ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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राष्ट्रपति भवन में आयोजित रक्षा अलंकरण समारोह 2026 के दौरान एक ऐसा भावुक क्षण देखने को मिला जिसने पूरे देश का दिल छू लिया। जब शहीद सैनिक प्रवीन जनजाल (जंजाल प्रवीन प्रभाकर) को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया, तब उनकी मां पुरस्कार ग्रहण करने के लिए मंच पर पहुंचीं। अपने बेटे की वीरता और बलिदान को याद कर वह भावुक हो गईं। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें गले लगाकर सांत्वना दी। यह दृश्य वहां मौजूद सभी लोगों को भावुक कर गया।
राष्ट्र के वीर सपूत को मिला कीर्ति चक्र
रक्षा अलंकरण समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों और पुलिस कर्मियों को विभिन्न वीरता पुरस्कारों से सम्मानित किया। इसी समारोह में शहीद सैनिक प्रवीन जनजाल को मरणोपरांत कीर्ति चक्र प्रदान किया गया, जो भारत का दूसरा सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है। प्रवीन जनजाल ने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद विरोधी अभियान के दौरान असाधारण साहस का परिचय दिया था। आतंकियों से मुकाबला करते हुए उन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी बहादुरी को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित सम्मान के लिए चुना गया था।
जब भावनाओं से भर उठा दरबार हॉल
सम्मान ग्रहण करने के लिए जब शहीद की मां मंच पर पहुंचीं तो वह अपने बेटे को याद कर भावुक हो गईं। बेटे के बलिदान का दर्द उनकी आंखों में साफ दिखाई दे रहा था। इस दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने औपचारिकताओं से आगे बढ़ते हुए उन्हें गले लगाया और ढांढस बंधाया। यह दृश्य पूरे समारोह का सबसे मार्मिक पल बन गया।
राष्ट्रपति का यह मानवीय और संवेदनशील व्यवहार सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया। लोगों ने इसे देश के वीर सैनिकों और उनके परिवारों के प्रति सम्मान और संवेदना का प्रतीक बताया।
कौन थे शहीद प्रवीन जनजाल?
महाराष्ट्र के अकोला जिले से आने वाले प्रवीन जनजाल भारतीय सेना में सेवारत थे। उनका सपना बचपन से ही सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना था। सेना में शामिल होने के बाद उन्होंने कई महत्वपूर्ण अभियानों में हिस्सा लिया। एक आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन के दौरान उन्होंने बहादुरी से आतंकियों का सामना किया और लड़ते हुए शहीद हो गए। उनकी वीरता और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित करने का निर्णय लिया।
रक्षा अलंकरण समारोह 2026 की खास बातें
राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह के दौरान कुल 51 वीरता पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें 7 कीर्ति चक्र, 15 वीर चक्र और 29 शौर्य चक्र शामिल थे। कई पुरस्कार मरणोपरांत भी दिए गए, जिससे उन वीर जवानों के बलिदान को सम्मान दिया जा सके जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
देश ने किया वीर सपूत को नमन
प्रवीन जनजाल की कहानी केवल एक सैनिक की बहादुरी की कहानी नहीं है, बल्कि यह देशभक्ति, कर्तव्य और बलिदान का प्रेरणादायक उदाहरण है। राष्ट्रपति मुर्मू द्वारा उनकी मां को गले लगाने का दृश्य देशवासियों को यह संदेश देता है कि भारत अपने वीर जवानों और उनके परिवारों के त्याग को कभी नहीं भूलता।यह सम्मान केवल एक पदक नहीं, बल्कि उस बलिदान की पहचान है जिसने देश को सुरक्षित रखने के लिए अपना सब कुछ न्योछावर कर दिया।
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