ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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राजस्थान में कुछ मुस्लिम संगठनों ने कांग्रेस से उमर खालिद को राज्यसभा के लिए नामित करने की मांग उठाई है।
23 मार्च को इन संगठनों ने कांग्रेस नेतृत्व को पत्र लिखकर अपील की
कि वह उमर खालिद को राज्यसभा के लिए नामित करने पर विचार करे।
यह मांग ऐसे समय की गई है जब जून में राज्यसभा की तीन सीटों पर
चुनाव होने हैं।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन सीटों में कांग्रेस के पास एक सीट
जीतने की संभावना बताई जा रही है।
किन संगठनों ने उठाई मांग
राजस्थान
मुस्लिम एलायंस और मुस्लिम प्रोग्रेसिव फोरम जैसे संगठनों ने यह मांग उठाई है।
इन संगठनों का कहना है कि 2023 विधानसभा चुनाव
में मुस्लिम मतदाताओं ने कांग्रेस के वोट आधार को मजबूत किया था।
उनका कहना है कि अब उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए।
पत्र के जरिए उठाई गई इस मांग को समावेशी राजनीति और सामाजिक
प्रतिनिधित्व से जोड़कर पेश किया गया है।
संगठनों की दलील
राजस्थान
मुस्लिम एलायंस के अध्यक्ष मोहसिन राशिद टोंक ने कहा कि उमर खालिद को राज्यसभा
भेजना संवैधानिक मूल्यों और समावेशी राजनीति के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि इससे अल्पसंख्यक समुदाय को एक मजबूत संदेश
जाएगा।
मुस्लिम प्रोग्रेसिव फोरम के अध्यक्ष अब्दुल सलाम जौहर ने भी इस
मांग का समर्थन किया है।
उनका कहना है कि पार्टी को मुस्लिम मतदाताओं की भूमिका को राजनीतिक
प्रतिनिधित्व के जरिए स्वीकार करना चाहिए।
राज्यसभा चुनाव का संदर्भ
जून में
तीन सीटें खाली होने की बात सामने आई है।
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक इन सीटों में से दो पर भाजपा और एक पर
कांग्रेस के जीतने की संभावना जताई जा रही है।
इसी पृष्ठभूमि में यह मांग सामने आई है और इसे कांग्रेस के लिए
राजनीतिक निर्णय से जुड़े मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है।
कांग्रेस नेतृत्व को भेजे गए पत्र ने इस विषय को राजस्थान से बाहर
भी चर्चा में ला दिया है।
कौन हैं उमर खालिद
उमर
खालिद एक सामाजिक कार्यकर्ता और जेएनयू के पूर्व छात्र नेता हैं।
वह ‘युनाइटेड अगेंस्ट हेट’ संगठन से जुड़े रहे हैं।
नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ आंदोलनों में उनकी सक्रिय भूमिका
रही है।
उनकी पहचान एक मुखर छात्र नेता और एक्टिविस्ट के रूप में बताई गई है,
जिन्होंने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर अपनी राय रखी है।
कानूनी स्थिति
उमर
खालिद सितंबर 2020 से
दिल्ली दंगों से जुड़े एक मामले में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम के तहत
तिहाड़ जेल में बंद हैं।
उन पर आरोप है कि उन्होंने सीएए-एनआरसी विरोधी प्रदर्शनों के दौरान
हिंसा भड़काने और साजिश रचने में भूमिका निभाई।
इस मामले में अदालत में सुनवाई जारी है।
राजस्थान के कुछ मुस्लिम संगठनों की ओर से उन्हें राज्यसभा भेजने की
मांग के बाद यह मुद्दा फिर राजनीतिक चर्चा में आ गया है।
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