ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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बांग्लादेश की राजधानी ढाका के एक बड़े विकास प्रोजेक्ट पूरबाचल न्यू टाउन से जुड़े प्लॉट आवंटन में कथित घोटाले को लेकर देश की अदालत 2 फरवरी 2026 को फैसला सुना रही है। इस मामले में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना, उनकी बहन शेख रेहाना, और उनकी भतीजी तथा ब्रिटिश सांसद ट्यूलिप रिजवाना सिद्धीक समेत कुल 22 आरोपियों पर निर्णय होने वाला है।
यह घोटाला राजधानी उन्नयन कार्ट्रिपक्ष (RAJUK) के एक सरकारी जमीन आवंटन प्रोजेक्ट के साथ जुड़ा है, जहां आरोप है कि आरोपी पक्ष ने कानून और नियमों का उल्लंघन कर स्वयं और अपने परिवार के लोगों के नाम पर सरकारी प्लॉट हड़प लिए। आरोप है कि उन्होंने संबंधित अधिकारियों में प्रभाव डाला और अपना फायदा सुनिश्चित किया।
आरोपों की बुनियाद
इस मामले की जांच एंटी-करप्शन कमिशन (ACC) द्वारा की गई थी, जिसने 13 जनवरी 2025 को चार्जशीट दाखिल की। आरोप है कि कई परिवारिक सदस्यों ने अपनी और अपने बाक़ी परिवार के अन्य लोगों की संपत्तियों के बारे में जानकारी छिपाकर RAJUK के नियमों का उल्लंघन किया और 10 कट्ठा प्लॉट लाभ के लिए हासिल किया।
प्रोसिक्यूटर ने कोर्ट को बताया कि आरोपियों ने शहर में पहले से घर या फ्लैट रखने के बावजूद नए प्लॉट के लिए आवेदन किया और नियमों के विपरीत लाभ हासिल किया। न्यायालय में कम से कम 31 गवाहों ने अपनी गवाही दी, जिसमें कई ने इन गड़बड़ियों का सीधा जिक्र किया।
मुख्य आरोपी कौन-कौन हैं?
इस बड़े मामले में शामिल नामों में शामिल हैं:
• शेख हसीना – बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री और Awami League की प्रमुख
• शेख रेहाना – उनकी बहन
• ट्यूलिप रिजवाना सिद्धीक – ब्रिटिश सांसद और शेख रेहाना की बेटी
• अज़्मिना सिद्धीक – परिवार की एक और सदस्य
• रदवान मुफीज सिद्दीक – शेख रेहाना के बेटे
• अन्य राजकीय अधिकारियों और RAJUK के वरिष्ठ कर्मचारियों के नाम भी आरोपियों की सूची में शामिल हैं।
यह मामला अकेला नहीं है; हसीना और उनके परिवार के खिलाफ कई अन्य भ्रष्टाचार और जमीन आवंटन से जुड़े मामले पहले से ही चल रहे हैं। पिछले फैसलों में उन्हें कुल 26 साल की जेल की सजा भी सुनाई जा चुकी है, जो अन्य मामलों से मिली सजा का योग है।
फैसले से पहले क्या हुआ?
कोर्ट के समक्ष दोनों मामलों की सुनवाई जनवरी 2026 के मध्य में पूरी हो चुकी है, और अंतिम दलीलों के बाद न्यायाधीश रबीउल आलम ने फैसला सुनाने की तारीख 2 फरवरी तय की थी। सुनवाई के दौरान आरोपों को साबित करने के लिए गवाह, सबूत और दस्तावेज़ पेश किए गए। अदालत में दलीलों के दौरान यह भी सामने आया कि कई आरोपी फरार हैं और अनिवार्य रूप से अदालत में पेश नहीं हुए, जिससे उन्हें अपने पक्ष में बहस प्रस्तुत करने का मौका नहीं मिला। ऐसे मामलों में अदालत अक्सर अनुपस्थित में ही फैसला सुनाती है।
क्या पहले भी सजा हो चुकी है?
आगे सुनाए जाने वाले फैसले से पहले ही 1 दिसंबर 2025 को इसी ही तरह के एक मामले में पहले सजा हो चुकी है, जिसमें:
• शेख हसीना को लगभग 5 साल की जेल की सजा
• शेख रेहाना को 7 साल की जेल की सजा
• ट्यूलिप सिद्धीक को 2 साल की जेल की सजा
साथ ही सभी पर जुर्माना भी लगाया गया। इन फैसलों में आरोपियों को अनुपस्थित में ही सजा सुनाई गई थी। अदालत ने उस प्रोजेक्ट के तहत आवंटित प्लॉट को रद्द भी कर दिया, जिससे आरोपियों को कोई लाभ न मिले।
ऐसे काम हुआ कथित गड़बड़ी
आरोप है कि जब RAJUK ने पूरबाचल न्यू टाउन के लिए प्लॉट वितरित करने शुरू किया, तब नियम स्पष्ट थे कि किसी भी व्यक्ति को तभी प्लॉट आवंटित होगा जब उसके नाम पहले से ऐसे कब्जे न हों। मगर जांच में पता चला कि कई आरोपियों ने पहले से ही गुलशन, धनमोंडी जैसे प्राइम लोकल एरिया में घर या फ्लैट होने के बावजूद फर्जी दावा या छुपाई छुपा कर नया प्लॉट हासिल किया।
ACC की जांच रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ आरोपियों ने अपनी ब्रिटेन की संपत्तियों को छुपाकर भी लाभ लिया। कोर्ट के सामने यह दावा भी रहा कि ट्यूलिप ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके अपने और अपने परिवार के अन्य सदस्यों के लिए प्लॉट तय करवाया।
राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव
यह मामला सिर्फ एक भ्रष्टाचार विवाद नहीं है, बल्कि इसका असर बांग्लादेश के राजनीति और समाज पर गहरा है। शेख हसीना जैसे बड़ेnaam को जद में लाने वाला यह मामला यह दर्शाता है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किसी भी शक्तिशाली व्यक्ति से हो सकती है। इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया में लोक विश्वास और न्याय की स्वतंत्रता पर बहस तेज हो गई है।
इसके अलावा, मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखे जा रहे है क्योंकि ट्यूलिप सिद्धीक ब्रिटेन की संसद की सदस्य भी हैं, जिससे यह मामला दोनों देशों में चर्चाओं का विषय बना हुआ है।
आगे क्या संभावनाएं हैं?
2 फरवरी के फैसले के बाद यह साफ होगा कि अदालत अन्य 22 आरोपियों के मामले में क्या सजा देती है। अगर अदालत सख्त सजा देती है, तो यह साबित करेगा कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई सरकार या पार्टी के ऊँचे पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी हो सकती है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका राजनीतिक असर दिखाई देगा।
दूसरी ओर, अगर फैसले में मामूली सजा दी जाती है, तो यह आलोचना का विषय बनेगा और यह प्रश्न भी उठेगा कि क्या शक्तिशाली लोगों पर न्याय सही ढंग से लागू होता है या नहीं।
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