ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल तिवारी ने जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर घटना की सीबीआई जांच कराने और एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। याचिका में दावा किया गया है कि यह मुठभेड़ फर्जी थी और इसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है।
याचिका में क्या-क्या मांग की गई?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिका में कहा गया है कि भरत भूषण तिवारी की मौत की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराई जाए। इसके लिए मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपी जाए। इसके अलावा याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में एक स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति गठित करने की भी मांग की है, ताकि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष निगरानी हो सके और कानून के शासन पर लोगों का भरोसा बना रहे।
'फर्जी एनकाउंटर' का लगाया आरोप
याचिका में भरत भूषण तिवारी की मौत को एक कथित फर्जी एनकाउंटर बताया गया है। अधिवक्ता विशाल तिवारी का कहना है कि प्रथम दृष्टया यह मामला हत्या का प्रतीत होता है, इसलिए इसकी निष्पक्ष जांच बेहद आवश्यक है। उन्होंने अदालत से अनुरोध किया है कि जांच पूरी होने तक सभी संबंधित तथ्यों और सबूतों को सुरक्षित रखा जाए।
पवन सिंह ने भी उठाई निष्पक्ष जांच की मांग
भाजपा के विधान पार्षद और भोजपुरी अभिनेता पवन सिंह ने भी इस मामले पर दुख जताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा कि भरत भूषण तिवारी समाज के गरीब, वंचित और बाढ़ प्रभावित लोगों की आवाज उठाने वाले व्यक्ति थे। उन्होंने कहा कि भरत भूषण ने कोरोना महामारी, बाढ़ और अन्य कठिन परिस्थितियों में समाज सेवा के कई कार्य किए थे। प्रशासन और स्थानीय लोगों के साथ मिलकर उन्होंने कई जनहित के कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी।
'सच सामने आना चाहिए'
पवन सिंह ने कहा कि भरत भूषण तिवारी की मौत ने पूरे समाज को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि घटना से जुड़े वीडियो और सामने आ रही जानकारियां सही हैं, तो पूरे मामले की पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई देश के सामने आ सके। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के बाद अब सभी की नजर अदालत की अगली सुनवाई पर है। यदि कोर्ट इस याचिका को स्वीकार करता है तो मामले की जांच की दिशा बदल सकती है। फिलहाल यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अदालत इस मामले में CBI जांच और स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग पर क्या फैसला देती है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!