ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और तेल की अनिश्चितता के बीच भारत के लिए राहत भरी खबर आई है। ऑयल इंडिया लिमिटेड ने राजस्थान के थार रेगिस्तान से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाकर नया रिकॉर्ड बना दिया है। यह उपलब्धि भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।
रिकॉर्ड उत्पादन से मिली बड़ी सफलता
अधिकारियों के अनुसार, जोधपुर सैंडस्टोन फॉर्मेशन से कंपनी ने 1,202 बैरल प्रतिदिन का उत्पादन हासिल किया है। यह पिछले साल के 705 बैरल प्रतिदिन के मुकाबले करीब 70% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी दिखाती है कि भारत अब घरेलू तेल उत्पादन में तेजी से आगे बढ़ रहा है और विदेशी तेल पर निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रहा है।
तेल का सफर: राजस्थान से गुजरात तक
जैसलमेर के बागेवाला फील्ड से निकला कच्चा तेल पहले टैंकरों के जरिए गुजरात के मेहसाणा पहुंचाया जाता है। वहां ONGC की सुविधाओं में प्रोसेस होने के बाद इसे पाइपलाइन के जरिए IOCL की कोयली रिफाइनरी भेजा जाता है। वित्त वर्ष 2025-26 में इस फील्ड से 43,773 मीट्रिक टन उत्पादन हुआ, जो पिछले साल के 32,787 मीट्रिक टन से काफी ज्यादा है।
CSS तकनीक ने बदली तस्वीर
इस सफलता के पीछे साइक्लिक स्टीम स्टिमुलेशन (CSS) तकनीक का बड़ा योगदान है। यह एक एडवांस्ड तकनीक है, जिससे गाढ़े (heavy) तेल को भी आसानी से निकाला जा सकता है। थार क्षेत्र की जमीन और भू-वैज्ञानिक स्थितियां काफी कठिन हैं, लेकिन इस तकनीक ने उत्पादन को संभव बना दिया है।
नई तकनीकों से बढ़ा उत्पादन
ऑयल इंडिया ने उत्पादन बढ़ाने के लिए कई आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है। इनमें फिशबोन ड्रिलिंग, बेयरफुट कंप्लीशन और इलेक्ट्रिक डाउनहोल हीटर्स शामिल हैं। इसके अलावा हाइड्रोलिक सकर रॉड पंप्स और हाई टेम्परेचर वेलहेड्स का भी उपयोग किया गया, जिससे उत्पादन और बेहतर हुआ।
ड्रिलिंग और ऑपरेशन में तेजी
इस साल कंपनी ने 19 कुओं में CSS ऑपरेशन किए, जो पिछले साल से 72% ज्यादा हैं। साथ ही 13 नए कुएं भी खोदे गए, जबकि पिछले साल यह संख्या 9 थी। यह दिखाता है कि कंपनी लगातार अपने ऑपरेशन का विस्तार कर रही है।
क्यों खास है यह उपलब्धि?
बागेवाला फील्ड 1991 में खोजा गया था और 2017 से यहां उत्पादन शुरू हुआ। 2018 में CSS तकनीक का ट्रायल किया गया था, जो अब बड़े स्तर पर सफल साबित हो रहा है। यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी सफलता है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में भी बड़ा कदम है।
थार रेगिस्तान से बढ़ता तेल उत्पादन भारत के लिए एक सकारात्मक संकेत है। इससे देश की विदेशी तेल पर निर्भरता कम होगी और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।अगर इसी तरह नई तकनीकों का इस्तेमाल जारी रहा, तो आने वाले समय में भारत ऊर्जा के क्षेत्र में और आत्मनिर्भर बन सकता है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!