ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
मणिपुर में लंबे समय से जारी जातीय हिंसा के बीच एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। कुकी-जो समुदाय के प्रमुख संगठन कुकी-जो काउंसिल (KZC) ने पहली बार सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया है कि छह लियांगमै नागा ग्रामीणों की हत्या उनके समुदाय के लोगों द्वारा की गई थी। संगठन ने इस घटना को गंभीर भूल बताते हुए सार्वजनिक रूप से अफसोस भी जताया है। यह पहली बार है जब किसी प्रमुख कुकी-जो संगठन ने इस घटना पर खुलकर प्रतिक्रिया दी है। इससे पहले इस मामले में दोनों समुदायों के बीच लगातार आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा था।
KZC अध्यक्ष ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत के दौरान KZC अध्यक्ष हेनलियानथांग थांगलेट ने वीडियो संदेश जारी कर कहा कि छह नागा ग्रामीणों की हत्या भावनाओं के उबाल में हुई और यह एक बहुत बड़ी गलती थी। उन्होंने कहा कि संगठन इस घटना की आलोचना करता है और ऐसी घटनाएं किसी भी समाज के लिए उचित नहीं हैं। इस दौरान KZC के प्रवक्ता गिंजा वुआलजोंग भी मौजूद रहे।
11 जून को मिले थे छह ग्रामीणों के शव
इन छह लियांगमै नागा ग्रामीणों का 13 मई को अपहरण कर लिया गया था। कई दिनों तक उनका कोई पता नहीं चल सका। बाद में 11 जून को सुरक्षा बलों ने उनके शव बरामद किए। शवों की स्थिति काफी खराब थी, जिससे पूरे इलाके में भारी आक्रोश फैल गया। इस घटना के बाद मणिपुर के नागा बहुल क्षेत्रों के साथ-साथ नागालैंड और इंफाल घाटी में भी विरोध प्रदर्शन हुए।
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
13 मई को लेइलोन वैफेई गांव के पास अज्ञात हमलावरों ने दो वाहनों पर घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में तीन थाडौ चर्च नेताओं की हत्या कर दी गई थी। इसके बाद कुकी-जो संगठनों ने इस हमले के लिए नागा के सशस्त्र संगठनों, विशेष रूप से नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नागालिम (NSCN), को जिम्मेदार ठहराया था। हालांकि इन आरोपों पर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दावे रहे हैं।
हत्याओं के बाद बढ़ा बंधक संकट
चर्च नेताओं की हत्या के बाद कुकी और नागा समुदायों के बीच तनाव और बढ़ गया। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के लोगों का अपहरण करना शुरू कर दिया, जिससे बंधक संकट पैदा हो गया। सुरक्षा बलों की मध्यस्थता के बाद 15 मई को दोनों समुदायों के 14-14 लोगों की अदला-बदली कराई गई। इसके बाद 9 जून को नागा संगठनों और चर्च समूहों के प्रयास से बाकी 14 कुकी बंधकों को भी रिहा कर दिया गया। हालांकि नागा पक्ष का आरोप था कि उनकी ओर से अपहृत लोगों को तत्काल रिहा नहीं किया गया, जिससे चिंता और बढ़ गई।
अब केंद्र सरकार से उठ रही नई मांग
छह नागा ग्रामीणों के शव मिलने के बाद यूनाइटेड नागा काउंसिल और कई नागा तथा मैतेई संगठनों ने केंद्र सरकार से 25 कुकी-जो सशस्त्र संगठनों के साथ हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते को समाप्त करने की मांग की है। इन संगठनों का आरोप है कि कुछ उग्रवादी समूह राज्य में हिंसा को लंबा खींचने में भूमिका निभा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में केंद्र सरकार की ओर से अभी कोई नया आधिकारिक फैसला सामने नहीं आया है।
शांति बहाली की चुनौती बरकरार
KZC की ओर से सार्वजनिक रूप से अफसोस जताना एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है, लेकिन मणिपुर में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं। राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास बहाल करना और हिंसा पर स्थायी रोक लगाना प्रशासन और सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि सभी पक्षों के बीच संवाद, निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई ही राज्य में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में सबसे अहम कदम हो सकते हैं।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!