ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
गाजियाबाद और नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में काम करने वाले कर्मचारी बढ़ती महंगाई से परेशान हैं। उनका कहना है कि 11,000 से 15,000 रुपये की सैलरी में घर चलाना बेहद मुश्किल हो गया है। रसोई गैस, किराया और रोजमर्रा की जरूरतों के दाम लगातार बढ़ने से कर्मचारियों का मासिक बजट पूरी तरह बिगड़ गया है।
कर्मचारियों ने बताई अपनी परेशानी
नोएडा की एक कंपनी में काम करने वाले आशीष पांडे ने बताया कि वे 13,000 रुपये की सैलरी पर काम करते हैं और खर्च बचाने के लिए रोज साइकिल से आना-जाना करते हैं। पैकिंग विभाग में काम करने वाले विकास कुमार ने कहा कि 15,000 रुपये में से लगभग 2,000 रुपये सिर्फ यात्रा में खर्च हो जाते हैं, जिससे बाकी खर्च पूरे करना मुश्किल है।
नौकरी की असुरक्षा और दबाव
कई कर्मचारियों ने कहा कि वेतन बढ़ाने की बात करने पर नौकरी जाने का डर रहता है। Julie Yadav ने बताया कि कर्मचारी अपनी समस्याएं खुलकर नहीं रख पाते क्योंकि उन्हें नौकरी खोने का डर होता है। वहीं सन्नी और रिंकू यादव जैसे कर्मचारियों ने कहा कि बढ़ते किराए और गैस सिलेंडर के दामों ने जीवन को और कठिन बना दिया है।
न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी के बावजूद असंतोष
सरकारी स्तर पर श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन बढ़ाया गया है।
नए मानकों के अनुसार—
- अकुशल श्रमिक: ₹13,690
- अर्धकुशल श्रमिक: ₹15,059
- कुशल श्रमिक: ₹16,868
इसके बावजूद कर्मचारियों का कहना है कि यह बढ़ोतरी मौजूदा महंगाई के मुकाबले काफी कम है और जीवन यापन के लिए पर्याप्त नहीं है।
औद्योगिक क्षेत्रों में पुलिस अलर्ट
हाल ही में नोएडा में हुए श्रमिक प्रदर्शन के बाद गाजियाबाद में भी प्रशासन सतर्क हो गया है। औद्योगिक क्षेत्रों में पुलिस और पीएसी की तैनाती बढ़ा दी गई है। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर निगरानी और सुरक्षा कड़ी कर दी गई है
खुफिया एजेंसियां भी सक्रिय
सूत्रों के अनुसार खुफिया एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। एनएच-9 और आसपास के औद्योगिक इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोका जा सके।
गाजियाबाद और नोएडा के श्रमिकों की यह स्थिति बढ़ती महंगाई और सीमित आय के बीच बढ़ते असंतुलन को दिखाती है। एक ओर कर्मचारी आर्थिक राहत की मांग कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था को लेकर सतर्क है। आने वाले समय में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।
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