ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच संघर्ष के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि रूस, ईरान को अमेरिका के खिलाफ हमलों में खुफिया जानकारी देकर मदद कर रहा है। जेलेंस्की के इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
खुफिया जानकारी साझा करने का दावा
जेलेंस्की ने कहा कि उन्हें “100 प्रतिशत यकीन” है कि रूस ने ईरान के साथ संवेदनशील जानकारी साझा की। उनके मुताबिक, रूसी सैटेलाइट्स ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस की कई बार तस्वीरें ली थीं।
Prince Sultan Air Base पर 26 मार्च को ईरान ने हमला किया था, जिसमें कई अमेरिकी सैनिक घायल हुए थे। जेलेंस्की का कहना है कि 20, 23 और 25 मार्च को इस बेस की तस्वीरें ली गईं और इसके अगले ही दिन हमला हुआ, जो एक सोची-समझी रणनीति का संकेत देता है।
हमले का पैटर्न बताया
यूक्रेनी राष्ट्रपति ने हमले के पीछे एक खास पैटर्न की बात भी कही। उनके अनुसार:
• पहली बार तस्वीर लेना – तैयारी का संकेत
• दूसरी बार – सिमुलेशन या योजना बनाना
• तीसरी बार – जल्द हमले की तैयारी
उन्होंने कहा कि यह कोई सामान्य गतिविधि नहीं है, बल्कि एक सुनियोजित प्रक्रिया है।
सबूतों की कमी पर सवाल
हालांकि जेलेंस्की ने गंभीर आरोप लगाए हैं, लेकिन अभी तक उनके समर्थन में कोई ठोस सबूत सामने नहीं आया है। यूक्रेन ने सैटेलाइट तस्वीरों को सार्वजनिक नहीं किया है। इस वजह से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इन दावों को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं।
रूस का जवाब
रूस ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने साफ कहा कि मॉस्को ईरान के साथ खुफिया जानकारी साझा नहीं कर रहा है। हालांकि उन्होंने यह जरूर माना कि रूस और ईरान के बीच सैन्य सहयोग मौजूद है, लेकिन इसे सामान्य साझेदारी बताया।
बढ़ता वैश्विक तनाव
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच पिछले एक महीने से ज्यादा समय से चल रही लड़ाई पहले ही वैश्विक चिंता का कारण बनी हुई है। अब अगर इसमें रूस की भूमिका की बात सामने आती है, तो यह संघर्ष और भी जटिल हो सकता है। इससे दुनिया के कई देशों पर राजनीतिक और आर्थिक असर पड़ सकता है।
क्या हो सकते हैं आगे के असर?
अगर रूस-ईरान सहयोग के दावे सही साबित होते हैं, तो यह एक बड़े अंतरराष्ट्रीय टकराव का रूप ले सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल मिडिल ईस्ट, बल्कि यूरोप और एशिया की स्थिरता पर भी असर पड़ेगा।
जेलेंस्की का यह दावा एक गंभीर मुद्दा है, लेकिन जब तक इसके पुख्ता सबूत सामने नहीं आते, तब तक इसे पूरी तरह सच मानना मुश्किल है। फिलहाल इतना जरूर है कि इस बयान ने पहले से जारी युद्ध में एक नया मोड़ ला दिया है और दुनिया की नजर अब इस मामले पर टिकी हुई है।
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