ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित ‘लक्षित हत्या’ के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भूचाल आ गया है। भारत में भी इस घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम की कड़ी निंदा करते हुए इसे अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के खिलाफ बताया है।
कांग्रेस ने जताई संवेदना और उठाए सवाल
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक बयान में ईरान के लोगों और दुनिया भर के शिया समुदाय के प्रति संवेदनाएं व्यक्त कीं। पार्टी ने कहा कि किसी भी देश के मौजूदा राष्ट्राध्यक्ष की लक्षित हत्या अंतरराष्ट्रीय नियमों और संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना के खिलाफ है। कांग्रेस का मानना है कि ऐसी कार्रवाई वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है।
पार्टी ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए कहा कि भारत की विदेश नीति हमेशा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और सभी देशों की समानता पर आधारित रही है।
‘वसुधैव कुटुंबकम’ और गुटनिरपेक्षता का जिक्र
कांग्रेस ने कहा कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष भारत की उस परंपरा के विपरीत है, जो ‘वसुधैव कुटुंबकम’ और महात्मा गांधी की अहिंसा की नीति से प्रेरित है। साथ ही, प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की गुटनिरपेक्षता की नीति का भी उल्लेख किया गया, जिसमें किसी भी वैश्विक शक्ति ब्लॉक से दूरी बनाए रखने और शांति को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि ईरान और वेनेजुएला जैसे देशों में सरकारों को अस्थिर करने के लिए ताकत का इस्तेमाल करना ‘सरकार बदलने की पुरानी नीति’ का पुनर्जन्म है। यह संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और 2(7) का उल्लंघन है, जो किसी देश की संप्रभुता और आंतरिक मामलों में दखल से रोकता है।
अमेरिका और इजरायल ने दी पुष्टि
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी सरकारी मीडिया ने अयातुल्ला खामेनेई की मौत की पुष्टि की है। रिपोर्ट्स के अनुसार, हमले में उनके परिवार के कई सदस्य भी मारे गए हैं। ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता की मौत पर 40 दिनों के सार्वजनिक शोक की घोषणा की है।
अमेरिका ने इस सैन्य कार्रवाई को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है, जबकि इजरायल ने इसे ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ कहा है। शनिवार को शुरू हुए इन हमलों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है।
ईरान की जवाबी कार्रवाई और बढ़ता तनाव
ईरान ने इस हमले का बदला लेने की कसम खाई है और ‘सबसे विनाशकारी हमला’ करने की चेतावनी दी है। ईरानी मीडिया के अनुसार, ईरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैनिकों वाले 27 ठिकानों को निशाना बनाया है। इसके अलावा तेल अवीव पर भी हमले की खबरें सामने आई हैं।
संयुक्त अरब अमीरात के दुबई, कतर की राजधानी दोहा, बहरीन और कुवैत जैसे देशों से भी हमलों की खबरें आई हैं। ईरान का कहना है कि वह क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है।
खामेनेई का लंबा कार्यकाल
अयातुल्ला खामेनेई ने 1989 में क्रांति के संस्थापक रुहोल्ला खोमैनी के निधन के बाद सर्वोच्च नेता का पद संभाला था। उनका कार्यकाल पश्चिमी प्रभाव के खिलाफ कड़े रुख और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका के लिए जाना जाता है। उनकी मौत के बाद ईरान की आंतरिक राजनीति और क्षेत्रीय समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
यह पूरा घटनाक्रम न केवल पश्चिम एशिया बल्कि पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। कांग्रेस ने जहां अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता की बात उठाई है, वहीं क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक शांति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
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