ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में अक्सर बहस “काम कितना हुआ” और “दावे कितने बड़े हैं” पर टिक जाती है। इसी बीच विधान परिषद में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान सरकार के कामकाज का लंबा लेखा-जोखा रखा। उन्होंने खास तौर पर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, राजस्व, बैंकिंग, खेती-किसानी, गन्ना भुगतान, एथेनॉल और कृषि तकनीक से जुड़े आंकड़े और बातें सामने रखीं।
अर्थव्यवस्था पर सबसे बड़ा दावा: 13 से 36 लाख करोड़
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में उत्तर प्रदेश की जीएसडीपी करीब 13 लाख करोड़ रुपये थी और अब यह बढ़कर 36 लाख करोड़ रुपये हो चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि 2017 के बाद कुछ ही सालों में अर्थव्यवस्था में बड़ा इजाफा हुआ। उनके मुताबिक बिना नया टैक्स लगाए टैक्स चोरी रोककर और राजस्व लीकेज पर नियंत्रण करके सरकार ने आम जनता पर बोझ डाले बिना आय बढ़ाने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की हिस्सेदारी का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि पहले यूपी का हिस्सा घटकर 8 प्रतिशत तक चला गया था, लेकिन अब यह बढ़कर 9.5 प्रतिशत तक पहुंचा है। साथ ही उन्होंने पर कैपिटा इनकम के तीन गुना होने की बात भी कही।
“रेवेन्यू सरप्लस” और वित्तीय अनुशासन की बात
सीएम योगी ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश पिछले कुछ वर्षों से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट के रूप में स्थापित हुआ है। उन्होंने इसे वित्तीय अनुशासन और विकास के संतुलन का नतीजा बताया।
उन्होंने बैंकिंग से जुड़ा एक उदाहरण भी दिया—प्रदेश में पहले 100 रुपये जमा होने पर 43 रुपये ही जनता के उपयोग में आते थे, जिसे बढ़ाकर 61-62 रुपये तक पहुंचाने की बात कही गई। इसका मतलब यह निकाला गया कि कर्ज/फंड का उपयोग अब ज्यादा लोगों और कारोबारियों तक पहुंच रहा है।
खेती पर फोकस: लागत कम, उत्पादन ज्यादा
मुख्यमंत्री का भाषण खेती के हिस्से में भी लंबा रहा। उन्होंने कहा कि 2017 के पहले खेती की कोई स्पष्ट नीति नहीं थी और किसानों को सिर्फ वोट बैंक की तरह देखा गया। उन्होंने “लागत ज्यादा, उत्पादन कम” वाली स्थिति का जिक्र किया और कहा कि बाद में लागत कम करके उत्पादन बढ़ाने की दिशा में काम हुआ।
उन्होंने यह भी कहा कि यूपी के पास देश के कुल कृषि भूभाग का 11 प्रतिशत है, लेकिन खाद्यान्न उत्पादन 21 प्रतिशत है। इसके साथ कृषि विकास दर 8.5 से बढ़कर 18 प्रतिशत के करीब पहुंचने का दावा भी किया।
तकनीक और किसानों तक जानकारी पहुंचाने की बात
सीएम ने बताया कि किसानों को उन्नत बीज, प्राकृतिक खेती, ड्रोन और मौसम/जलवायु से जुड़ी तकनीकी जानकारी सरल भाषा में दी जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कृषि वैज्ञानिकों, स्टार्टअप और प्रगतिशील किसानों के जरिए व्यावहारिक ट्रेनिंग दी जा रही है।
उन्होंने ड्रोन दीदी, एफपीओ, एग्री स्टार्टअप और फूड प्रोसेसिंग जैसी पहलों का जिक्र किया और कहा कि इससे फसलों का मूल्य बढ़ रहा है। साथ ही एक परियोजना के जरिए उत्पादकता और कृषि आधारित उद्योगों की गुणवत्ता सुधारने की बात रखी गई।
पीएम किसान और डीबीटी का जिक्र
भाषण में यह दावा भी आया कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत यूपी के किसानों को बड़ी रकम ट्रांसफर हुई है। साथ ही डीबीटी के जरिए पैसा सीधे खातों में जाने की बात भी कही गई, ताकि बिचौलियों की भूमिका कम हो।
गो-आश्रय, दुग्ध और मत्स्य उत्पादन
मुख्यमंत्री ने गोवंश संरक्षण और गो-आश्रय स्थलों की संख्या भी बताई। उन्होंने कहा कि गो-आश्रय स्थल चल रहे हैं और इनमें बड़ी संख्या में गोवंश संरक्षित हैं। उन्होंने दुग्ध उत्पादन में यूपी को अग्रणी और मत्स्य उत्पादन में बढ़ोतरी की बात भी कही।
गन्ना किसानों का भुगतान और एथेनॉल
सीएम योगी ने गन्ना किसानों के भुगतान को भी प्रमुख उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि 2000 से 2017 के बीच जितना भुगतान हुआ, उसके मुकाबले पिछले साढ़े आठ वर्षों में ज्यादा भुगतान हुआ है।
एथेनॉल सेक्टर में भी बढ़ोतरी का दावा किया गया—एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर तक पहुंचने की बात कही गई। उन्होंने इसे शुगर-एथेनॉल सेक्टर के लिए “एश्योर्ड कैश फ्लो” जैसा बताया।
सिंचाई, इंफ्रास्ट्रक्चर और नए संस्थान
मुख्यमंत्री ने सिंचाई परियोजनाओं, ग्रामीण सड़क नेटवर्क, मंडियों, एक्सप्रेसवे और लॉजिस्टिक पार्क के विस्तार का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की उपज को बाजार तक पहुंचाना आसान हुआ है।
उन्होंने कृषि विज्ञान केंद्रों की संख्या, कुछ जगहों पर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, और भविष्य की योजनाओं का भी जिक्र किया। साथ ही केसीसी के जरिए ऋण स्वीकृति समय घटने और एआई आधारित कृषि प्लेटफॉर्म पर काम होने की बात भी सामने रखी गई।
असली परीक्षा जमीन पर
सीएम के भाषण में आंकड़े और दावे काफी बड़े हैं। लेकिन विपक्ष अक्सर यही सवाल उठाता है कि इन दावों का लाभ अंतिम व्यक्ति तक कितना पहुंचा। सरकार का पक्ष यह है कि नीति, तकनीक और वित्तीय अनुशासन से सुधार हुआ। आने वाले समय में यह बहस और तेज होगी, क्योंकि चुनावी साल में हर दल विकास के दावों को अपने-अपने तरीके से पेश करता है।
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