ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी बीच अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों और समुद्री इलाकों के आसपास नाकाबंदी लागू करने के लिए 15 से ज्यादा जंगी जहाज तैनात कर दिए हैं। इनमें USS Tripoli (LHA-7) जैसे अत्याधुनिक युद्धपोत भी शामिल हैं, जिन्हें अरब सागर में तैनात किया गया है। यह कदम उस समय उठाया गया है जब पाकिस्तान में दोनों देशों के बीच बातचीत विफल हो गई।
कैसे लागू हुई नाकाबंदी?
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, भारतीय समयानुसार शाम करीब 7:30 बजे से यह नाकाबंदी शुरू की गई। यह नाकाबंदी फारस की खाड़ी, ओमान की खाड़ी और ईरानी बंदरगाहों के आसपास लागू की जा रही है।
इसका उद्देश्य उन सभी जहाजों पर निगरानी रखना है, जो ईरानी बंदरगाहों में प्रवेश कर रहे हैं या वहां से निकल रहे हैं। हालांकि, अमेरिका ने साफ किया है कि गैर-ईरानी बंदरगाहों से आने-जाने वाले जहाजों को रोका नहीं जाएगा।
USS Tripoli और आधुनिक हथियारों की तैनाती
USS Tripoli (LHA-7) को खास तौर पर इस ऑपरेशन के लिए तैनात किया गया है। यह एक आधुनिक युद्धपोत है, जिसमें पारंपरिक वेल डेक नहीं होता, जिससे इसमें ज्यादा एयरक्राफ्ट तैनात किए जा सकते हैं। इस पर 5वीं पीढ़ी के F-35B लाइटनिंग II स्टील्थ फाइटर जेट्स और MV-22 Osprey विमान मौजूद हैं। युद्ध जैसी स्थिति में यह जहाज 20 से ज्यादा F-35B जेट्स को संभाल सकता है, जो इसे बेहद खतरनाक बनाता है।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अगर कोई भी ईरानी फास्ट अटैक शिप इस नाकाबंदी के करीब आता है, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि संघर्ष के दौरान ईरान की नौसेना का बड़ा हिस्सा पहले ही खत्म हो चुका है और 150 से ज्यादा जहाज डुबो दिए गए हैं।
बातचीत फेल होने के बाद बढ़ा तनाव
अमेरिका की यह कार्रवाई पाकिस्तान में हुई उच्चस्तरीय वार्ता के विफल होने के बाद सामने आई है। उपराष्ट्रपति जेडी वैंस के नेतृत्व में एक अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद गया था, लेकिन कोई समझौता नहीं हो सका। इसके बाद ही राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी का ऐलान कर दिया, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं।
वैश्विक असर और चिंता
इस पूरे घटनाक्रम का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर तनाव बढ़ने से वैश्विक व्यापार और तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह तनाव और बढ़ता है, तो इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव अब सैन्य टकराव की ओर बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका की नाकाबंदी और कड़े रुख ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकाल पाएंगे या यह टकराव और गंभीर रूप लेगा।
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