ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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होर्मुज स्ट्रेट को लेकर जारी तनाव के बीच पश्चिम एशिया की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम करने के लिए लगातार कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। इसी कड़ी में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची मंगलवार (28 अप्रैल) को एक बार फिर पाकिस्तान पहुंचे।
48 घंटे में तीसरी पाकिस्तान यात्रा
अब्बास अराघची की यह यात्रा पिछले 48 घंटों में उनकी तीसरी पाकिस्तान यात्रा बताई जा रही है। इस लगातार यात्रा को क्षेत्रीय कूटनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पाकिस्तान को इस समय ईरान और अमेरिका के बीच एक मध्यस्थ (शांतिदूत) की भूमिका निभाते हुए देखा जा रहा है। पाकिस्तान का मुख्य काम दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान और बातचीत को आगे बढ़ाना बताया जा रहा है।
रूस और ओमान में भी हुई अहम मुलाकातें
पाकिस्तान आने से पहले अराघची ने रूस और ओमान का दौरा भी किया था। रूस में उन्होंने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया के हालात पर विस्तार से चर्चा हुई। अराघची ने बताया कि बैठक में अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी बातचीत हुई।
रूस का समर्थन और शांति की उम्मीद
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने ईरान के साथ बातचीत में कहा कि रूस हमेशा क्षेत्र में शांति और स्थिरता का समर्थन करता है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस ईरान और क्षेत्र के लोगों के हित में हर संभव प्रयास करेगा। पुतिन ने उम्मीद जताई कि ईरान जल्द ही इस कठिन दौर से बाहर निकलेगा और क्षेत्र में शांति स्थापित होगी।
अमेरिका-ईरान बातचीत की कोशिशें
ईरान और अमेरिका के बीच 8 अप्रैल से अस्थायी सीजफायर लागू है। दोनों देशों के बीच 11-12 अप्रैल को पहले दौर की बातचीत भी हुई थी, जो करीब 21 घंटे तक चली, लेकिन कोई अंतिम समाधान नहीं निकल सका। इसके बावजूद दोनों पक्ष तनाव कम करने के लिए बातचीत जारी रखने के पक्ष में हैं।
पाकिस्तान की कूटनीतिक भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक भूमिका निभा रहा है। वह दोनों देशों के बीच संवाद को बनाए रखने में एक मध्यस्थ की तरह काम कर रहा है।
होर्मुज स्ट्रेट और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अब्बास अराघची की लगातार यात्राएं इस बात का संकेत हैं कि कूटनीतिक प्रयास तेज हो गए हैं। पाकिस्तान, रूस और ओमान जैसे देश इस प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। आने वाले समय में इन प्रयासों से क्षेत्र में शांति की उम्मीद जताई जा रही है।
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