ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच शांति वार्ता को लेकर कई देशों की भूमिका चर्चा में है। हाल के दिनों में पाकिस्तान का नाम भी लगातार सामने आ रहा है। खबरों के अनुसार, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ईरान के साथ संपर्क बनाए हुए हैं। हालांकि, इन सबके बीच मध्य पूर्व का एक और देश मिस्र चुपचाप लेकिन सक्रिय रूप से शांति स्थापित करने की कोशिशों में जुटा हुआ है। मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल-फतह अल-सीसी ने हाल ही में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ क्षेत्रीय हालात पर विस्तृत चर्चा की। इस बातचीत के दौरान उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर मिस्र की भूमिका पर भी प्रकाश डाला।
शांति समझौते के लिए प्रयासरत है मिस्र
राष्ट्रपति अल-सीसी ने कहा कि मिस्र लगातार विभिन्न देशों और संबंधित पक्षों के संपर्क में है ताकि अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक और स्थायी समझौता हो सके। उनका मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और कूटनीति सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मिस्र की विदेश नीति अंतरराष्ट्रीय कानून, देशों की संप्रभुता और उनके संसाधनों के सम्मान के सिद्धांतों पर आधारित है। मिस्र चाहता है कि सभी पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालें ताकि मध्य पूर्व में किसी बड़े संघर्ष की संभावना को रोका जा सके।
मैक्रों ने होर्मुज स्ट्रेट को बताया महत्वपूर्ण
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भी बातचीत के दौरान मध्य पूर्व की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि फ्रांस क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने के लिए प्रयास कर रहा है और किसी भी तरह की अस्थिरता को रोकना चाहता है। मैक्रों ने विशेष रूप से होर्मुज स्ट्रेट का उल्लेख करते हुए कहा कि यह समुद्री मार्ग पूरी दुनिया के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस का व्यापार होता है। इसलिए इस मार्ग को हर हाल में खुला रखा जाना चाहिए और जहाजों की आवाजाही बाधित नहीं होनी चाहिए।
ट्रंप ने समझौते को बताया करीब
इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देश परमाणु समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं और सकारात्मक प्रगति हो रही है। हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि बातचीत सफल नहीं होती है तो सैन्य कार्रवाई का विकल्प भी खुला रहेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका की सबसे बड़ी प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार विकसित न कर सके।
ट्रंप के अनुसार, ईरान ऐसी शर्तों पर सहमत होने की दिशा में बढ़ रहा है जिनके तहत वह न तो परमाणु हथियार बनाएगा और न ही किसी अन्य देश से प्राप्त करेगा।
बातचीत आसान नहीं, लेकिन उम्मीद कायम
डोनाल्ड ट्रंप ने माना कि ईरान के साथ बातचीत आसान नहीं है और इसमें समय लग रहा है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई जटिल मुद्दे हैं, लेकिन धीरे-धीरे समाधान की दिशा में प्रगति हो रही है। उनका मानना है कि यदि समझौता सफल होता है तो यह न केवल अमेरिका और ईरान के लिए बल्कि पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी।
वैश्विक राजनीति पर पड़ सकता है बड़ा असर
अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है। यदि यह वार्ता सफल रहती है तो इससे मध्य पूर्व में तनाव कम हो सकता है, तेल बाजारों में स्थिरता आ सकती है और वैश्विक राजनीति में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल मिस्र, फ्रांस और अन्य देशों की कूटनीतिक कोशिशें जारी हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है और क्या वास्तव में अमेरिका और ईरान किसी बड़े समझौते तक पहुंच पाते हैं।
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