ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पाकिस्तान में होने वाली अहम शांति वार्ता से ठीक पहले ईरान की ओर से कड़ा रुख सामने आया है। ईरान के सुप्रीम लीडर मोज्तबा खामेनेई ने अमेरिका और इजरायल को साफ चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान पर हमला करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
“हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन अधिकार नहीं छोड़ेंगे”
मोज्तबा खामेनेई ने अपने बयान में कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अपने अधिकारों से पीछे भी नहीं हटेगा। उन्होंने कहा कि देश पर हमला करने वालों से हर नुकसान का हिसाब लिया जाएगा और शहीदों के खून की कीमत वसूली जाएगी। उनका यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित सीजफायर के बाद पहली प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया है।
“ईरान बड़ी ताकत बनने की दहलीज पर”
खामेनेई ने दावा किया कि ईरान इस संघर्ष में निर्णायक रूप से मजबूत बनकर उभरा है। उन्होंने कहा कि देश अब एक बड़ी ताकत बनने की दहलीज पर खड़ा है और उसकी सेना ने इस जंग में महत्वपूर्ण जीत हासिल की है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज स्ट्रेट के प्रबंधन को लेकर ईरान नई रणनीति अपनाने जा रहा है।
इस्लामाबाद में अहम बैठक
अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सशर्त युद्ध-विराम के बाद अब दोनों देशों के बीच पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में उच्च-स्तरीय वार्ता होने जा रही है। इस बैठक का उद्देश्य मौजूदा सीजफायर को स्थायी शांति में बदलना और दोनों देशों के बीच मतभेदों को सुलझाना है।
इजरायल पर भी आरोप
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान ने लेबनान पर इजरायल के हालिया हमलों को युद्ध-विराम का उल्लंघन बताया है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से शांति वार्ता का कोई मतलब नहीं रह जाता। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ईरान की “उंगलियां ट्रिगर पर” रहेंगी और वह अपने सहयोगियों को अकेला नहीं छोड़ेगा।
पाकिस्तान की तैयारी
इस महत्वपूर्ण बैठक की मेजबानी कर रहे पाकिस्तान ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के कार्यालय के अनुसार, सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने बैठक की तैयारियों की समीक्षा की है। पाकिस्तान ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि वार्ता के दौरान पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भी पहुंचेगा
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल इस बैठक में हिस्सा ले सकता है। हालांकि, उनके आगमन का समय अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।
पाकिस्तान में होने वाली यह शांति वार्ता पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव को कम करने के लिहाज से बेहद अहम मानी जा रही है। एक ओर ईरान का सख्त रुख सामने आया है, तो दूसरी ओर बातचीत की उम्मीद भी बनी हुई है। अब सबकी नजर इस बैठक पर टिकी है, जो यह तय करेगी कि क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित हो पाती है या नहीं।
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