ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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दिल्ली दंगों के दौरान इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के सिक्योरिटी असिस्टेंट अंकित शर्मा की हत्या देश को झकझोर देने वाली घटनाओं में से एक थी। 25 फरवरी 2020 को हुई इस हत्या के मामले में अब कड़कड़डूमा कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है, जबकि छह अन्य आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया गया। यह फैसला लंबे समय से चल रहे इस चर्चित मामले में एक महत्वपूर्ण कानूनी पड़ाव माना जा रहा है।
क्या हुआ था 25 फरवरी 2020 को?
फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी को लेकर उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। चांद बाग, खजूरी खास, मुस्तफाबाद और आसपास के क्षेत्रों में कई दिनों तक हिंसा, आगजनी और पत्थरबाजी की घटनाएं हुईं। इसी दौरान 26 वर्षीय अंकित शर्मा, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो में सिक्योरिटी असिस्टेंट के पद पर कार्यरत थे, 25 फरवरी की शाम अपने कार्यालय से घर लौटे। कुछ समय बाद वह घर से बाहर निकले, लेकिन फिर वापस नहीं लौट सके।
हत्या का आरोप कैसे लगा?
अंकित शर्मा के परिवार ने उनकी तलाश शुरू की। बाद में उनका शव चांद बाग पुलिया के पास खजूरी खास नाले से बरामद हुआ। अंकित के पिता रविंद्र कुमार ने एफआईआर में आरोप लगाया कि पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन और उनके साथियों ने उनके बेटे की हत्या की। शिकायत के अनुसार, हिंसक भीड़ ने अंकित को घेर लिया, उन्हें जबरन खींचकर ले जाया गया और धारदार हथियारों से हमला किया गया। हत्या के बाद शव को नाले में फेंक दिया गया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई थी क्रूरता
पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, अंकित शर्मा के शरीर पर 51 चोटों के निशान मिले थे। रिपोर्ट में बताया गया कि उन पर बेहद क्रूर तरीके से हमला किया गया था। यह रिपोर्ट मामले की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी गई और अभियोजन पक्ष ने इसे अदालत के सामने प्रमुख आधार के रूप में पेश किया।
कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया?
कड़कड़डूमा कोर्ट ने इस मामले में पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन के अलावा नाजिम, जावेद, कासिम और अनस को दोषी करार दिया है। मामले में कुल 11 आरोपी ट्रायल का सामना कर रहे थे। इनमें से छह आरोपियों को अदालत ने संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। दोषियों को किस सजा का सामना करना होगा, इसका फैसला अदालत सजा सुनाए जाने की अगली सुनवाई में करेगी।
लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आया फैसला
इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने की थी। पिछले कई वर्षों में अदालत के सामने गवाहों के बयान, फोरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और अन्य दस्तावेज पेश किए गए। लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर अपना फैसला सुनाया।
देशभर में चर्चा का विषय रहा मामला
अंकित शर्मा हत्याकांड दिल्ली दंगों के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। इस मामले को लेकर लगातार कानूनी और राजनीतिक बहस होती रही। अब अदालत द्वारा दोषसिद्धि के फैसले के बाद एक अहम कानूनी चरण पूरा हो गया है।
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