ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए एक बार फिर बातचीत की संभावनाएं तेज हो गई हैं। पहले दौर की बातचीत पाकिस्तान और मिस्र की पहल पर इस्लामाबाद में हुई थी, लेकिन वह किसी ठोस नतीजे तक नहीं पहुंच सकी। अब दूसरे दौर की बातचीत को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं, ऐसे में वैश्विक स्तर पर कई देश शांति प्रक्रिया में भूमिका निभाने की कोशिश कर रहे हैं।
भारत की भूमिका पर US का संकेत
भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने इस पूरे मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करने के लिए भारत की भागीदारी का स्वागत करेगा। एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि “पूरी दुनिया शांति प्रक्रिया में योगदान दे सकती है और इसमें भारत भी शामिल है।” हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस दिशा में कदम उठाने का फैसला भारत को ही करना होगा।
ट्रंप का रुख: सभी का स्वागत
सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस मामले में किसी प्रकार का भेदभाव नहीं कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि ट्रंप उन सभी देशों का स्वागत करते हैं, जो इस संघर्ष को समाप्त करने में मदद करना चाहते हैं। यानी शांति वार्ता के लिए अमेरिका हर संभावित सहयोगी के साथ काम करने को तैयार है।
भारत-अमेरिका संबंधों पर संकेत
गोर के बयान से यह भी संकेत मिला कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर जल्द ही कुछ बड़े ऐलान हो सकते हैं। हालांकि उन्होंने इन मुद्दों पर विस्तार से जानकारी देने से इनकार किया, लेकिन इतना जरूर कहा कि आने वाले दिनों में कुछ महत्वपूर्ण खबरें सामने आ सकती हैं।
मोदी-ट्रंप बातचीत पर अपडेट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई थी। इस बातचीत में मिडिल ईस्ट की स्थिति, होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। गोर ने बताया कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो जल्द ही भारत दौरे पर आ सकते हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य और वैश्विक असर
सर्जियो गोर ने कहा कि तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण क्षेत्र में अस्थिरता है। उन्होंने संकेत दिया कि होर्मुज जलडमरूमध्य का बंद होना पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका इस जलमार्ग को जल्द से जल्द खोलने के पक्ष में है, क्योंकि इससे भारत समेत कई देशों को आर्थिक राहत मिल सकती है।
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने वैश्विक राजनीति को एक बार फिर संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में भारत की संभावित भूमिका पर अमेरिका का यह बयान काफी अहम माना जा रहा है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भारत इस शांति प्रक्रिया में कितनी सक्रिय भूमिका निभाता है और क्या आने वाले दिनों में कोई ठोस समाधान निकल पाता है।
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