ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब नए मतदाता बनने के लिए आवेदन करने वाले लोगों को फॉर्म-6 भरते समय अपने माता-पिता की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से जुड़ी जानकारी भी देनी होगी। इस नए नियम का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक और पारदर्शी बनाना बताया गया है।
क्या है नया नियम?
चुनाव आयोग के अनुसार, ऑनलाइन आवेदन करने वाले नए मतदाताओं को यह बताना होगा कि क्या उनका या उनके माता-पिता का नाम पिछली SIR (Special Intensive Revision) प्रक्रिया के दौरान तैयार की गई मतदाता सूची में शामिल था। यह जानकारी ऑनलाइन आवेदन के दौरान अनिवार्य कर दी गई है। जब तक आवेदक इस घोषणा को पूरा नहीं करेंगे, तब तक वे फॉर्म-6 ऑनलाइन जमा नहीं कर सकेंगे।
फॉर्म-6 में जोड़ा गया नया घोषणा पत्र
ऑनलाइन पोर्टल ECINET पर उपलब्ध फॉर्म-6 में एक नया घोषणा (Declaration) सेक्शन जोड़ा गया है। इसमें आवेदकों को तीन विकल्पों में से एक का चयन करना होगा:
• आवेदक का नाम पिछली SIR मतदाता सूची में था।
• आवेदक के माता-पिता या दादा-दादी/नाना-नानी का नाम पिछली SIR सूची में था।
• आवेदक और उसके माता-पिता में से किसी का भी नाम पिछली SIR सूची में नहीं था।
यह जानकारी चुनाव आयोग को मतदाता की पहचान और रिकॉर्ड के सत्यापन में मदद करेगी।
बिहार SIR अभियान के दौरान हुई शुरुआत
अधिकारियों के मुताबिक, यह व्यवस्था पिछले वर्ष बिहार में शुरू किए गए Special Intensive Revision (SIR) अभियान के दौरान लागू की गई थी। इसके बाद जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR अभियान चला, वहां भी इसे वोटर रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया का हिस्सा बना दिया गया। चुनाव आयोग का कहना है कि इससे नए मतदाताओं को कम दस्तावेज जमा करने पड़ेंगे और सत्यापन प्रक्रिया भी अधिक आसान होगी।
SIR अभियान का उद्देश्य क्या है?
स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) अभियान का मुख्य उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन और त्रुटिरहित बनाना है। इसके तहत:
• पात्र मतदाताओं की पहचान की जाती है।
• मृत मतदाताओं के नाम हटाए जाते हैं।
• एक से अधिक स्थानों पर दर्ज नामों को हटाया जाता है।
• स्थानांतरित हो चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड अपडेट किए जाते हैं।
• विदेशी नागरिकों के नाम हटाने की प्रक्रिया भी की जाती है।
कई राज्यों में पूरा हो चुका है अभियान
चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु समेत कई राज्यों में SIR अभियान पूरा हो चुका है। वहीं अन्य राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया अभी भी जारी है। आयोग का मानना है कि नए नियम से मतदाता सूची अधिक विश्वसनीय बनेगी और भविष्य के चुनावों में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
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