ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच सीमा पर हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। पिछले चार दिनों से दोनों देशों के बीच हवाई हमले और भारी गोलीबारी जारी है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि इसे अब “जंग जैसे हालात” कहा जा रहा है। दोनों पक्ष एक-दूसरे पर पहले हमला करने और भारी नुकसान पहुंचाने के दावे कर रहे हैं।
नूर खान एयरबेस पर हमले का दावा
तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने पाकिस्तान के बेहद संवेदनशील नूर खान एयरबेस को निशाना बनाया है। यह एयरबेस रावलपिंडी में स्थित है और पाकिस्तान की सैन्य दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है।
तालिबान के एक मंत्री ने यह भी कहा कि उनके लड़ाके डूरंड लाइन पार कर पाकिस्तान की सीमा में दाखिल हो चुके हैं। इसके अलावा क्वेटा और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ सैन्य ठिकानों पर हमले किए जाने का दावा भी किया गया है। तालिबान का कहना है कि यह कार्रवाई पाकिस्तान की ओर से काबुल, बगराम और अन्य इलाकों में किए गए हवाई हमलों के जवाब में की गई है।
पाकिस्तान का पलटवार और ‘गजब लिल हक’ ऑपरेशन
पाकिस्तान ने अपने सैन्य अभियान को ‘गजब लिल हक’ नाम दिया है, जिसका अर्थ है – अपने हक के लिए खड़े होना। 27 फरवरी को पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए।
पाकिस्तान के सूचना मंत्री अत्ता उल्लाह तारर के अनुसार, अब तक 415 तालिबान लड़ाके मारे गए हैं और 580 से ज्यादा घायल हुए हैं। इसके अलावा 182 पोस्ट तबाह की गईं, 31 पोस्ट पर कब्जा किया गया और 185 टैंक व सैन्य वाहन नष्ट किए गए। पाकिस्तानी वायुसेना ने दावा किया है कि नंगरहार और कंधार में तालिबान के सैन्य मुख्यालयों को निशाना बनाया गया।
तालिबान का अलग दावा
दूसरी ओर, तालिबान ने पाकिस्तान के दावों को खारिज किया है। उसका कहना है कि उसके केवल 8 से 13 लड़ाके मारे गए हैं और कुछ घायल हुए हैं। तालिबान का दावा है कि उसके हमलों में 55 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए और दो सैन्य मुख्यालयों समेत कई चौकियों पर कब्जा किया गया। तालिबान ने चेतावनी दी है कि अगर पाकिस्तान ने आगे भी हमले जारी रखे तो उसे और कड़ा जवाब दिया जाएगा।
संघर्ष की शुरुआत कैसे हुई?
इस तनाव की शुरुआत 22 फरवरी को हुई, जब पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तान के उप गृह मंत्री तलाल चौधरी ने कहा था कि इन हमलों में TTP (तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान) के कम से कम 70 लड़ाके मारे गए। बाद में पाकिस्तानी अखबार डॉन ने यह संख्या 80 बताई।
पाकिस्तान का आरोप है कि TTP अफगानिस्तान की जमीन से संचालित हो रहा है और वहां की तालिबान सरकार उसे रोकने में नाकाम रही है। हालांकि, तालिबान इन आरोपों से लगातार इनकार करता रहा है। अफगान रक्षा मंत्रालय ने पाकिस्तान की कार्रवाई को देश की संप्रभुता का उल्लंघन बताया और ‘सही समय पर कड़ा जवाब’ देने की चेतावनी दी थी।
सीमा पर जंग जैसे हालात
डूरंड लाइन के आसपास के इलाकों में भारी तनाव है। स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और कई परिवार सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला, तो इससे पूरे क्षेत्र की स्थिरता प्रभावित हो सकती है। दोनों देशों के बीच पहले भी सीमा विवाद और आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं, लेकिन इस बार स्थिति ज्यादा गंभीर दिखाई दे रही है।
आगे क्या?
अभी तक दोनों देशों की ओर से कड़े बयान सामने आ रहे हैं। किसी भी पक्ष ने पीछे हटने के संकेत नहीं दिए हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी हालात पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि दोनों देशों के बीच बढ़ता तनाव क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।
अगर जल्द ही कूटनीतिक समाधान नहीं निकला, तो यह संघर्ष बड़े युद्ध का रूप ले सकता है। फिलहाल सीमा पर गोलीबारी और हवाई हमले जारी हैं, और आम नागरिक इस टकराव की सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं।
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