ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को लेकर एक अहम प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने कई बड़े और चौंकाने वाले दावे किए। ट्रम्प ने साफ कहा कि अगर अमेरिका चाहे तो वह “एक ही रात में ईरान को खत्म कर सकता है”। उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरत पड़ी तो यह कार्रवाई कभी भी की जा सकती है। उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच तनाव चरम पर पहुंच चुका है और हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं।
‘ऐतिहासिक’ बताया रेस्क्यू ऑपरेशन
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रम्प ने ईरान में फंसे अमेरिकी पायलट को बचाने के लिए चलाए गए रेस्क्यू ऑपरेशन को “ऐतिहासिक” करार दिया। उन्होंने बताया कि इस मिशन में अमेरिकी सेना ने असाधारण साहस और रणनीति का प्रदर्शन किया।
ट्रम्प के अनुसार, इस ऑपरेशन में 155 सैन्य विमानों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें फाइटर जेट, बॉम्बर, टैंकर और रेस्क्यू प्लेन शामिल थे। यह मिशन कई घंटों तक चला और बेहद जोखिम भरा था।
जान जोखिम में डालकर बचाए गए पायलट
ट्रम्प ने कहा कि सिर्फ 1-2 पायलटों को बचाने के लिए सैकड़ों सैनिकों की जान दांव पर लगाई गई। उन्होंने स्वीकार किया कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने अपने सैनिकों को हर हाल में सुरक्षित वापस लाने का आदेश दिया।
उन्होंने एक घायल पायलट की बहादुरी का जिक्र करते हुए बताया कि वह गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद पहाड़ी इलाके में चढ़ता रहा, ताकि दुश्मनों से बच सके। उसने खुद ही अपने घावों का इलाज किया और सेना से संपर्क बनाए रखा, जिसके बाद उसे सुरक्षित बाहर निकाला गया।
F-15 विमान गिराए जाने की पुष्टि
ट्रम्प ने यह भी माना कि ईरान ने एक अमेरिकी F-15 फाइटर जेट को मार गिराया था। हालांकि उन्होंने इसे “लकी हिट” बताया और कहा कि यह दुश्मन की किस्मत थी, न कि उसकी ताकत। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद दो बड़े रेस्क्यू मिशन चलाए गए, जिनमें कुल 176 से अधिक विमान शामिल हुए और सभी ऑपरेशन बेहद सावधानी से किए गए।
13,000 ठिकानों पर हमले, 10,000 उड़ानें
अमेरिकी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पिछले 37 दिनों में अमेरिका ने ईरान के 13,000 से ज्यादा ठिकानों पर हमला किया है और 10,000 से ज्यादा लड़ाकू उड़ानें भरी हैं। यह आंकड़े इस बात को दर्शाते हैं कि अमेरिका इस युद्ध में पूरी ताकत के साथ उतरा हुआ है और लगातार अपने सैन्य अभियान को आगे बढ़ा रहा है।
लीक करने वालों को दी चेतावनी
ट्रम्प ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में उस व्यक्ति को भी चेतावनी दी, जिसने मीडिया में यह खबर लीक की थी कि ईरान में एक और अमेरिकी पायलट फंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि इस तरह की जानकारी से राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा होता है। उन्होंने साफ कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो मीडिया कंपनियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी और जानकारी देने से इनकार करने पर जेल भेजा जा सकता है।
रणनीति में धोखे का इस्तेमाल
ट्रम्प ने बताया कि इस ऑपरेशन में “डिकॉय” यानी भ्रम पैदा करने वाली रणनीति का इस्तेमाल किया गया। कई विमानों को अलग-अलग दिशाओं में भेजा गया ताकि दुश्मन को भ्रमित किया जा सके। उन्होंने कहा कि सात अलग-अलग स्थानों पर ऐसी स्थिति बनाई गई, जिससे दुश्मन को लगा कि अमेरिकी सेना कई जगहों पर अपने सैनिकों की तलाश कर रही है।
सलाहकारों में मतभेद
ट्रम्प ने यह भी खुलासा किया कि इस मिशन को लेकर उनके सैन्य सलाहकारों में एकराय नहीं थी। कुछ अधिकारियों का मानना था कि यह मिशन बहुत जोखिम भरा है और इसमें सैकड़ों लोगों की जान जा सकती है। हालांकि रक्षा मंत्री और शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने इस ऑपरेशन का समर्थन किया, जिसके बाद ट्रम्प ने इसे मंजूरी दी।
ईरान को अल्टीमेटम और होर्मुज संकट
ट्रम्प ने ईरान को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए अल्टीमेटम भी दिया। उन्होंने बताया कि इसके लिए एक समय सीमा तय की गई है और अगर ईरान ने इस पर अमल नहीं किया तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने समय सीमा को थोड़ा बढ़ाया, क्योंकि वह ईस्टर के बाद सख्त कार्रवाई नहीं करना चाहते थे।
आम नागरिकों पर हमलों को लेकर विवाद
जब ट्रम्प से पूछा गया कि ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा ठिकानों पर हमले से आम नागरिकों को नुकसान हो रहा है, तो उन्होंने कहा कि अगर इससे ईरान के लोगों को “आजादी” मिलती है, तो वे यह दर्द सहने को तैयार होंगे। उन्होंने दावा किया कि उन्हें ऐसे संदेश मिल रहे हैं, जिनमें ईरान के लोग खुद अमेरिकी हमलों का समर्थन कर रहे हैं।
डोनाल्ड ट्रम्प के इस बयान ने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। एक तरफ अमेरिका अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ ईरान भी पीछे हटने को तैयार नहीं है। इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ है कि मध्य पूर्व में तनाव अभी और बढ़ सकता है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद अहम होगा कि यह संघर्ष शांत होता है या एक बड़े युद्ध का रूप लेता है
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