ज़मीन से जुड़ी सोच और सच्ची खबरें
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पश्चिम एशिया में इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच छिड़ी जंग का आज तीसरा दिन है। हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं और दोनों तरफ से हमले तेज होते दिख रहे हैं। अल-जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल ने मिलकर अब तक ईरान के 1000 से ज्यादा ठिकानों को निशाना बनाया है। शुरुआती 30 घंटों में ही 2000 से ज्यादा बम गिराए गए, जिससे भारी तबाही हुई है। इस संघर्ष ने न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है।
हमले और तेज करने की चेतावनी
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कहा है कि आने वाले दिनों में तेहरान पर हमले और तेज किए जाएंगे। इजराइली सेना (IDF) ने राजधानी तेहरान समेत कई अहम सैन्य और सरकारी ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं।
IDF द्वारा जारी फुटेज में ईरान के रक्षा मुख्यालय और अन्य सरकारी इमारतों को निशाना बनाते हुए दिखाया गया है। इजराइल का दावा है कि ये हमले ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के लिए किए जा रहे हैं।
ईरान का पलटवार
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई में कोई कमी नहीं छोड़ी है। उसने इजराइल समेत 9 देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। ईरान से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलें इजराइल के कई शहरों में गिरी हैं।
बेत शेमेश के रिहायशी इलाके में मिसाइल गिरने से भारी नुकसान हुआ है। वहीं, यरुशलम में भी मिसाइल हमले से तबाही मची है। मलबे में दबी गाड़ियां और क्षतिग्रस्त इमारतें इस संघर्ष की भयावहता को दिखाती हैं। तेल अवीव में हुए हमलों के बाद इजराइली राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया।
ईरान में भारी जनहानि
इस जंग का सबसे बड़ा असर आम नागरिकों पर पड़ रहा है। ईरान की राजधानी तेहरान समेत 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया गया है। अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 740 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं।
सबसे दर्दनाक घटना एक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले की है, जिसमें 180 छात्राओं की मौत हो गई और 45 घायल हैं। इस घटना ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गहरा आक्रोश पैदा किया है। रिहायशी इलाकों में हो रही बमबारी से लोगों में दहशत का माहौल है। हजारों परिवार सुरक्षित जगहों की तलाश में अपने घर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं।
हिजबुल्लाह की एंट्री
इस जंग में अब लेबनान का उग्रवादी संगठन हिजबुल्लाह भी शामिल हो गया है। उसने इजराइल के कई इलाकों में बमबारी की है। इसके जवाब में इजराइल ने लेबनान बॉर्डर से लगे 50 गांव खाली करा लिए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हिजबुल्लाह की भूमिका और बढ़ती है, तो यह संघर्ष पूरे क्षेत्र में फैल सकता है। इससे सीरिया और अन्य पड़ोसी देशों के भी इसमें खिंचने की आशंका बढ़ गई है।
पहले दिन ही बड़ा झटका
28 फरवरी को शुरू हुई इस जंग के पहले ही दिन ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की बमबारी में मौत हो गई थी। यह घटना पूरे संघर्ष का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई। इसके बाद ईरान ने इसे खुली जंग का रूप दे दिया। खामेनेई की मौत के बाद ईरान में गुस्सा और शोक दोनों का माहौल है। सरकार ने इसे “राष्ट्र पर हमला” बताया है और कड़े जवाब की कसम खाई है।
वैश्विक चिंता और आगे का खतरा
यह संघर्ष अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रहा। अमेरिका की सीधी भागीदारी और खाड़ी देशों में हमलों ने इसे अंतरराष्ट्रीय संकट बना दिया है। तेल आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर इसका असर साफ दिखने लगा है।
संयुक्त राष्ट्र समेत कई देशों ने संयम बरतने और बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। लेकिन फिलहाल दोनों पक्ष पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहे।
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