ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
केरल में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के बाद ‘वंदे मातरम्’ को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कार्यक्रम में राष्ट्रगीत का पूरा संस्करण गाए जाने के बाद अलग-अलग दलों ने इस पर आपत्ति और समर्थन दोनों जताया, जिससे मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया।
मुख्यमंत्री का स्पष्टीकरण
मुख्यमंत्री वी. डी. सतीशन ने स्पष्ट किया कि उन्हें पहले से जानकारी नहीं थी कि समारोह में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा पाठ किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय आयोजन से जुड़े अधिकारियों द्वारा लिया गया था। उन्होंने बताया कि जब गीत शुरू हुआ और पूरा संस्करण गाया जाने लगा, तभी उन्हें इसकी जानकारी मिली और उस समय कार्यक्रम को रोकना संभव नहीं था।
माकपा ने उठाए सवाल
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने इस पर आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकारी कार्यक्रमों में आमतौर पर ‘वंदे मातरम्’ के केवल शुरुआती दो छंद ही गाए जाते हैं। माकपा ने पूरे गीत के उपयोग को गलत बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सामाजिक और सांस्कृतिक संवेदनशीलता का ध्यान रखा जाना चाहिए, खासकर केरल जैसे बहुलतावादी राज्य में।
बीजेपी ने किया पलटवार
बीजेपी ने माकपा के रुख की आलोचना करते हुए इसे अनावश्यक विवाद बताया है। पार्टी नेताओं ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ देश की भावनाओं से जुड़ा राष्ट्रगीत है और इसका विरोध उचित नहीं है। बीजेपी विधायक वी. मुरलीधरन ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि आखिर राष्ट्रगीत के किस हिस्से पर आपत्ति है।
राजनीतिक बहस तेज
यह विवाद अब केवल शपथ ग्रहण समारोह तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य की राजनीति में एक बड़ा मुद्दा बन गया है। एक तरफ सरकार इसे प्रशासनिक फैसला बता रही है, वहीं विपक्ष और अन्य दल इस पर लगातार बयानबाजी कर रहे हैं। ‘वंदे मातरम्’ विवाद ने केरल की राजनीति को गर्मा दिया है। यह मुद्दा अब विचारधाराओं और राजनीतिक रुख का केंद्र बन गया है, जिससे आने वाले दिनों में और बहस बढ़ने की संभावना है।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!