ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
गाजियाबाद के साहिबाबाद इलाके में एक फैक्ट्री की पुरानी दीवार अचानक गिरने से बड़ा हादसा हो गया, जिसमें दो महिला मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई और दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं।
हादसा कैसे हुआ
यह हादसा गाजियाबाद के साहिबाबाद थाना क्षेत्र
के पास बॉर्डर इलाके में सोमवार दोपहर हुआ बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक मजदूर
दोपहर के समय खाना खाने के लिए पास के एक खाली प्लॉट में बैठते थे, जहां फैक्ट्री की पुरानी और जर्जर
दीवार खड़ी थी। उसी दौरान दीवार अचानक भरभराकर गिर गई और चार लोग मलबे के नीचे दब
गए।
लोगों के अनुसार हादसा इतना अचानक हुआ कि किसी
को संभलने का मौका नहीं मिला। यह वो वक्त होता है जब मजदूर थोड़ी देर आराम करते
हैं, पानी पीते हैं
और घर की बातें करते हैं—लेकिन यहां एक पल में सब कुछ बदल गया।
दो महिलाओं की मौत, दो घायल
रिपोर्ट में बताया गया है कि इस हादसे में दो
महिलाओं की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए, जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया
गया। जानकारी के मुताबिक ये सभी पास की ही एक फैक्ट्री में मजदूरी का काम करते थे।
ऐसे हादसों में सबसे ज्यादा दुख यह होता है कि
परिवार को अचानक खबर मिलती है—और कई बार घर से निकला इंसान वापस नहीं लौटता। मजदूर
परिवारों के लिए यह सिर्फ एक “हादसा” नहीं, सीधी जिंदगी की टूटन बन जाता है।
राहत-बचाव: JCB से हटाया मलबा
हादसे की सूचना मिलते ही थाना साहिबाबाद पुलिस
मौके पर पहुंची और राहत-बचाव काम शुरू कराया गया। रिपोर्ट के मुताबिक जेसीबी और
स्थानीय लोगों की मदद से मलबा हटाया गया और दबे हुए लोगों को बाहर निकाला गया।
पुलिस ने मृतक महिलाओं के शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिए।
मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि शुरुआती कुछ
मिनट सबसे भारी थे, क्योंकि
दीवार का मलबा ज्यादा था और लोग घबराए हुए थे। ऐसे समय में स्थानीय लोग भी आगे आते
हैं—कोई पानी लाता है, कोई
एंबुलेंस बुलवाने में मदद करता है,
और कोई मलबा हटाने में हाथ बंटाता है।
लापरवाही का आरोप क्यों लग रहा है
स्थानीय लोगों ने फैक्ट्री प्रबंधन पर लापरवाही
का आरोप लगाया है और कहा गया है कि दीवार पुरानी और जर्जर थी, जिसकी शिकायत पहले भी की जा चुकी थी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि मजदूर अक्सर इसी जगह बैठकर खाना खाते थे और
सोमवार को भी वही हुआ। सवाल यह उठ रहा है कि अगर दीवार कमजोर थी, तो उसे ठीक क्यों नहीं कराया गया, और मजदूरों के लिए सुरक्षित जगह क्यों
नहीं बनाई गई।
यह बात भी समझने वाली है कि मजदूर जहां बैठते
हैं, वह जगह “सिर्फ
खाली प्लॉट” नहीं होती—वह उनकी रोज की आदत और जरूरत होती है। अगर फैक्ट्री के
आसपास कोई जोखिम वाली चीज है, तो
उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
पुलिस जांच में क्या देख रही है
पुलिस के मुताबिक मामले की जांच की जा रही है
और फैक्ट्री प्रबंधन से पूछताछ भी हो रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि दीवार कितनी पुरानी थी, क्या उसकी मरम्मत जरूरी थी और मजदूरों
को बैठने के लिए सुरक्षित जगह उपलब्ध थी या नहीं। ऐसी जांच में आमतौर पर ये बातें
देखी जाती हैं कि पहले कोई शिकायत हुई थी या नहीं, दीवार की हालत कैसी थी, और सुरक्षा नियमों का पालन हुआ या नहीं।
जांच के बाद ही साफ होगा कि यह सिर्फ
“दुर्घटना” थी या किसी की लापरवाही ने इसे मौत में बदला। पीड़ित परिवारों की
उम्मीद यही रहती है कि उन्हें इंसाफ मिले और आगे किसी और के साथ ऐसा न हो।
क्यों जरूरी है सुरक्षित काम की जगह
औद्योगिक इलाकों में दीवार गिरना, छत ढहना या आग लगना जैसी घटनाएं
बार-बार सामने आती हैं। इसका एक बड़ा कारण यह भी होता है कि कई जगह सुरक्षा को
“बाद में देखेंगे” वाली सोच से चलाया जाता है, जबकि सुरक्षा की जरूरत सबसे पहले होती है। मजदूरों को सुरक्षित काम
की जगह, सुरक्षित
बैठने/खाने की जगह, और
खतरे वाली जगहों से दूर रखना बेसिक चीजें हैं।
अगर फैक्ट्री की कोई दीवार कमजोर है, तो उसे तुरंत ठीक करना चाहिए। अगर
मजदूर किसी दीवार के पास बैठते हैं,
तो वहां चेतावनी, बैरिकेडिंग, या अलग बैठने की जगह बनाना जरूरी है।
छोटी-छोटी सावधानियां ही बड़े हादसे रोकती हैं।
आगे क्या ध्यान रखें (सीधी और काम की बातें)
ऐसे हादसों से एक बात साफ निकलती है—काम की जगह
पर सुरक्षा सिर्फ कागज पर नहीं,
जमीन पर दिखनी चाहिए।
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