ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
ईरान में एक अजीब घटना ने लोगों की नींद उड़ा दी। हजारों लोगों के मोबाइल पर एक अनजान नंबर से फारसी भाषा में मैसेज आया। मैसेज का मतलब साफ था—“अमेरिकी राष्ट्रपति एक्शन लेने वाले हैं, इंतज़ार कीजिए और देखिए।” एक तरफ यह मैसेज, दूसरी तरफ पहले से चल रहा अमेरिका-ईरान तनाव… दोनों मिलकर डर और बेचैनी का माहौल बना रहे हैं।
अनजान मैसेज और लोगों की घबराहट
सोचिए, सुबह-सुबह अचानक एक ऐसा मैसेज आए जिसमें “एक्शन” और “इंतज़ार” जैसी बात हो। बहुत से लोगों ने इसे धमकी माना, कुछ ने इसे अफवाह समझा, और कुछ लोग इसे मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिश कह रहे हैं। ईरान में हालात वैसे भी नाजुक हैं, इसलिए ऐसी छोटी-सी चीज़ भी बड़ा असर डाल देती है।
ट्रंप का सख्त रुख और सैन्य तैयारी की चर्चा
इसी बीच डोनाल्ड ट्रंप का तेहरान के खिलाफ बयान लगातार सख्त होता दिख रहा है। माहौल ऐसा बन रहा है कि अगर बातचीत विफल हुई तो सैन्य कदम उठ सकता है। मध्य-पूर्व में सैन्य तैनाती बढ़ने की बातें भी सामने आती रही हैं, जिससे तनाव और बढ़ जाता है। लोग यही पूछ रहे हैं—क्या यह सिर्फ दबाव की रणनीति है या सच में कोई बड़ा कदम आने वाला है?
जिनेवा में बातचीत की उम्मीद
तनाव के बीच एक उम्मीद वाली बात यह है कि बातचीत की तारीख भी तय बताई गई है। 26 फरवरी को जिनेवा में आगे की बात होने का जिक्र है। जब भी दो देश टकराव के करीब होते हैं, तब बातचीत ही सबसे बड़ा रास्ता होती है। लेकिन दिक्कत यह है कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी शर्तों पर टिके रहते हैं, और भरोसे की कमी इतनी ज्यादा है कि हर कदम पर शक पैदा हो जाता है।
परमाणु कार्यक्रम पर दो अलग नजरिए
ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम नागरिक जरूरतों के लिए है। दूसरी तरफ पश्चिमी देश इसे हथियार बनाने की दिशा में कदम मानते हैं। यही असली जड़ है। जब मुद्दा “परमाणु” बन जाए, तो भाषा और रवैया दोनों तेज हो जाते हैं। इसलिए दुनिया भर की नजरें इस विवाद पर टिकी हैं।
अंदरूनी असंतोष भी एक बड़ी वजह
ईरान के अंदर भी माहौल शांत नहीं है। छात्रों के प्रदर्शन, नारेबाजी और सरकार के खिलाफ गुस्सा समय-समय पर बाहर आता रहा है। ऐसी स्थिति में बाहरी तनाव कई बार अंदरूनी राजनीति पर भी असर डालता है। सरकारें अक्सर सुरक्षा का मुद्दा उठाकर सख्ती बढ़ाती हैं, और आम लोगों पर दबाव बढ़ जाता है।
आगे क्या?
अभी साफ यह है कि एक अनजान मैसेज ने डर बढ़ा दिया है, और राजनीति ने उसे और हवा दे दी। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि बातचीत से रास्ता निकलेगा या तनाव नई दिशा लेगा। फिलहाल आम लोगों के लिए सबसे जरूरी है सतर्क रहना, अफवाहों से बचना और हर वायरल मैसेज को सच मानकर घबराना नहीं।
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