ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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नेपाल सरकार ने चीन से भोटे कोशी नदी के किनारे बन रही सुरक्षा दीवार के निर्माण को तुरंत रोकने की मांग की है। नेपाल का कहना है कि यह निर्माण नदी के प्राकृतिक प्रवाह को बदल सकता है, जिससे उसके क्षेत्र में गंभीर नुकसान हो सकता है। इस मुद्दे ने नेपाल और चीन के बीच एक नया कूटनीतिक तनाव पैदा कर दिया है।
स्थानीय प्रशासन की शिकायत से शुरू हुआ मामला
यह मामला सबसे पहले सिंधुपालचौक जिले के प्रशासन कार्यालय द्वारा उठाया गया था। लगभग दो हफ्ते पहले स्थानीय लोगों ने प्रशासन को सूचना दी कि सीमा के पास चीन की ओर भारी मशीनों से निर्माण कार्य चल रहा है। यह निर्माण नेपाल-चीन अंतरराष्ट्रीय सीमा के बेहद करीब, पिलर नंबर 53 के पास हो रहा है।
नेपाल की आपत्ति क्या है?
नेपाल का कहना है कि इस दीवार के निर्माण से नदी का रास्ता बदल सकता है। इसके कारण नेपाल की ओर भूमि कटाव और मानसून के दौरान बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। नेपाल ने यह भी कहा है कि 1963 के सीमा प्रोटोकॉल के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर किसी भी निर्माण से पहले दूसरे पक्ष को सूचित करना जरूरी होता है। लेकिन चीन की ओर से कोई पूर्व जानकारी या सहमति नहीं ली गई।
सरकार और मंत्रालयों की कार्रवाई
स्थानीय प्रशासन की रिपोर्ट के बाद नेपाल गृह मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय से इस मामले पर जानकारी मांगी। इसके बाद विदेश मंत्रालय ने चीनी पक्ष को पत्र लिखकर निर्माण कार्य रोकने की मांग की है। नेपाल सरकार का कहना है कि इस तरह के एकतरफा निर्माण से सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय समझौते प्रभावित हो सकते हैं।
बाढ़ और सुरक्षा का खतरा
नेपाल ने चिंता जताई है कि इस दीवार के कारण भोटे कोशी नदी का प्राकृतिक बहाव बदल सकता है। इससे नदी किनारे बसे इलाकों में भारी बाढ़ और भूमि कटाव का खतरा पैदा हो सकता है। जुलाई 2025 में इसी क्षेत्र में आई बाढ़ में मैत्री पुल भी बह गया था, जिससे नेपाल-चीन संपर्क प्रभावित हुआ था।
चीन का पक्ष और नेपाल की चिंता
चीन ने इस निर्माण को बाढ़ सुरक्षा के लिए बनाया जा रहा ढांचा बताया है, लेकिन नेपाल इसे अपनी संप्रभुता और सुरक्षा के लिए खतरा मान रहा है। नेपाल का कहना है कि सीमावर्ती नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बदलने से दोनों देशों के लिए जोखिम पैदा हो सकता है।
भोटे कोशी नदी किनारे बन रही सुरक्षा दीवार को लेकर नेपाल और चीन के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। नेपाल इसे पर्यावरण और सुरक्षा के लिए खतरा बता रहा है, जबकि चीन इसे बाढ़ नियंत्रण परियोजना कह रहा है। अब इस मामले पर दोनों देशों की कूटनीतिक बातचीत पर नजर बनी हुई है।
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