ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बड़ा बयान सामने आया है। ट्रंप ने कहा है कि अगर ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई अमेरिका की मांगों के साथ सहयोग नहीं करते हैं, तो उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया जा सकता है। एक रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप का मुख्य जोर इस बात पर है कि ईरान अपने परमाणु हथियार कार्यक्रम को पूरी तरह छोड़ दे। अगर तेहरान ऐसा करने से इनकार करता है, तो अमेरिका और उसके सहयोगी देश कड़ा कदम उठा सकते हैं।
परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ा तनाव
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव बना हुआ है। अमेरिका का आरोप है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में काम कर रहा है, जबकि ईरान इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अगर ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद नहीं किया, तो क्षेत्र में सुरक्षा के लिए खतरा बढ़ सकता है। इसी वजह से अमेरिका लगातार दबाव बना रहा है कि ईरान इस कार्यक्रम को पूरी तरह समाप्त करे।
नए सुप्रीम लीडर से नाराज ट्रंप
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप ने ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की नियुक्ति पर भी नाराजगी जताई है। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि वे इस फैसले से खुश नहीं हैं और उन्हें नहीं लगता कि मुजतबा खामेनेई लंबे समय तक शांति से रह पाएंगे। ट्रंप का मानना है कि ईरान के नेतृत्व में बदलाव के बाद भी उसकी नीतियों में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं दिखाई दे रहा है।
पिता की मौत के बाद बने नए नेता
मुजतबा खामेनेई ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के बेटे हैं। रिपोर्ट के अनुसार जंग की शुरुआत में हुए एक एयरस्ट्राइक में अली खामेनेई की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान की सत्ता संरचना में तेजी से बदलाव हुए और मुजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया।
हालांकि यह फैसला विवादों में भी रहा क्योंकि कई रिपोर्ट्स में कहा गया कि अली खामेनेई अपनी वसीयत में अपने बेटे को उत्तराधिकारी नहीं बनाना चाहते थे।
IRGC की भूमिका पर उठे सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की ताकतवर सैन्य इकाई इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मुजतबा खामेनेई को सत्ता में आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। बताया जाता है कि मुजतबा ने पहले कभी कोई बड़ा सरकारी पद नहीं संभाला था, लेकिन वे लंबे समय से सत्ता के अंदरूनी दायरे में सक्रिय थे। कई रिपोर्ट्स में उन्हें “पर्दे के पीछे की असली ताकत” भी बताया गया है।
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में बढ़ सकता है तनाव
ट्रंप के ताजा बयान के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच पहले से ही टकराव की स्थिति बनी हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर परमाणु कार्यक्रम को लेकर कोई समझौता नहीं होता है, तो आने वाले समय में क्षेत्र में संघर्ष और गहरा हो सकता है। ऐसे में पूरी दुनिया की नजर अब अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है।
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