ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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मिडिल ईस्ट में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी देते हुए होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए डेडलाइन तय कर दी है। इस घटनाक्रम से न केवल क्षेत्र में युद्ध का खतरा बढ़ गया है, बल्कि भारत समेत कई देशों की चिंता भी गहरा गई है।
ट्रंप का अल्टीमेटम और धमकी
डोनाल्ड ट्रंप ने ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ को दिए इंटरव्यू में कहा कि ईरान के पास मंगलवार शाम तक का समय है। अगर वह होर्मुज स्ट्रेट नहीं खोलता है, तो अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और पुलों को निशाना बनाएगा। उन्होंने सोशल मीडिया पर भी इस बारे में पोस्ट कर साफ संकेत दिए कि हमला कब हो सकता है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह आखिरी समय तक बातचीत के जरिए समाधान चाहते हैं।
ईरान की शर्त ने बढ़ाया तनाव
ट्रंप की धमकी के जवाब में ईरान ने भी सख्त रुख अपनाया है। ईरानी अधिकारी मेहदी तबातबाई ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट तभी खोला जाएगा, जब ट्रांजिट टोल का एक हिस्सा युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस शर्त ने दोनों देशों के बीच टकराव को और गहरा कर दिया है।
ईरान की चेतावनी: ‘पूरा इलाका जल उठेगा’
ईरानी संसद के स्पीकर गालिबाफ ने अमेरिका को कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका ने कोई लापरवाह कदम उठाया, तो पूरा क्षेत्र युद्ध की आग में झुलस सकता है। उनका कहना है कि इस तरह के कदम न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे मिडिल ईस्ट को अस्थिर कर सकते हैं।
भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
इस तनाव का असर भारत पर भी पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल और गैस गुजरती है। अगर यह रास्ता बंद रहता है, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। फिलहाल तेल का संकट नहीं दिख रहा है, लेकिन LPG की सप्लाई पर असर पड़ने की आशंका है।
LPG और उर्वरक पर असर
भारत सरकार पहले से ही स्थिति को देखते हुए तैयारी कर रही है। LPG ग्राहकों को PNG में शिफ्ट करने की योजना पर तेजी से काम हो रहा है और लाखों लोग पहले ही शिफ्ट हो चुके हैं। इसके अलावा मिडिल ईस्ट से आने वाली यूरिया और DAP की सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है, जिससे कृषि क्षेत्र में संकट बढ़ सकता है।
ट्रंप और ईरान के बीच बढ़ता टकराव वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बन गया है। अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो इसका असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और भारत जैसे देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर भी पड़ेगा।
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