ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
जब भी प्रधानमंत्री किसी कार्यक्रम, रैली या विदेश यात्रा पर जाते हैं, तो उनके आसपास कुछ लोग बहुत अलग अंदाज में नजर आते हैं। काले कपड़े, कान में ईयरपीस, चौकन्नी निगाहें और लगभग हमेशा आंखों पर काला चश्मा। ये होते हैं एसपीजी कमांडो—यानी स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप। बहुत लोगों के मन में यही सवाल आता है कि ये कमांडो हर वक्त काला चश्मा क्यों पहनते हैं? क्या यह बस यूनिफॉर्म का हिस्सा है, या इसके पीछे कोई असली वजह है?
असल में, सुरक्षा की दुनिया में छोटी-छोटी चीजें भी बहुत
बड़ा फर्क पैदा करती हैं। काला चश्मा भी उन्हीं चीजों में से एक है। यह किसी फैशन
या “हीरो” वाली इमेज के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा के
काम में मदद करने के लिए पहना जाता है। कई बार भीड़ के बीच, तेज धूप में या किसी अचानक खतरे के समय, यही छोटा सा उपकरण कमांडो की काम करने की क्षमता
को बेहतर बनाता है।
एसपीजी कमांडो कौन
होते हैं?
एसपीजी यानी स्पेशल
प्रोटेक्शन ग्रुप भारत की एक खास और बहुत प्रशिक्षित सुरक्षा एजेंसी है। इसका गठन 1985 में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के
बाद किया गया था। एसपीजी की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री, पूर्व प्रधानमंत्री और कुछ खास विदेशी मेहमानों
की सुरक्षा बताई जाती है। इन कमांडो को अलग-अलग तरह की खतरनाक परिस्थितियों में
काम करने की ट्रेनिंग मिलती है, ताकि भीड़, खुले मैदान, रोड शो, हवाई यात्रा—हर जगह सुरक्षा बनी रहे।
अब सवाल आता है कि
जब इनका काम ही इतना हाई-रिस्क है, तो फिर काले चश्मे
की जरूरत क्यों पड़ती है?
इसके पीछे कई व्यावहारिक कारण बताए गए हैं।
1) आंखों की दिशा छिपाने के लिए
सुरक्षा ड्यूटी में
आंखें सबसे बड़ा हथियार होती हैं। कमांडो लगातार चारों तरफ देख रहा होता है—भीड़
में कौन संदिग्ध है, किस तरफ हलचल हुई, कौन
बहुत ज्यादा नजदीक आने की कोशिश कर रहा है। अगर सामने वाला व्यक्ति कमांडो की
आंखों की दिशा और हरकत पढ़ ले, तो वह समझ सकता है
कि कमांडो किस तरफ ज्यादा ध्यान दे रहा है। इससे सुरक्षा में रिस्क बढ़ सकता है।
काला चश्मा यहां काम
आता है। इससे कमांडो की आंखों की मूवमेंट बाहर से आसानी से नहीं दिखती। भीड़ में
कोई संदिग्ध व्यक्ति यह अंदाजा नहीं लगा पाता कि कमांडो ने उसे नोटिस कर लिया है
या नहीं। यानी कमांडो की रणनीति “गुप्त” रहती है और सुरक्षा का लेयर मजबूत होता
है।
2) अचानक तेज रोशनी/फ्लैश से बचाव
कार्यक्रमों में
कैमरे, मोबाइल फ्लैश, तेज लाइट और कभी-कभी
अचानक बहुत चमक वाली रोशनी होती है। अगर किसी जगह अचानक बम धमाका, तेज फ्लैश या कोई चमकदार चीज सामने आ जाए, तो आम इंसान की आंखें कुछ पल के लिए बंद हो जाती
हैं या धुंधला दिखने लगता है। लेकिन सुरक्षा में काम कर रहे कमांडो के लिए “एक
सेकंड” भी बहुत बड़ा होता है।
काला चश्मा आंखों को
तेज रोशनी और अचानक चमक से बचाने में मदद करता है। इससे कमांडो की विज़न स्थिर
रहती है और जरूरत पड़ने पर तुरंत एक्शन लेने की क्षमता बनी रहती है।
3) संदिग्ध पर मनोवैज्ञानिक दबाव
सुरक्षा में सिर्फ
हथियार या ताकत नहीं, मनोवैज्ञानिक असर भी काम करता है। काला चश्मा
पहनने से कमांडो का लुक सख्त और प्रभावशाली लगता है। जब कोई संदिग्ध व्यक्ति
कमांडो की आंखों से “आई कॉन्टैक्ट” नहीं बना पाता, तो वह
असहज हो सकता है।
ऐसी असहजता कई बार
गलत इरादे वाले व्यक्ति को पीछे हटने पर मजबूर कर देती है। मतलब साफ है—काला चश्मा
भीड़ में एक तरह का “डिटरेंट” बन सकता है, जो सामने वाले पर
दबाव बनाता है।
4) धूप, धूल और
मौसम से सुरक्षा
कमांडो की ड्यूटी
हमेशा एसी हॉल में नहीं होती। कई बार घंटों तक खुले मैदान में खड़ा रहना पड़ता है, तेज धूप में रोड शो होता है, धूल उड़ती है, हवा चलती है, और भीड़ में लगातार मूवमेंट रहती है। ऐसे माहौल
में आंखों में जलन, पानी आना या धूल पड़ना आम बात है।
काला चश्मा आंखों को
धूप और धूल से बचाता है। इससे आंखें ज्यादा देर तक ठीक रहती हैं, नजर साफ रहती है और कमांडो थकान के बावजूद फोकस
बनाए रख पाता है।
5) सुरक्षा किट का जरूरी हिस्सा
कई लोग इसे सिर्फ
पहनावा समझ लेते हैं, लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक काला चश्मा सुरक्षा उपकरण
का भी जरूरी हिस्सा है। जैसे बुलेटप्रूफ जैकेट, ईयरपीस, कम्युनिकेशन सिस्टम और दूसरे गियर होते हैं, वैसे ही काला चश्मा भी ड्यूटी का एक हिस्सा माना
जाता है।
यह “एक्स्ट्रा” चीज
नहीं, बल्कि प्रोफेशनल जरूरत है—खासतौर पर तब, जब कमांडो को हर परिस्थिति में अलर्ट रहना होता
है।
काला चश्मा दिखने
में छोटा, काम में बड़ा
अगर सीधे शब्दों में
कहा जाए तो एसपीजी कमांडो का काला चश्मा तीन काम एक साथ करता है—कमांडो की रणनीति
छिपाता है, आंखों को सुरक्षित रखता है और सामने वाले पर असर
डालता है। सुरक्षा में काम करने वाले लोग अपनी हर छोटी आदत और हर छोटे उपकरण को एक
मकसद के साथ चुनते हैं, क्योंकि खतरा कब और कहां से आए—यह कोई नहीं
जानता।
यही वजह है कि जब भी
एसपीजी कमांडो प्रधानमंत्री या किसी वीवीआईपी के साथ नजर आते हैं, तो उनका काला चश्मा सिर्फ पहचान नहीं, उनकी ट्रेनिंग और ड्यूटी का हिस्सा भी दिखता है।
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