ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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सोशल मीडिया पर तेजी से फैलते वीडियो अब सिर्फ मनोरंजन का जरिया नहीं रहे, वे किसी की छवि बिगाड़ने का हथियार भी बनते जा रहे हैं। युवा क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी के साथ ऐसा ही हुआ। एक वायरल वीडियो में उन्हें हर्षा भोगले को जवाब देते हुए बदतमीज और घमंडी दिखाया गया, लेकिन बाद में खुद हर्षा भोगले ने सामने आकर साफ किया कि यह वीडियो नकली है और इसमें ऑडियो डब किया गया है।
हर्षा भोगले ने इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर कहा कि सोशल मीडिया पर उनका और वैभव का एक नकली डब वीडियो चल रहा है। उन्होंने साफ लिखा कि न तो ऐसा कोई सवाल पूछा गया था और न ही वैसा कोई जवाब दिया गया था। उनके शब्दों में, यह खासकर एक छोटे बच्चे के साथ की गई बेहद क्रूर और शरारतपूर्ण हरकत है।
उन्होंने यह भी कहा कि वैभव अपनी मुलाकातों में हमेशा सम्मानजनक रहे हैं। यानी जिस छवि को वायरल वीडियो में दिखाया गया, उसका असल बातचीत से कोई संबंध नहीं था।
कई लोग ऐसे वीडियो को सिर्फ मजाक समझते हैं, लेकिन असल में इसका असर बहुत गंभीर हो सकता है। खासकर तब, जब मामला एक युवा खिलाड़ी का हो, जो अभी अपना करियर बना रहा हो। सोशल मीडिया पर एक गलत वीडियो कुछ ही घंटों में हजारों लोगों तक पहुंच जाता है और कई बार सच बाद में सामने आता है।
यही वजह है कि इस मामले ने सिर्फ क्रिकेट फैंस ही नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया के जिम्मेदार इस्तेमाल पर भी सवाल खड़े किए हैं। अगर किसी खिलाड़ी को जानबूझकर अभद्र या घमंडी दिखाया जाए, तो उसकी सार्वजनिक छवि को नुकसान पहुंच सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, यह वायरल क्लिप ‘बीसीसीआई नमन अवॉर्ड्स 2026’ के दौरान हुई असली बातचीत पर आधारित थी, लेकिन उसमें डबिंग कर उसे बदल दिया गया। असली कार्यक्रम में जब वैभव से बात हुई थी, तब उन्होंने काफी सादगी से अपनी टीम के लिए ट्रॉफी जीतने का लक्ष्य बताया था। उन्होंने कहा था कि टीम की प्रैक्टिस अच्छी चल रही है और सभी खिलाड़ी आत्मविश्वास में हैं।
यानी जहां असल बातचीत में एक युवा खिलाड़ी का संतुलित और विनम्र रवैया दिख रहा था, वहीं नकली वीडियो में उसे गलत तरीके से पेश किया गया।
हर्षा भोगले ने इस मामले में सिर्फ सफाई नहीं दी, बल्कि संबंधित क्रिकेट संस्थाओं और टीम को भी टैग किया। इससे यह साफ है कि वे इस तरह की हरकत को हल्के में नहीं लेना चाहते। यह कदम एक संदेश भी है कि डिजिटल छेड़छाड़ अब सिर्फ ऑनलाइन शरारत नहीं मानी जानी चाहिए।
यह मामला बताता है कि AI और एडिटिंग टूल्स जितने उपयोगी हैं, उतने ही खतरनाक भी हो सकते हैं अगर उनका इस्तेमाल गलत मकसद से किया जाए।
वैभव सूर्यवंशी जैसे युवा खिलाड़ी के लिए यह अनुभव निश्चित ही असहज रहा होगा। लेकिन दूसरी तरफ यह अच्छा भी है कि हर्षा भोगले जैसे सीनियर और भरोसेमंद क्रिकेट आवाज ने तुरंत सच सामने रखा।
इस पूरे मामले से एक साफ सीख मिलती है—सोशल मीडिया पर दिखने वाली हर चीज सच नहीं होती। खासकर जब वीडियो किसी की छवि खराब करने के लिए बनाया गया हो, तो उसे शेयर करने से पहले जांचना जरूरी है। खेल में प्रतिभा जितनी जरूरी है, उतनी ही जरूरी है खिलाड़ियों की गरिमा की रक्षा भी।
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