ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिकी सेना ने ईरान के प्रमुख शहर इस्फ़हान में स्थित एक बड़े गोला-बारूद डिपो को निशाना बनाया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस हमले में 2,000 पाउंड के बंकर-भेदी (bunker-buster) बमों का इस्तेमाल किया गया, जिससे भारी तबाही हुई है। इस्फ़हान, जो ईरान का एक रणनीतिक और औद्योगिक शहर माना जाता है, वहां इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शक्तिशाली बमों का इस्तेमाल
सूत्रों के अनुसार, इस ऑपरेशन में बड़ी संख्या में हाई-इम्पैक्ट पेनिट्रेटर मुनिशन का प्रयोग किया गया। इसका उद्देश्य भूमिगत और मजबूत सैन्य ठिकानों को पूरी तरह नष्ट करना था। हमले के बाद कई जगहों पर जोरदार विस्फोट और आग की घटनाएं देखी गईं, जिनके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
ट्रंप ने शेयर किया वीडियो
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक वीडियो साझा किया है। इस वीडियो में रात के आसमान में कई बड़े विस्फोट दिखाई दे रहे हैं। माना जा रहा है कि यह वीडियो हमले के समय का ही है, जिसमें सैन्य कार्रवाई के दृश्य कैद हुए हैं।
ईरान की रणनीतिक स्थिति पर असर
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने अपने उच्च-शुद्धता वाले यूरेनियम का बड़ा हिस्सा इस्फ़हान की भूमिगत सुविधाओं में स्थानांतरित किया था। ऐसे में इस हमले को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला ईरान के परमाणु और सैन्य ढांचे को कमजोर करने की दिशा में बड़ा कदम हो सकता है।
ट्रंप की धमकी से बढ़ा तनाव
हमले से पहले ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि यदि युद्ध समाप्त करने पर समझौता नहीं होता, तो अमेरिका ईरान के ऊर्जा ढांचे को निशाना बना सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोला जाए, क्योंकि यह वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है।
ऊर्जा और पानी संकट का खतरा
ट्रंप की चेतावनी में यह भी शामिल था कि यदि तनाव बढ़ा तो ईरान के तेल कुएं, बिजली संयंत्र और यहां तक कि खारे पानी को मीठा करने वाले संयंत्र भी निशाने पर आ सकते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह की कार्रवाई पूरे मध्य पूर्व में गंभीर जल और ऊर्जा संकट पैदा कर सकती है।
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अब एक गंभीर सैन्य और कूटनीतिक संकट का रूप लेता दिख रहा है। इस्फ़हान पर हुआ हमला और ट्रंप की चेतावनियों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो सकती है।
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