अमेरिका-ईरान बातचीत फिर शुरू, ओमान में होगी अहम बैठक, मिसाइल मुद्दे पर मतभेद बरकरार
अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु बातचीत फिर शुरू होने जा रही है। ओमान की राजधानी मस्कट में होने वाली इस अहम बैठक में दोनों देशों के बीच मिसाइल और सुरक्षा मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं।
अमेरिका-ईरान बातचीत फिर शुरू, ओमान में होगी अहम बैठक, मिसाइल मुद्दे पर मतभेद बरकरार
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अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहे तनाव के बीच अब बातचीत का रास्ता साफ होता नजर रहा है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित वार्ता अब ओमान की राजधानी मस्कट में आयोजित होगी। इससे पहले यह बैठक तुर्किये में होने वाली थी, लेकिन आखिरी समय में स्थान बदल दिया गया। माना जा रहा है कि इस बातचीत से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने की दिशा में अहम कदम उठाया जा सकता है।

 

मस्कट में होगी अहम बैठक

ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह महत्वपूर्ण बैठक शुक्रवार सुबह आयोजित होगी। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने खुद इसकी पुष्टि की है। उन्होंने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि अमेरिका के साथ परमाणु मुद्दे पर बातचीत मस्कट में सुबह करीब 10 बजे शुरू होगी। साथ ही उन्होंने इस बैठक को आयोजित कराने के लिए ओमान सरकार का आभार भी जताया।

 

अमेरिकी अधिकारियों ने भी इस बैठक की पुष्टि कर दी है। दोनों देशों के बीच बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ने पहले ही इस इलाके में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है और संकेत दिया है कि अगर बातचीत सफल नहीं हुई तो कड़े कदम उठाए जा सकते हैं।

 

मिसाइल और क्षेत्रीय मुद्दों पर मतभेद

हालांकि बातचीत से पहले ही दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद साफ नजर रहे हैं। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों या क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए तैयार नहीं है। ईरान का कहना है कि बातचीत केवल उसके परमाणु कार्यक्रम तक ही सीमित रहनी चाहिए।

 

दूसरी तरफ अमेरिका चाहता है कि बातचीत का दायरा ज्यादा व्यापक हो। अमेरिका का मानना है कि क्षेत्रीय सुरक्षा, हथियारबंद गुटों को समर्थन और मिसाइल कार्यक्रम जैसे मुद्दों पर भी चर्चा जरूरी है।

 

अमेरिका की शर्तें साफ

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने साफ कहा है कि बातचीत तभी सफल मानी जाएगी जब इसमें कुछ अहम मुद्दों को शामिल किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल प्रणाली, क्षेत्रीय संगठनों को समर्थन और अपने नागरिकों के साथ व्यवहार जैसे विषयों पर बातचीत जरूरी है।

 

रुबियो के इस बयान से साफ हो गया है कि अमेरिका केवल परमाणु समझौते तक सीमित रहना नहीं चाहता, बल्कि वह ईरान की पूरी सुरक्षा और राजनीतिक रणनीति पर चर्चा करना चाहता है।

 

ट्रंप का सख्त रुख

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर कड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि ईरान के सर्वोच्च नेता को स्थिति को लेकर गंभीर चिंता करनी चाहिए। ट्रंप के इस बयान से साफ संकेत मिलता है कि अमेरिका इस मामले में दबाव की नीति अपनाने के पक्ष में है।

 

हालांकि कई अरब और मुस्लिम देशों ने अमेरिका से अपील की थी कि वह बातचीत का रास्ता बंद करे। इसके बाद दोनों देश फिर से बातचीत की मेज पर आने को तैयार हुए हैं।

 

ईरान का रुख स्पष्ट

ईरान लगातार यह कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। ईरान यूरेनियम संवर्धन का अधिकार अपने पास रखना चाहता है और वह अपने यूरेनियम भंडार को देश से बाहर भेजने के लिए तैयार नहीं है।

 

इस बीच रूस ने भी इस मामले में अपनी भूमिका जताई है। रूस का कहना है कि वह यूरेनियम को अपने देश में सुरक्षित रखने का प्रस्ताव अब भी बनाए हुए है।

 

क्या कम होगा तनाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह बैठक दोनों देशों के रिश्तों में सुधार का मौका हो सकती है। अगर बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है तो इससे पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में स्थिरता सकती है। वहीं अगर बातचीत असफल रहती है तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है।

 

अब सबकी नजर शुक्रवार को होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हुई है, जो आने वाले समय में वैश्विक राजनीति और सुरक्षा संतुलन पर बड़ा असर डाल सकती है।

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