ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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फ्रांस में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के बढ़ते प्रभाव और उससे जुड़े खतरों पर दुनिया का ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि AI मानव जीवन को बेहतर बनाने की बड़ी क्षमता रखता है, लेकिन यदि इसका जिम्मेदारी से इस्तेमाल नहीं किया गया तो यह बच्चों और समाज के लिए गंभीर खतरा भी बन सकता है। प्रधानमंत्री ने खास तौर पर डीपफेक, फर्जी जानकारी और साइबर धोखाधड़ी जैसे खतरों से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
AI बच्चों के लिए अवसर भी, चुनौती भी
‘सुरक्षित, त्वरित और प्रभावी AI कार्यान्वयन’ विषय पर आयोजित सत्र में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि AI शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा बदलाव ला सकता है। इसके जरिए बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जा सकता है, उनकी रचनात्मकता बढ़ाई जा सकती है और उनकी जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत सीखने का अनुभव दिया जा सकता है।
हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो यही तकनीक बच्चों को गलत जानकारी, डीपफेक, ऑनलाइन शोषण और साइबर अपराध जैसी समस्याओं के प्रति अधिक संवेदनशील बना सकती है।
"डिजिटल दुनिया बच्चों के लिए सुरक्षित बने"
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दुनिया को यह सुनिश्चित करना होगा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों के लिए सीखने और विकास का माध्यम बनें, न कि उन्हें गुमराह करने या प्रभावित करने का जरिया। उन्होंने कहा कि तकनीक अपने आप में न अच्छी होती है और न बुरी। इसका असर इस बात पर निर्भर करता है कि उसे किन मूल्यों, नीतियों और नियमों के तहत विकसित और इस्तेमाल किया जाता है।
AI का उद्देश्य इंसानों को सशक्त बनाना होना चाहिए
प्रधानमंत्री ने कहा कि AI को लेकर दुनिया की सोच और नीतियां स्पष्ट होनी चाहिए। उनका मानना है कि AI का उद्देश्य लोगों की क्षमता बढ़ाना, उन्हें अधिक अवसर देना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि AI मानव द्वारा विकसित की गई सबसे परिवर्तनकारी तकनीकों में से एक है, लेकिन इसकी सफलता का सही पैमाना मशीनों की ताकत नहीं बल्कि आम लोगों के जीवन में आने वाला सकारात्मक बदलाव होना चाहिए।
भारत ने रखा 'Human-Centric AI' पर जोर
पीएम मोदी ने कहा कि भारत में आयोजित AI Impact Summit के दौरान भी इसी सोच को आगे बढ़ाया गया था। उन्होंने बताया कि भारत हमेशा "Human-Centric AI" यानी मानव-केंद्रित कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास का समर्थन करता रहा है, जिसमें तकनीक का केंद्र इंसान और समाज का हित हो।
साइबर सुरक्षा पर वैश्विक सहयोग जरूरी
प्रधानमंत्री मोदी ने साइबर सुरक्षा के मुद्दे पर भी दुनिया से एकजुट होकर काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जब तक दुनिया का हर देश साइबर सुरक्षा के लिहाज से सुरक्षित नहीं होगा, तब तक कोई भी देश पूरी तरह सुरक्षित नहीं रह सकता। उन्होंने दोहराया कि भारत हमेशा साइबर स्पेस को "Global Public Good" यानी वैश्विक सार्वजनिक भलाई के रूप में देखता है और इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने के पक्ष में है।
प्रधानमंत्री मोदी का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब दुनिया भर में AI का तेजी से विस्तार हो रहा है और डीपफेक, फर्जी कंटेंट तथा साइबर अपराध जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में उनका यह आह्वान जिम्मेदार, सुरक्षित और मानव-केंद्रित AI के महत्व को और अधिक रेखांकित करता है।
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