ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में एक बड़ा दावा किया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। ट्रंप का कहना है कि वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने वाली सैन्य कार्रवाई में अमेरिकी सेना ने एक रहस्यमयी हथियार का इस्तेमाल किया था, जिसका नाम उन्होंने “डिसकॉम्बोबुलेटर” बताया। उनके मुताबिक, इस गुप्त हथियार ने वेनेजुएला के डिफेंस सिस्टम और तकनीकी उपकरणों को निष्क्रिय कर दिया, जिससे अमेरिकी सेना को बिना किसी बड़ी हानि के ऑपरेशन पूरा करने में मदद मिली।
क्या है ‘डिसकॉम्बोबुलेटर’?
ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि जिस गुप्त हथियार को उन्होंने “डिसकॉम्बोबुलेटर” नाम दिया है, उसके बारे में वह विस्तार से बात नहीं कर सकते क्योंकि यह संवेदनशील जानकारी है। उन्होंने कहा, “मुझे इसके बारे में बात करने की अनुमति नहीं है।”
हालांकि, विशेषज्ञ बताते हैं कि फिलहाल “डिसकॉम्बोबुलेटर” नाम का कोई आधिकारिक या मान्यता प्राप्त हथियार मौजूद नहीं है। यह नाम शायद मौजूदा तकनीकों और उपकरणों के मिश्रण को बताने के लिए इस्तेमाल किया गया हो, जिनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक युद्ध या साइबर ऑपरेशनों में किया जाता है।
कुछ रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यह शब्द इलेक्ट्रॉनिक, साइबर और ध्वनि (Sonic) तकनीकों के संयोजन का प्रतीक हो सकता है, जिससे विरोधी सेना की संचार, रडार और रक्षा प्रणालियाँ बाधित हो जाती हैं।
मादुरो को पकड़ने वाली कार्रवाई
इस ऑपरेशन को जनवरी 2026 की शुरुआत में अंजाम दिया गया था। अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला की राजधानी काराकास में एक गुप्त अभियान चलाया, जिसमें राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी सिसिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर लिया गया। ट्रंप का दावा है कि ‘डिसकॉम्बोबुलेटर’ ने वेनेजुएला के रक्षा उपकरणों को निष्क्रिय कर दिया, जिससे वे अपने हथियार या मिसाइल सिस्टम का इस्तेमाल नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि शत्रु ने बटन दबाए, लेकिन कुछ भी काम नहीं किया।
ट्रंप का बयान और प्रतिक्रिया
ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका के पास ऐसे कई उन्नत हथियार हैं, जिनके बारे में दुनिया को ज्यादा जानकारी नहीं है। उनका यह बयान अंतरराष्ट्रीय मंच पर चर्चा और चिंता का विषय बन गया है। ट्रंप ने कहा कि वेनेजुएला सरकार के खिलाफ कार्रवाई का मकसद नशा तस्करी, आतंकवाद और हथियारों से जुड़े मामलों को खत्म करना था। इस अभियान में वे नहीं चाहते थे कि किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान पहुंचे, और उन्होंने दावा किया कि यह लक्ष्य पूरा हुआ।
विशेषज्ञों का मत: क्या वास्तव में ऐसा हथियार है?
डिफेंस विशेषज्ञों और विश्लेषकों का कहना है कि “डिसकॉम्बोबुलेटर” नाम का कोई आधिकारिक तकनीकी सिस्टम मौजूद नहीं है। वे मानते हैं कि ट्रंप या उनके सैन्य सलाहकारों ने इन तकनीकों को एक साधारण और रहस्यमयी शब्द के पीछे छुपाया होगा।
एक विशेषज्ञ ने बताया कि हो सकता है कि यह नाम साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की बाधा और कभी-कभी ध्वनि आधारित तकनीकें का संयोजन हो, जो अस्थायी रूप से विरोधी प्रणालियों को बंद कर सकती हैं। ध्वनि आधारित हथियार पहले भी भीड़ नियंत्रण और सैनिकों को भ्रमित करने के लिए उपयोग किए जाते रहे हैं, लेकिन इनका विस्तृत उपयोग युद्ध की परिस्थितियों में सीमित रहा है।
कैसे काम कर सकता है यह हथियार?
अगर हम विशेषज्ञों की बात मानें, तो “डिसकॉम्बोबुलेटर” जैसा कोई गुप्त हथियार सीधे तौर पर अस्तित्व में नहीं है। परंतु वे कहते हैं कि अमेरिका के पास इलेक्ट्रॉनिक युद्ध और साइबर टूल्स की एक बड़ी श्रृंखला है।
इन तकनीकों में शामिल हैं:
1. साइबर हमले जो रडार, संचार और सिस्टम को बंद कर सकते हैं।
2. इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीकें जो GPS, रडार और सेंसर को ब्लॉक कर सकती हैं।
3. ध्वनि-आधारित सिस्टम, जो विरोधी पक्ष के सैनिकों को भ्रमित या असहज कर सकते हैं।
इन सभी का संयोजन एक ऐसे प्रभाव जैसा दिख सकता है जैसे कि कोई “गुप्त हथियार” काम कर रहा है, जबकि असल में यह कई तकनीकों का मिश्रण हो सकता है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति पर असर
ट्रंप की इस घोषणा से दुनिया भर में सेना और सुरक्षा विशेषज्ञों के बीच बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे अमेरिका की सैन्य क्षमता का संकेत मान रहे हैं, जबकि अन्य इसे राजनीतिक दाढ़ा बयान बता रहे हैं। कुछ देशों ने इसे चिंता का विषय बताया है कि यदि अमेरिका के पास ऐसी उन्नत तकनीकें हैं, तो भविष्य में उनका उपयोग कैसे और कहां हो सकता है।
मादुरो का भविष्य
निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अमेरिकी धरातल पर लाया गया है और उन पर नारको-आतंकवाद और हथियारों से जुड़े आरोप लगाए गए हैं। अब उन्हें अमेरिका में मुकदमा सामना करना है। इन घटनाओं ने वेनेजुएला की राजनीति को भी बदल दिया है, क्योंकि वहाँ नए नेतृत्व ने जिम्मेदारी संभाली है और भविष्य में अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों पर असर पड़ेगा।
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