ईरान पर हमलावर, अमेरिका पर खामोश: सऊदी के दो चेहरों की कहानी!
कतर पर ईरान के मिसाइल हमले के बाद सऊदी अरब ने तीखी निंदा की, लेकिन अमेरिका द्वारा ईरान पर बमबारी को लेकर चुप रहा। दो बयानों में सामने आ गई सऊदी की असली रणनीति और झुकाव।
ईरान पर हमलावर, अमेरिका पर खामोश: सऊदी के दो चेहरों की कहानी!
  • Category: विदेश

मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव एक नई करवट ले चुका है। ईरान और इज़राइल के बीच छिड़ी जंग में अब अमेरिका और अरब देशों की भूमिकाएं भी खुलकर सामने आने लगी हैं।

दरअसल, बीते दिनों अमेरिका ने ईरान के तीन न्यूक्लियर ठिकानों को बमबारी से तबाह कर दिया था।

इस हमले को लेकर जहां दुनिया भर में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं, वहीं सऊदी अरब ने बड़ी सतर्कता से सिर्फ 'चिंता' जताई।

लेकिन जैसे ही ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइलें दागीं, सऊदी की भाषा और तेवर पूरी तरह बदल गए।

अब सवाल उठ रहा है, क्या सऊदी अरब अमेरिका के साथ खड़ा है, और ईरान को चेतावनी देकर अपने रिश्तों की सच्चाई दिखा रहा है?


ईरान का जवाबी हमला, कतर में मची हलचल

23 जून की रात ईरान ने अमेरिका पर जवाबी कार्रवाई करते हुए कतर स्थित अल-उदीद एयरबेस पर एक साथ 19 मिसाइलें दागीं।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इनमें से 18 मिसाइलों को अमेरिकी डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया। ये वही एयरबेस है जहां अमेरिका की सेंट्रल कमांड का बड़ा हिस्सा तैनात है।

हमले के बाद कतर के नागरिकों में हड़कंप मच गया। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी सऊदी अरब की प्रतिक्रिया।


सऊदी अरब का दोहरा रवैया, अमेरिका पर चुप्पी, ईरान पर भड़ास

ईरान-इज़राइल जंग की शुरुआत में जब अमेरिका ने 21 जून को ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर बम गिराए, तब सऊदी अरब ने बेहद नपे-तुले शब्दों में बयान देते हुए सिर्फ "चिंता" जाहिर की।

लेकिन जैसे ही ईरान ने अमेरिका के खिलाफ जवाबी हमला कतर में किया, सऊदी अरब ने तीखी निंदा करते हुए इसे 'अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन' और 'गैर-जिम्मेदाराना हरकत' करार दे दिया।

सऊदी विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि इस हमले से कतर की संप्रभुता और पड़ोसी देशों के बीच रिश्तों को नुकसान पहुंचा है।

बड़ी बात ये है कि सऊदी ने इस पूरे घटनाक्रम में एक बार भी अमेरिका का नाम नहीं लिया, जबकि अमेरिका ही इस जवाबी हमले की मूल वजह था।


कतर ने भी जताई नाराजगी, ईरान को दी चेतावनी

कतर ने ईरान के इस मिसाइल हमले को अपनी संप्रभुता और एयर स्पेस का सीधा उल्लंघन बताया।

कतर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता माजेद अल-अंसारी ने कहा कि ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने ये हमला कर के गंभीर गलती की है और कतर के पास जवाब देने का पूरा हक है।

उन्होंने कहा कि कतर का डिफेंस सिस्टम सतर्क था और हमले को नाकाम कर दिया गया। वहीं, कतर का रुख भी अब काफी हद तक स्पष्ट है, कि वो अमेरिका का सहयोगी है और ईरान की हरकतें उसे स्वीकार्य नहीं हैं।


ईरान ने दी सफाई, कतर को बताया 'भाई'

हालांकि ईरान ने इस पूरे हमले पर सफाई दी है। ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने बयान जारी कर कहा कि मिसाइलें आवासीय इलाकों से दूर गिरीं और ये कार्रवाई अमेरिका के खिलाफ थी, कतर के खिलाफ नहीं।

ईरान ने ये भी कहा कि वो कतर को "दोस्त और भाईचारे वाला देश" मानता है और उसके साथ ऐतिहासिक रिश्तों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन सऊदी और कतर की नाराज़गी के बाद, ये सफाई कहीं से भी असरदार नहीं लग रही।


सऊदी की चुप्पी से झलका अमेरिकी झुकाव

सऊदी अरब की प्रतिक्रिया को लेकर मध्य पूर्व के विश्लेषकों का कहना है कि ये एक रणनीतिक चुप्पी है।

अमेरिका के द्वारा ईरान पर बमबारी के समय सऊदी सिर्फ चिंता जता कर निकल गया, जबकि जवाबी हमले पर फौरन गुस्सा जाहिर करना बताता है कि सऊदी किसी भी कीमत पर अमेरिका से दूरी नहीं बनाना चाहता।

कतर के लोग खतरे में थे, लेकिन उनकी चिंता की असल जड़, अमेरिका की कार्रवाई, को सऊदी ने बिल्कुल नजरअंदाज कर दिया।


पुरानी तनातनी और नई दोस्ती

याद दिला दें कि ईरान और सऊदी के रिश्ते ऐतिहासिक रूप से तनावपूर्ण रहे हैं। हालांकि बीते सालों में चीन की मध्यस्थता से दोनों देशों ने संबंध सुधारने की कोशिश की थी।

लेकिन मौजूदा घटनाएं फिर से उनके बीच विश्वास की कमी और राजनीतिक दूरी को उजागर करती हैं।

सऊदी का ये बर्ताव संकेत देता है कि वो अमेरिका के साथ खड़ा रहने को प्राथमिकता देगा, भले ही ये उसे क्षेत्रीय पड़ोसियों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर क्यों न करे।


सऊदी का असली चेहरा सामने आया!

23 जून की रात कतर पर हुए हमले ने मध्य पूर्व की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब साफ हो गया है कि सऊदी अरब की प्राथमिकताएं अमेरिका से तय होती हैं, और ईरान के साथ उसकी दोस्ती की बातें सिर्फ कागज पर ही सजी थीं।

अमेरिका पर एक शब्द न बोलना और ईरान को चेतावनी देना, ये सिर्फ एक कूटनीतिक संतुलन नहीं, बल्कि सऊदी के 'दिल की बात' है, जो अब सबके सामने है।

बहरहाल, आप क्या सोचते हैं इस खबर को लेकर, अपनी राय हमें नीचे कमेंट्स में जरूर बताएँ।

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