ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
दिल्ली में ‘नो PUC, नो फ्यूल’ क्यों लागू हुआ?
दिल्ली में सर्दियों के साथ प्रदूषण का लेवल फिर से चिंता बढ़ाने लगा
है। हवा में धुंध, आंखों में जलन और सांस लेने में दिक्कत—ये सब अब आम अनुभव बन गया है।
इसी स्थिति पर लगाम लगाने के लिए दिल्ली सरकार ने ‘नो PUC, नो फ्यूल’ अभियान को पूरी सख्ती के साथ
लागू कर दिया है। नियम साफ है—अगर वाहन के पास वैध PUC (Pollution Under
Control) नहीं है
तो पेट्रोल-डीजल नहीं मिलेगा।
सरकार का मानना है कि अगर वाहन समय पर PUC करवाएं, तो सड़क पर चलने वाले प्रदूषण फैलाने वाले
वाहनों की पहचान और नियंत्रण आसान हो जाएगा। इसी वजह से यह अभियान सिर्फ कागजों की
कार्रवाई नहीं, बल्कि हवा को साफ करने की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।
पहले ही दिन क्या असर दिखा?
इस नियम का असर पहले ही दिन साफ दिख गया। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले 24
घंटों के भीतर
राजधानी में 61 हजार से ज्यादा वाहनों के लिए PUC जारी किए गए। यानी हजारों लोगों ने या तो
नया PUC बनवाया
या पुराना वाला रिन्यू कराया। सरकार का कहना है कि यह अभियान आगे भी इसी तरह जारी
रहेगा।
आंकड़ों पर नजर डालें तो 17 दिसंबर को 29,938 PUC बने और 18 दिसंबर की शाम तक 31,974 PUC सर्टिफिकेट जारी
हुए। इन दोनों को जोड़ें तो करीब एक दिन में 61 हजार से ज्यादा PUC सामने आते हैं।
पेट्रोल पंप पर अब क्या बदल गया है?
इस अभियान का सबसे बड़ा बदलाव पेट्रोल पंपों पर दिख रहा है। ‘नो PUC,
नो फ्यूल’ नियम के
तहत बिना वैध PUC वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं दिया जा रहा। यानी अगर किसी ने PUC
नहीं बनवाया,
तो गाड़ी चलाना
अपने-आप मुश्किल हो जाएगा।
इसके साथ ही सरकार ने यह भी कहा है कि BS-6 मानकों से नीचे के गैर-जरूरी बाहरी वाहनों
के दिल्ली में प्रवेश पर भी सख्ती की गई है। मतलब बॉर्डर पर चेकिंग और नियमों का
पालन अब और कड़ा हो सकता है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने क्या कहा?
दिल्ली सरकार के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार
चार बड़े मोर्चों पर प्रदूषण से लड़ रही है—
उन्होंने दिल्ली-गुरुग्राम बॉर्डर और जनपथ सहित कई पेट्रोल पंपों पर
अचानक पहुंचकर हालात का जायजा भी लिया। मंत्री ने पेट्रोल पंप कर्मियों को निर्देश
दिए कि नियम सख्ती से लागू करें, लेकिन लोगों से शालीनता और शांति से बात करें।
मंत्री का एक बयान खास ध्यान खींचता है—उन्होंने कहा कि यह अभियान
चालान काटने के लिए नहीं, बल्कि लोगों की सेहत बचाने के लिए है। यानी सरकार
यह संदेश देना चाहती है कि उद्देश्य दंड देना नहीं, आदत बदलना है।
कितनों के चालान कटे और कितनों की जांच हुई?
अभियान लागू होने के साथ कार्रवाई भी हुई। रिपोर्ट के मुताबिक इसी
दौरान 3,746 वाहनों का चालान काटा गया, जिनके पास वैध PUC नहीं था।
दिल्ली के सीमावर्ती इलाकों में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग की
संयुक्त टीमों ने करीब 5,000 वाहनों की जांच की। इनमें से 568 गैर-अनुपालक वाहनों
को दिल्ली में प्रवेश नहीं करने दिया गया।
इतना ही नहीं, 217 गैर-जरूरी ट्रकों को ईस्टर्न और वेस्टर्न
पेरिफेरल एक्सप्रेसवे की ओर मोड़ दिया गया, ताकि भारी वाहनों का दबाव दिल्ली के अंदर
कम हो।
धूल और कचरे पर भी एक्शन: सरकार ने क्या-क्या किया?
प्रदूषण सिर्फ गाड़ियों से नहीं आता, धूल और कचरा भी बड़ा कारण है। इसी वजह से
रिपोर्ट में कई दूसरे कदमों का भी जिक्र है।
ये सारे कदम मिलकर यह दिखाते हैं कि सरकार सिर्फ “PUC” तक सीमित नहीं है,
बल्कि कई दिशाओं से
प्रदूषण घटाने की कोशिश कर रही है।
आम लोगों के लिए क्या जरूरी है?
इस अभियान के बीच आम लोगों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि PUC
समय पर
बनवाएं/रिन्यू कराएं और GRAP के नियमों का पालन करें। मंत्री सिरसा ने लोगों
से अपील भी की कि जहां संभव हो, वर्क फ्रॉम होम अपनाएं।
असल में, प्रदूषण की लड़ाई सिर्फ सरकारी टीमों से नहीं जीती जा सकती। नियम तभी
काम करेंगे जब लोग खुद भी सहयोग करें—गाड़ी की सर्विसिंग, PUC समय पर, और जरूरत न हो तो
वाहन कम इस्तेमाल जैसी छोटी बातें भी बड़ा फर्क डाल सकती हैं।
आगे क्या देखने वाली बात है?
पहले दिन के आंकड़े बताते हैं कि सख्ती का असर तुरंत दिखा है। अब
देखने वाली बात यह होगी कि आने वाले दिनों में यह अभियान कितनी लगातार सख्ती के
साथ चलता है और क्या इससे सड़क पर चलने वाले बिना PUC वाहनों की संख्या सच में कम होती है।
दिल्ली की हवा साफ हो—यह सभी की जरूरत है। लेकिन इसके लिए नियम,
निगरानी और लोगों की
भागीदारी—तीनों का साथ चलना जरूरी है।
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