, बल्कि यह होता है कि इस बार मिश्रा परिवार की जिंदगी में नया क्या हुआ है। 'गुल्लक 5' इसी उम्मीद के साथ लौटती है और एक बार फिर मिडिल क्लास परिवार की छोटी-छोटी खुशियों, परेशानियों और रिश्तों की कहानी सुनाती है।
कहानी आगे बढ़ती है, किरदार भी बदलते हैं
इस बार मिश्रा परिवार की दुनिया पहले से काफी बदल चुकी है। घर में वाई-फाई आ चुका है, बच्चे बड़े हो रहे हैं और परिवार के हर सदस्य की अपनी अलग चिंताएं हैं। संतोष मिश्रा नए घर और घर की मरम्मत के सपने देख रहे हैं। अमन मिश्रा अपनी ही दुनिया में कुछ नया करने की कोशिश में लगे हैं। वहीं अन्नू मिश्रा भी अपने जीवन के नए मोड़ पर खड़े नजर आते हैं। सबसे मजेदार बदलाव बिट्टू की मम्मी के किरदार में दिखाई देता है, जो अब व्लॉगर बन चुकी हैं और हर छोटी-बड़ी घटना को मोबाइल कैमरे में कैद करने को तैयार रहती हैं।
नए अन्नू भैया ने बढ़ाई उत्सुकता
सीजन 5 की सबसे बड़ी चर्चा अन्नू मिश्रा के किरदार को लेकर रही। इस बार वैभव राज गुप्ता की जगह अनंत जोशी ने यह भूमिका निभाई है। शुरुआत में दर्शकों को यह बदलाव थोड़ा अजीब लग सकता है, क्योंकि वैभव राज गुप्ता ने इस किरदार के साथ गहरा भावनात्मक रिश्ता बना लिया था। लेकिन अनंत जोशी धीरे-धीरे इस किरदार में पूरी तरह ढल जाते हैं। दो-तीन एपिसोड के बाद वह दर्शकों को यह महसूस नहीं होने देते कि अन्नू भैया बदल गए हैं। यह उनकी सबसे बड़ी सफलता कही जा सकती है।
भावनाएं हैं, लेकिन पहले जैसी गहराई नहीं
'गुल्लक 5' की सबसे बड़ी ताकत हमेशा की तरह इसकी सादगी है। यह सीरीज किसी बड़े ड्रामे या सनसनी पर नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी की छोटी-छोटी बातों पर टिकी है। हालांकि इस बार कहानी में भावनाएं तो हैं, लेकिन पहले के सीजन जैसी गहरी गर्माहट कुछ कम महसूस होती है। कई जगह ऐसा लगता है कि कहानी दिल को छूती तो है, लेकिन उतनी गहराई तक नहीं पहुंच पाती जितनी पहले पहुंचती थी। फिर भी सीरीज अपनी ईमानदारी और अपनापन बनाए रखती है।
अभिनय हमेशा की तरह शानदार
अभिनय के मामले में 'गुल्लक 5' निराश नहीं करती। जमील खान एक बार फिर संतोष मिश्रा के किरदार में शानदार हैं। गीतांजलि कुलकर्णी का अभिनय हमेशा की तरह सहज और प्रभावी है। हर्ष मयार, सुनीता राजवर और हैली शाह भी अपने-अपने किरदारों में अच्छा काम करते हैं। वहीं अनंत जोशी नए अन्नू भैया के रूप में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन करते हैं।
लेखन और निर्देशन में थोड़ी कमी
सीरीज की लेखनी अच्छी है, लेकिन कुछ जगहों पर और धारदार हो सकती थी। 'गुल्लक' की पहचान उसके ऐसे संवाद रहे हैं जो सीधे दिल में उतर जाते हैं। इस बार भी कुछ अच्छे संवाद हैं, लेकिन पुराने सीजन की तरह याद रह जाने वाले संवादों की संख्या कम दिखाई देती है। निर्देशन सधा हुआ है और सीरीज अपनी स्थापित शैली से भटकती नहीं है। यही वजह है कि पूरी कहानी सहज रूप से आगे बढ़ती रहती है।
देखें या नहीं?
अगर आप 'गुल्लक' के पुराने दर्शक हैं तो यह सीरीज मिस करने का सवाल ही नहीं उठता। मिश्रा परिवार से मिलने की आदत पड़ चुकी है और यह सीजन भी आपको उनसे जोड़कर रखता है। भले ही यह सीजन पिछले कुछ सीजन जितना शानदार न लगे, लेकिन यह अच्छी जरूर है। यह आपको हंसाती है, भावुक करती है और मिडिल क्लास जिंदगी की खूबसूरती फिर से याद दिलाती है।
रेटिंग: ⭐⭐⭐ (3/5)
फैसला: 'गुल्लक 5' अपने पुराने जादू को पूरी तरह दोहराने में भले सफल न हो, लेकिन मिश्रा परिवार का अपनापन और सादगी इसे एक बार फिर देखने लायक बनाती है।
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