ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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विश्व की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन इन दिनों एक बड़े सैन्य और राजनीतिक घमासान के बीच मजबूर महसूस कर रहा है। हाल ही में चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) की सबसे ऊँची कमान में शामिल एक वरिष्ठ अधिकारी जनरल झांग योउशिया को पद से हटाकर गंभीर भ्रष्टाचार और नियम-कानून उल्लंघन के आरोपों के तहत जांच के दायरे में लाया गया है।
यह मामला सिर्फ एक अधिकारी का हटना नहीं है, बल्कि चीनी सेना और सत्ता के शीर्ष तंत्र में चल रही व्यापक सफाई अभियान और राजनीतिक उठापटक का संकेत देता है। इस पूरे घटनाक्रम से न केवल चीन में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान आकर्षित हुआ है, क्योंकि इसका असर वैश्विक सुरक्षा, सैन्य तैयारियों और राजनीतिक संतुलन पर पड़ सकता है।
जनरल झांग योउशिया—कौन थे और क्यों थे महत्वपूर्ण?
जनरल झांग योउशिया चीन की मिलिट्री कमान यानी सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC) के उपाध्यक्ष थे, जो देश की सेना का सबसे ऊँचा सैन्य निर्णय-निर्माण निकाय है। यह पद राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद सेना के संचालन-प्रभाव पर सबसे ज़्यादा प्रभाव रखने वाला स्थान माना जाता है।
झांग को लंबे समय तक शी जिनपिंग का करीबी सहयोगी माना जाता रहा है और उनके नेतृत्व में सैन्य नीति-निर्माण और रणनीतिक निर्णयों का बड़ा हाथ माना जाता था। वे पीएलए के सबसे वरिष्ठ और अनुभववान जनरलों में से एक थे जिनके पास सीमा संघर्ष और युद्ध-अनुभव भी था।
इसीलिए जब उनके खिलाफ भ्रष्टाचार और गंभीर अनुशासन उल्लंघन के आरोप लगे और उन्हें पद से हटाया गया तो यह चीन के शीर्ष नेतृत्व में बड़ी हलचल के रूप में देखा जा रहा है।
क्या आरोप लगे हैं?
झांग योउशिया पर लग रहे आरोप बहुत गंभीर हैं। आधिकारिक बयान के अनुसार, उन्हें “गंभीर अनुशासन और कानून के उल्लंघन” के संदेह में जांच के दायरे में लाया गया है — यह शब्द चीन में आमतौर पर भ्रष्टाचार के लिए इस्तेमाल किया जाता है।
इसके अलावा कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा जा रहा है कि झांग पर न्यूक्लियर हथियारों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी को विदेशी एजेंसियों, खासकर अमेरिका को लीक करने के आरोप भी सामने आए हैं — हालांकि इन आरोपों का आधिकारिक रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
इन आरोपों में यह भी शामिल है कि उन्होंने अपने कुछ सहयोगियों और परिवार के सदस्यों को अनुचित पदोन्नति या लाभ दिलाने के लिए रिश्वत स्वीकार की तथा सैन्य खर्च और नियुक्तियों में गड़बड़ी की।
क्या जांच चल रही है और क्यों यह बड़ी बात है?
चीन की रक्षा मंत्रालय और सत्तारूढ़ चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) ने दोनों ही अफसरों के खिलाफ जांच की घोषणा की है। यह सिर्फ झांग ही नहीं, बल्कि लियू झेनली जैसे अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ भी जांच का हिस्सा है।
चीन में आमतौर पर शक्ति के साथ जुड़े लोगों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं, लेकिन ऐसे उच्च स्तर के मिलिट्री कमांडर पर इतनी गंभीर जांच काफी असामान्य है। इसे बहुत से विशेषज्ञ शी जिनपिंग के व्यापक भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का हिस्सा मानते हैं, जिसे उन्होंने 2012 से मजबूत ढंग से आगे बढ़ाया है।
यह भी कहा जा रहा है कि इस कदम का मकसद सैन्य कमान में अनुशासन और जवाबदेही को मजबूती से लागू करना है ताकि सेना के फैसले-नीति-निर्माण में पारदर्शिता बढ़ सके और किसी भी तरह के भ्रष्टाचार का जड़ से खात्मा हो सके।
चीन की सैन्य नेतृत्व में खाली जगह और असर
जनरल झांग जैसे वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी का अचानक हटना PLA और CMC जैसे मुख्य सैन्य निकायों में खामियों को उजागर करता है। इससे चीन की सैन्य नेतृत्व प्रणाली में खाली जगहें बनती हैं और अनुभव की कमी भी सामने आती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि चीन की सेना पहले से ही ताइवान, दक्षिण चीन सागर और इंच-अंचल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अपनी स्थिति पर ध्यान दे रही है। ऐसे समय पर शीर्ष नेतृत्व में उथल-पुथल यह दर्शाती है कि सैन्य रणनीति-निर्णय प्रणाली पर बड़े-बड़े प्रश्न उठ सकते हैं। इसके अलावा यह मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता का विषय है, क्योंकि चीन की सैन्य तैयारियां और निर्णय-निर्माण वैश्विक राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करते हैं।
आलोचना और विशेषज्ञों की राय
कुछ विश्लेषक यह भी मानते हैं कि चीन में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान का उपयोग राजनीतिक खेमों के बीच शक्ति संघर्ष के लिए किया जा रहा है। ऐसे मामलों में अक्सर यह देखा गया है कि उच्च पदस्थ अधिकारी पर आरोप लगाकर उन्हें हटाया जाता है जिससे सत्ता ढांचे को एक-तरफा बनाया जा सके।
दूसरे विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कदमों से न केवल सेना की कार्यक्षमता पर असर पड़ सकता है, बल्कि नीतियों के स्पष्ट और निष्पक्ष निर्णय की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है।
अंतरराष्ट्रीय प्रभाव: अमेरिका और दुनिया की प्रतिक्रिया
चीन की सेना में इस प्रकार की सफाई और शीर्ष नेतृत्व में बदलाव अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा समुदाय के लिए चिंता का विषय रहा है। अमेरिका समेत कई देश इस बदलाव को PLA के भीतर अस्थिरता और पारदर्शिता की कमी के रूप में देख रहे हैं।
विशेषज्ञ कहते हैं कि यह कदम चीन की सैन्य क्षमता-निर्माण में न केवल भ्रष्टाचार जैसी समस्याओं पर टिप्पणी करता है, बल्कि रणनीतिक समझौते, संचार और निर्णय-निर्माण क्षमता पर भी असर डाल सकता है, खासकर जब क्षेत्रीय तनाव बढ़ रहे हैं।
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