ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल के स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में एक चौंकाने वाला दावा किया है। उनके मुताबिक उन्होंने भारत-पाकिस्तान के बीच बड़े सैन्य संघर्ष को रोककर लाखों लोगों की जान बचाई। ट्रंप ने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने उनसे बताया कि अगर वे हस्तक्षेप नहीं करते तो ऑपरेशन सिंदूर के दौरान लगभग 3.5 करोड़ लोग मौत के कगार पर पहुंच जाते।
क्या कहा ट्रंप ने अपने भाषण में?
ट्रंप ने कांग्रेस के संयुक्त सत्र को सम्बोधित करते हुए कहा कि पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव इतने गंभीर हो गए थे कि परमाणु युद्ध भी हो सकता था। उनके अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के कारण करोड़ों लोगों की जान खतरे में थी और अगर वे समय पर दखल नहीं देते तो बहुत बड़ा जनसंहार हो सकता था।
ट्रंप ने कहा, “मेरे पहले 10 महीनों में, मैंने आठ युद्ध रोक दिए… पाकिस्तान और भारत के बीच परमाणु युद्ध हो सकता था… 3.5 करोड़ लोग मरते अगर मैं हस्तक्षेप नहीं करता।” उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने दुनिया भर में कई संघर्षों को समाप्त करने में भूमिका निभाई है, जिनमें भारत-पाकिस्तान का तनाव भी शामिल है।
ऑपरेशन सिंदूर का संदर्भ क्या है?
ऑपरेशन सिंदूर मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच चार दिनों तक चले सैन्य तनाव का नाम है। यह संघर्ष पहलगाम में एक आतंकवादी हमले के बाद शुरू हुआ, जिसमें कई नागरिक मारे गए थे। इसके जवाब में भारत ने आतंकवादी ढांचे पर निशाना साधने के लिए एयर और जमीनी कार्रवाई की थी।
इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी हमले किए, जिसने दोनों देशों के बीच तनाव को और बढ़ा दिया। हालांकि अंततः युद्धविराम समझौता हुआ और भयंकर स्थिति टल गई।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अमेरिका की भूमिका पर मतभेद
ट्रंप बार-बार दावा कर रहे हैं कि अमेरिका ने इस संघर्ष को रोकने में अहम भूमिका निभाई। पर भारत की तरफ से यह दावा खारिज किया जा चुका है। भारत का कहना है कि युद्धविराम समझौता सीधे दोनों पक्षों के बीच बातचीत का नतीजा था और किसी तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप की ज़रूरत नहीं पड़ी। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा था कि अमेरिका का कोई वास्तविक मध्यस्थता नहीं थी और दोनों सेनाओं के प्रमुखों ने हॉटलाइन के ज़रिये समझौता किया।
इसलिए ट्रंप के दावों पर कूटनीतिक मतभेद मौजूद हैं और यह हर बार भारत-पाकिस्तान की सीधे बातचीत पर आधारित युद्धविराम की कहानी से अलग दिखते हैं।
तुलना और विवादित बयान
ट्रंप ने यह दावा सिर्फ एक बार नहीं बल्कि कई बार दोहराया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान संघर्ष को हल किया और बड़ा युद्ध टाला। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बताया था कि लाखों लोग नहीं मरते अगर वे बीच में आ जाते।
लेकिन आलोचक और विश्लेषक इस बयान को अति-उल्लेख या अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का प्रचार मान रहे हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध, ईरान तनाव, और अन्य संघर्षों में भी ट्रंप ने बड़े दावे किए हैं कि उन्होंने विश्व शांति में भूमिका निभाई है।
क्या सच में 3.5 करोड़ लोग मरते?
ट्रंप का यह आंकड़ा बहुत बड़ा और विवादित माना जा रहा है। यह स्पष्ट नहीं है कि यह संख्या वास्तविक सैन्य आंकड़ों पर आधारित है या किसी राजनीतिक बयान का हिस्सा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऑपरेशन सिंदूर जैसा संघर्ष वैश्विक चिंता का विषय था, लेकिन किसी संघर्ष में आम तौर पर 3.5 करोड़ लोग मरने जैसा अनुमान बड़ा और अतिरंजित लगता है।
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन भाषण में एक बड़ा दावा किया है कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान के ऑपरेशन सिंदूर को टालकर 3.5 करोड़ लोगों की जान बचाई। पर भारत की तरफ से यह दावे बार-बार खारिज किए जा चुके हैं, और माना जाता है कि युद्धविराम दोनों पक्षों के बीच सीधे सैन्य बातचीत का परिणाम था, न कि किसी थर्ड-पार्टी हस्तक्षेप का।
Comments (0)
No comments yet. Be the first to comment!