ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नोएडा और पश्चिमी यूपी के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले महीने जेवर में नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे। उन्होंने इसे भारत का सबसे बड़ा एयरपोर्ट बताते हुए यह भी कहा कि यह सिर्फ यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि कार्गो के लिए भी एक बड़ा सेंटर बनेगा। इस ऐलान के बाद से जेवर एयरपोर्ट एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है।
क्यों खास है जेवर एयरपोर्ट
दिल्ली-एनसीआर में एयर ट्रैफिक लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में एक बड़े नए एयरपोर्ट की जरूरत काफी समय से महसूस की जा रही थी। जेवर एयरपोर्ट से उम्मीद है कि यात्रियों को बेहतर विकल्प मिलेगा और भीड़ का दबाव कम होगा। इसके साथ ही यह इलाका एक नए “एविएशन गेटवे” की तरह उभरेगा, जिससे कनेक्टिविटी, व्यापार और रोजगार तीनों पर असर पड़ेगा।
कार्गो हब बनने का मतलब
सीएम योगी ने खास तौर पर कार्गो हब की बात की। इसका सीधा मतलब यह है कि यहां से माल की ढुलाई तेज होगी, कंपनियों को लॉजिस्टिक्स में सुविधा मिलेगी और निर्यात-आयात से जुड़े कारोबार को फायदा होगा। एयर कार्गो बढ़ने से वेयरहाउस, ट्रांसपोर्ट, पैकेजिंग और सप्लाई चेन में नए काम भी बनते हैं। यानी यह सिर्फ “एयरपोर्ट” नहीं, एक पूरा इकोसिस्टम है।
यूपी में एयरपोर्ट्स की बढ़ती संख्या
सीएम योगी ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में देश में सबसे ज्यादा एयरपोर्ट हैं। यह बात इंफ्रास्ट्रक्चर के नजरिए से बड़ा संदेश देती है। राज्य सरकार का फोकस कनेक्टिविटी बढ़ाने पर है और जेवर इस रणनीति का सबसे बड़ा प्रोजेक्ट माना जा रहा है।
आम लोगों को क्या फायदा?
सिर्फ बड़े निवेशक ही नहीं, आम यात्रियों को भी फायदा होगा—कम दूरी, नए रूट, और संभावित तौर पर बेहतर विकल्प। ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे बेल्ट, बुलंदशहर, अलीगढ़ तक इस प्रोजेक्ट का असर पहुंच सकता है। होटल, टैक्सी, लोकल ट्रांसपोर्ट और छोटे व्यवसायों को भी नए ग्राहक मिलेंगे।
आगे क्या देखना है
अब लोगों की नजर उद्घाटन की तारीख और एयरपोर्ट के ऑपरेशनल रोलआउट पर है—पहली फ्लाइट कब, कौन-कौन से रूट, और फेज वाइज विस्तार कैसे होगा। इतना तय है कि जेवर एयरपोर्ट चालू होते ही यूपी के इंफ्रास्ट्रक्चर और एनसीआर की कनेक्टिविटी में एक बड़ा बदलाव दिखेगा।
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